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Budget 2026 में Big Relief की उम्मीद: मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए Tax Cut की Strong Expectation

Budget 2026 में Big Relief की उम्मीद: मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए Tax Cut की Strong Expectation

Budget 2026: सैलरीड और मिडिल क्लास टैक्सपेयर की शीर्ष 5 इनकम टैक्स उम्मीदें

भारत सरकार 1 फ़रवरी 2026 को संसद में केंद्रीय Budget 2026 पेश करने जा रही है। इस बजट पर सबसे ज़्यादा निगाहें मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों और ईमानदारी से टैक्स भरने वाले आम नागरिकों की टिकी हुई हैं। वजह साफ़ है आज के दौर में महंगाई लगातार बढ़ रही है, घर का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है और आम आदमी की जेब पर दबाव पहले से कहीं ज़्यादा है।

पिछले बजट में सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को टैक्स-फ्री करके मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी थी। टैक्स स्लैब में बदलाव हुआ, कुछ डिडक्शन्स बढ़ाई गईं और लोगों को थोड़ी-बहुत सांस लेने की जगह मिली। लेकिन अब हालात फिर से चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

स्कूल की फीस, मेडिकल खर्च, किराया, EMI हर चीज़ महंगी हो चुकी है। ऐसे में लोगों को लग रहा है कि Budget 2026 से एक नई उम्मीद की किरण जरूर निकलनी चाहिए। इसी उम्मीद के साथ आइए जानते हैं कि सैलरीड और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स इस बजट से सबसे ज़्यादा क्या चाहते हैं।

स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की सबसे बड़ी उम्मीद

इस बार सबसे ज़्यादा चर्चा में जो मांग है, वो है स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाने की। अभी नौकरीपेशा लोगों को सालाना आय पर ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलती है। आम लोगों की ख्वाहिश है कि सरकार इसे बढ़ाकर ₹1,00,000 या उससे भी ज़्यादा करे।

असल में स्टैंडर्ड डिडक्शन वो राहत है, जो सैलरीड क्लास को बिना किसी काग़ज़ी झंझट के मिलती है। ना कोई बिल दिखाना, ना कोई निवेश साबित करना सीधे टैक्स लगने से पहले ही रकम घट जाती है। अगर यह डिडक्शन बढ़ाई जाती है, तो नौकरी करने वाले लाखों लोगों की कर-योग्य आय अपने-आप कम हो जाएगी, और टैक्स का बोझ हल्का पड़ेगा।

टैक्स एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि आज की महंगाई को देखते हुए यह कदम बहुत ज़रूरी हो गया है। रोज़मर्रा के खर्च, ट्रैवल, हेल्थ, बच्चों की पढ़ाई इन सब में जो इज़ाफा हुआ है, उसे ध्यान में रखकर स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना वक़्त की मांग बन चुका है।

अगर सरकार इस बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख कर देती है, तो नई टैक्स व्यवस्था के तहत लगभग ₹13 लाख तक की आय पर असल मायने में टैक्स नहीं लगेगा। यानी मेहनत की कमाई का ज़्यादा हिस्सा आदमी अपनी जेब में रख पाएगा।

सीधी-सी बात ये है स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ेगी, तो नौकरीपेशा वर्ग को सुकून मिलेगा, टैक्स का बोझ हल्का होगा और आम आदमी को लगेगा कि सरकार उसकी परेशानी समझ रही है।

यही वजह है कि Budget 2026 से पहले मिडिल क्लास के दिल में सबसे बड़ी दुआ और उम्मीद यही है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिले।

Budget 2026: टैक्स स्लैब में संशोधन और 87A छूट सीमा बढ़ाना

पिछले बजट में सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा फ़ैसला लिया था, जब सालाना ₹12 लाख तक की आमदनी को टैक्स-फ्री कर दिया गया। इससे लाखों नौकरीपेशा और मिडिल क्लास परिवारों को सीधा फायदा हुआ और लोगों की जेब पर टैक्स का दबाव कुछ हद तक कम हुआ। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। महंगाई बढ़ रही है, खर्चे बढ़ गए हैं और ऐसे में लोग चाहते हैं कि Budget 2026 में यह राहत और आगे बढ़े।

इसी वजह से इस बार उम्मीद की जा रही है कि सरकार इनकम टैक्स की धारा 87A के तहत मिलने वाली छूट की सीमा को ₹14 लाख या शायद ₹15 लाख तक बढ़ा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि मध्यम आय वर्ग के और ज़्यादा लोग पूरी तरह टैक्स-मुक्त हो जाएंगे।

यानी जो पैसा अभी टैक्स में चला जाता है, वही पैसा घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज या थोड़ी बहुत बचत में इस्तेमाल हो सकेगा। इसे ही कहते हैं डिस्पोज़ेबल इनकम बढ़ना, और यही आज के आम आदमी की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

