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IndiGo की 67 उड़ानें रद्द: मौसम और ऑपरेशनल कारण से
25 दिसंबर 2025 को जब देश भर में लोग क्रिसमस और आने वाले न्यू ईयर की छुट्टियों की तैयारियों में लगे थे, उसी दौरान भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन IndiGo ने अचानक 67 उड़ानें रद्द कर दीं। इस खबर से हवाई यात्रा करने वाले हज़ारों मुसाफ़िर परेशान हो गए। कई लोग एयरपोर्ट पर घंटों बैठे रहे, तो कई की छुट्टियों की पूरी प्लानिंग ही बिगड़ गई।
IndiGo ने बाद में साफ़ किया कि ज़्यादातर उड़ानें मौसम की खराबी और घने कोहरे की वजह से रद्द करनी पड़ीं। यानी आसमान में हालात इतने खराब थे कि उड़ान भरना या जहाज़ को सुरक्षित उतारना मुमकिन नहीं था। कुछ उड़ानें ऐसी भी थीं, जिन्हें ऑपरेशनल वजहों से रद्द किया गया।
खराब मौसम और घना कोहरा बना सबसे बड़ी वजह
IndiGo के मुताबिक, 67 में से 63 उड़ानें खास तौर पर खराब मौसम और घने कोहरे की वजह से रद्द हुईं। सर्दियों के मौसम में, खासकर उत्तर भारत में, कोहरा हर साल एक बड़ी मुसीबत बनकर आता है। इस बार भी वही हुआ।
अगर्तला, चंडीगढ़, देहरादून, वाराणसी, बेंगलुरु जैसे कई शहरों के एयरपोर्ट्स पर दृश्यता (Visibility) इतनी कम हो गई कि पायलटों के लिए रनवे साफ़ दिखना मुश्किल हो गया। जब पायलट को सामने का रास्ता ठीक से न दिखे, तो विमान को उड़ाना या उतारना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। ऐसे हालात में उड़ान रद्द करना ही सबसे सुरक्षित फैसला माना जाता है।
DGCA का ‘कोहरा मौसम’ नियम
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने पहले से ही सर्दियों के इस दौर को “कोहरा मौसम” (Fog Window) घोषित कर रखा है। यह अवधि 10 दिसंबर से 10 फरवरी तक रहती है। इस दौरान एयरलाइनों को सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है।
DGCA के नियमों के मुताबिक, हर विमान को कोहरे में उड़ान भरने या उतरने की इजाज़त नहीं होती। सिर्फ वही विमान और पायलट ऐसा कर सकते हैं, जो Low Visibility Operations के लिए पूरी तरह तैयार हों।
CAT-III तकनीक क्या है?
कोहरे में उड़ान संचालन के लिए विमानों में खास तकनीक होनी ज़रूरी होती है:
CAT-III-B तकनीक वाले विमान बेहद कम दृश्यता में भी लैंडिंग कर सकते हैं, यहाँ तक कि जब सामने सिर्फ 50 मीटर तक ही दिख रहा हो।
CAT-III-A तकनीक वाले विमान लगभग 200 मीटर की दृश्यता में सुरक्षित लैंडिंग कर पाते हैं।
जिन विमानों में यह तकनीक नहीं होती, उन्हें कोहरे के समय उड़ान भरने या उतरने की अनुमति नहीं मिलती। यही वजह है कि भले ही सभी नियम पूरे हों, लेकिन जब कोहरा बहुत ज़्यादा घना हो जाए, तो हालात काबू से बाहर हो जाते हैं।
ऑपरेशनल कारणों से भी रद्द हुई उड़ानें
IndiGo ने बताया कि 4 उड़ानें ऐसी भी थीं, जो मौसम की वजह से नहीं बल्कि ऑपरेशनल कारणों से रद्द करनी पड़ीं। इसका मतलब होता है
क्रू की उपलब्धता, विमान की रोटेशन, या संसाधनों के सही तरीके से न मिल पाने जैसी अंदरूनी समस्याएँ।
यात्रियों पर पड़ा भारी असर
क्योंकि यह सब कुछ छुट्टियों के सीज़न में हुआ, इसलिए इसका असर और भी ज़्यादा महसूस किया गया। कई यात्रियों को होटल बुकिंग रद्द करनी पड़ी, कुछ की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई, तो कुछ लोग घंटों तक एयरपोर्ट पर असमंजस की हालत में बैठे रहे।
हालांकि, इंडिगो ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के ज़रिये यात्रियों को जानकारी देने की कोशिश की और कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।
सर्दियों में कोहरा कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब मौसम हद से ज़्यादा खराब हो जाए, तो तकनीक और नियम भी बेबस हो जाते हैं। ऐसे में उड़ान रद्द करना भले ही मुसाफ़िरों के लिए तकलीफ़देह हो, लेकिन जान की सलामती के लिहाज़ से यही सबसे बेहतर फैसला माना जाता है।
यानी कुल मिलाकर, इंडिगो की उड़ानों का रद्द होना लापरवाही नहीं, बल्कि मजबूरी और सुरक्षा से जुड़ा फैसला था जिसे समझना ज़रूरी है, चाहे हालात कितने ही मुश्किल क्यों न लगें।
यात्रियों पर प्रभाव: निराशा और परेशानी
समय पर सफ़र न हो पाना और अचानक बदलाव
इन उड़ानों के रद्द होने और देरी से चलने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ा। बहुत से लोगों की फ्लाइट्स या तो आख़िरी वक़्त पर कैंसल कर दी गईं या फिर घंटों लेट उड़ीं। इसका नतीजा ये हुआ कि कई मुसाफ़िरों को एयरपोर्ट पर लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ा, किसी को बैठने की जगह तक नसीब नहीं हुई।
कई यात्रियों की पूरी ट्रैवल प्लानिंग गड़बड़ा गई। छुट्टियों में घूमने निकले लोग परेशान हो गए, किसी को अपनी आगे की फ्लाइट छोड़नी पड़ी, तो किसी को मजबूरन अपनी यात्रा की तारीख़ बदलनी पड़ी। बहुत से मामलों में लोगों को होटल की बुकिंग दोबारा करनी पड़ी, टैक्सी, बस या लोकल ट्रांसपोर्ट के इंतज़ाम फिर से करने पड़े, जिससे जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ा।

एक यात्री ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए लिखा कि उसे बार-बार फ्लाइट में देरी के मैसेज मिलते रहे। हर कुछ घंटों में नई सूचना आती रही, जिससे उसका सफ़र तय समय से कहीं ज़्यादा लंबा और थकाने वाला बन गया।
यात्रियों को एयरलाइन की सलाह
इस पूरी स्थिति को देखते हुए एयरलाइन ने मुसाफ़िरों से गुज़ारिश की है कि वे सफ़र पर निकलने से पहले थोड़ी एहतियात बरतें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि:
अपनी फ्लाइट का स्टेटस पहले से ज़रूर चेक करें
एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लगातार अपडेट देखते रहें
एयरपोर्ट पहुंचकर वहाँ लगे सूचना बोर्ड (Information Display Boards) पर नज़र बनाए रखें
इससे यात्रियों को आख़िरी वक़्त की परेशानी से कुछ हद तक बचने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर हालात यही कहते हैं कि इस मौसम में सफ़र करते वक़्त थोड़ा सब्र, थोड़ी समझदारी और लगातार जानकारी पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी है ताकि सफ़र की मुश्किलें कुछ कम की जा सकें।
DGCA की नज़र में IndiGo, मौसम के अलावा भी परेशानी
सच यह है कि सिर्फ़ मौसम ही सारी मुसीबतों की वजह नहीं है। IndiGo की अपनी ऑपरेशनल दिक्कतें भी इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में हुई बड़ी संख्या में उड़ान रद्द होने की घटनाओं के बाद DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने इंडिगो के कामकाज पर कड़ी नज़र रखना शुरू कर दिया है।
DGCA ने एयरलाइन से साफ़ तौर पर जवाब मांगा है कि आखिर इतनी ज़्यादा फ्लाइट्स क्यों रद्द करनी पड़ीं और आगे ऐसी स्थिति से निपटने के लिए उनकी क्या तैयारी है। खास तौर पर दिसंबर की शुरुआत में जिस तरह एक के बाद एक कई उड़ानें कैंसल हुईं, उस पर नियामक की नज़र टिक गई है।
नए नियम बने एक और चुनौती
इस महीने की शुरुआत में विमानन नियामक ने कुछ नए नियम लागू किए, जो सीधे तौर पर पायलटों और उड़ान संचालन से जुड़े हैं। इन नियमों का मकसद सुरक्षा बढ़ाना था, लेकिन इसका असर एयरलाइनों के शेड्यूल पर साफ़ दिखने लगा।
नए नियमों के तहत:
पायलटों के लिए आराम का समय बढ़ा दिया गया
ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) को लेकर सख़्त पाबंदियाँ लगाई गईं
रात की उड़ानों और लैंडिंग के नियम पहले से ज़्यादा कड़े कर दिए गए
ये सारे बदलाव यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी थे, इसमें कोई शक नहीं। मगर इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन के लिए इतने कम समय में अपने पूरे नेटवर्क और शेड्यूल को नए नियमों के मुताबिक ढाल पाना आसान नहीं रहा।
रद्दीकरण और देरी की असली वजह
इन्हीं नियमों और संचालन से जुड़ी परेशानियों की वजह से हज़ारों उड़ानें या तो रद्द करनी पड़ीं या फिर देर से चलीं। क्रू की उपलब्धता, पायलटों की ड्यूटी प्लानिंग और विमानों की समय पर तैनाती सब पर इसका असर पड़ा।
कुल मिलाकर तस्वीर ये बनती है कि मौसम ने मुश्किलें बढ़ाईं, लेकिन ऑपरेशनल दबाव और नए नियमों ने हालात को और भी पेचीदा बना दिया। अब DGCA की कड़ी निगरानी में इंडिगो को अपने सिस्टम को मज़बूत करना होगा, ताकि आगे चलकर यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
आख़िरकार, मुसाफ़िर यही चाहते हैं कि सफ़र महफ़ूज़ भी हो और बेवजह तकलीफ़देह भी न बने और इसी संतुलन की तलाश में फिलहाल पूरा विमानन सेक्टर जूझ रहा है।
नए साल-सीज़न में समस्या का बढ़ना: बड़ा सवाल
यह साफ़ हो चुका है कि IndiGo की परेशानी सिर्फ़ मौसम तक सीमित नहीं रही। असल में यह संकट ऐसे वक़्त में सामने आया है, जब पूरे देश में हवाई यात्रियों की तादाद रोज़-ब-रोज़ बढ़ती जा रही है। लोग छुट्टियाँ मनाने निकल रहे हैं, परिवार से मिलने जा रहे हैं और न्यू ईयर के जश्न के लिए सफ़र कर रहे हैं। यानी दबाव पहले से ही बहुत ज़्यादा था।
एक तरफ़ नव वर्ष और छुट्टियों का सीज़न चल रहा था, जिस वजह से उड़ानों पर बोझ अपने चरम पर पहुंच गया। दूसरी तरफ़ कोहरे का मौसम शुरू हो चुका था। कई शहरों में हालात ऐसे थे कि रनवे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था, और पायलटों के लिए जहाज़ उतारना आसान नहीं था।
ऊपर से सुरक्षा नियमों का सख़्ती से पालन भी ज़रूरी था। CAT-III जैसे नियम लागू थे, जिनके तहत हर विमान और हर क्रू को कोहरे में उड़ान की इजाज़त नहीं मिल सकती। इसका मतलब ये हुआ कि सीमित विमानों और पायलटों से ही काम चलाना पड़ा।
इसी बीच नए संचालन नियम भी लागू हो गए, जिनका सीधा असर पायलटों की ड्यूटी प्लानिंग पर पड़ा। पायलटों की रोस्टरिंग, उनके आराम के घंटे, और ड्यूटी टाइम को लेकर नियम इतने सख़्त हो गए कि पुराने शेड्यूल काम के नहीं रहे।
इन सब हालात का आपस में सही तालमेल नहीं बैठ पाया। नतीजा ये हुआ कि इंडिगो को एक के बाद एक मुश्किल फैसले लेने पड़े कहीं उड़ान रद्द करनी पड़ी, तो कहीं घंटों की देरी हुई। और इस पूरी खींचतान का सबसे बड़ा बोझ आम यात्रियों पर पड़ा।
लोगों की छुट्टियाँ बिगड़ीं, योजनाएँ बदलीं और सफ़र जो आरामदेह होना चाहिए था, वह थकाने वाला बन गया। कुल मिलाकर, मौसम, नियम और बढ़ते यात्री दबाव इन सबके एक साथ आ जाने से इंडिगो के लिए हालात संभालना आसान नहीं रहा, और उसकी सीधी कीमत मुसाफ़िरों को चुकानी पड़ी।
भविष्य में क्या होने की आशंका?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह खराब बना रहा, तो आगे भी और उड़ानें रद्द होने का सिलसिला चल सकता है। कोहरा बढ़ा तो एयरलाइन के सामने मुश्किलें और बढ़ेंगी।
ऐसे हालात से निपटने के लिए इंडिगो को अपने अंदरूनी इंतज़ाम और बेहतर करने होंगे। खास तौर पर क्रू मैनेजमेंट पर ज़्यादा ध्यान देना होगा—यानी पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी प्लानिंग समय पर और सही तरीके से करनी होगी। साथ ही फ्लीट रोटेशन, यानी कौन-सा विमान किस रूट पर कब जाएगा, इसकी योजना भी पहले से मज़बूत बनानी पड़ेगी।
क्योंकि अब IndiGo DGCA की कड़ी निगरानी में है, इसलिए एयरलाइन को सिर्फ उड़ान चलाना ही नहीं, बल्कि यात्रियों को सही और समय पर जानकारी देना भी उतना ही ज़रूरी होगा। सर्विस का स्तर बेहतर करना और सूचना तंत्र को मज़बूत बनाना अब टालने का विकल्प नहीं है।
दरअसल, IndiGo की 67 उड़ानों का रद्द होना कोई एक दिन की या सिर्फ मौसम से जुड़ी घटना नहीं है। इसके पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं
कहीं मौसम और घने कोहरे ने लैंडिंग मुश्किल बना दी, कहीं ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में दिक्कत आई, तो कहीं एयरलाइन की योजना और नए नियमों के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं रहा। ऊपर से DGCA की सख़्ती भी है, जो सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी तो है, लेकिन एयरलाइन पर दबाव बढ़ाती है।
इन तमाम वजहों का सीधा असर यात्रियों की ट्रैवल प्लानिंग पर पड़ रहा है। लोगों की उड़ानें रद्द हो रही हैं, सफ़र लंबा खिंच रहा है और छुट्टियों का मज़ा किरकिरा हो रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इंडिगो वक़्त रहते सुधारात्मक क़दम उठा लेती है, तो आने वाले दिनों में हालात धीरे-धीरे संभल सकते हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मुसाफ़िरों को आगे भी परेशान करने वाले अनुभवों से गुजरना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इंडिगो इस चुनौती से कैसे निपटती है।
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