सिर्फ इतना ही नहीं, कुछ जानकारों और एक्सपर्ट्स की राय है कि सरकार 30 प्रतिशत वाली सबसे ऊँची टैक्स स्लैब की सीमा में भी बदलाव कर सकती है। अभी यह स्लैब ₹24 लाख से ऊपर की आय पर लगती है, लेकिन सुझाव दिया जा रहा है कि इसे बढ़ाकर ₹35 लाख तक किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो मिडिल-हाई इनकम ग्रुप यानी वो लोग जो ठीक-ठाक कमाते हैं लेकिन बेहद अमीर नहीं हैं, उन्हें भी बड़ी राहत मिलेगी।

सीधी और साफ़ बात यह है कि अगर टैक्स स्लैब का दायरा बढ़ाया जाता है, तो लोगों की कमाई का ज़्यादा हिस्सा उनके अपने हाथ में रहेगा। इससे न सिर्फ़ टैक्स का बोझ हल्का होगा, बल्कि लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा कि सरकार उनकी मेहनत की कमाई की कद्र कर रही है।

नतीजा यही निकलता है Tax Slab में बदलाव और छूट की सीमा बढ़ाकर सरकार आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले टैक्स के बोझ को कम कर सकती है, और यही बजट 2026 से मिडिल क्लास की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक है।

होम लोन और हाउसिंग रिस्पेक्टिव डिडक्शन्स में राहत

जो लोग मिडिल क्लास से आते हैं और अपने ख़ुद के घर का सपना पूरा करने के लिए होम लोन लेते हैं, उनकी निगाहें भी Budget 2026 पर टिकी हुई हैं। ऐसे लोगों को इस बार सबसे ज़्यादा उम्मीद है कि सरकार हाउस लोन के ब्याज (इंटरेस्ट) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाएगी।

हक़ीक़त ये है कि पिछले कई सालों से होम लोन इंटरेस्ट पर मिलने वाली डिडक्शन की लिमिट लगभग वहीं की वहीं अटकी हुई है, जबकि दूसरी तरफ़ प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं और ब्याज दरें भी पहले से कहीं ज़्यादा हो चुकी हैं। ऐसे में मिडिल क्लास के लिए EMI चुकाना आसान नहीं रहा।

इसी वजह से मांग उठ रही है कि सरकार इस सीमा को बढ़ाकर नॉन-मेट्रो शहरों में कम से कम ₹3 लाख और मेट्रो शहरों में ₹5 लाख तक करे। अगर ऐसा होता है, तो जिन लोगों ने हाल के सालों में घर खरीदा है या खरीदने की सोच रहे हैं, उन्हें टैक्स में अच्छी-खासी राहत मिलेगी और EMI का दबाव कुछ हल्का पड़ेगा।

इसके साथ-साथ लोग ये भी चाहते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था में भी होम लोन से जुड़ी डिडक्शन्स को शामिल किया जाए। अभी नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब तो आसान हैं, लेकिन होम लोन जैसी बड़ी ज़रूरतों पर मिलने वाली छूट नहीं के बराबर है। अगर सरकार इस पर गौर करती है, तो नई टैक्स व्यवस्था और ज़्यादा आकर्षक बन सकती है।

सीधा सा इशारा साफ़ है अगर सरकार घर खरीदने वालों को टैक्स में राहत देती है, तो इससे न सिर्फ़ मिडिल क्लास को सुकून मिलेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी रफ्तार मिलेगी। घर बिकेंगे, निर्माण बढ़ेगा और पूरी अर्थव्यवस्था में हलचल आएगी।

यानी Budget 2026 में अगर होम लोन पर राहत मिलती है, तो यह फैसला आम आदमी और बाज़ार दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

सेक्शन 80C और निवेश-सेविंग डिडक्शन्स में सुधार

मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की एक पुरानी और सबसे ज़्यादा दोहराई जाने वाली मांग है कि सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाए। अभी यह लिमिट ₹1.5 लाख है, जो कई सालों से बदली नहीं है। जबकि इस बीच महंगाई बढ़ चुकी है और लोगों की आमदनी के साथ-साथ ज़रूरतें भी काफी बढ़ गई हैं।

अधिकतर मिडिल क्लास परिवार अपनी बचत PPF, ELSS, LIC, टैक्स सेविंग FD जैसे विकल्पों में लगाते हैं, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे और टैक्स में भी राहत मिले। लेकिन मौजूदा लिमिट के चलते लोग ज़्यादा निवेश चाहकर भी नहीं कर पाते। इसी वजह से यह उम्मीद की जा रही है कि बजट 2026 में सरकार 80C की सीमा को बढ़ाकर लोगों को ज़्यादा बचत और निवेश करने का मौका दे।

इसके साथ ही एक और अहम मांग लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) से जुड़ी है। फिलहाल शेयर या म्यूचुअल फंड जैसे निवेश पर मिलने वाली टैक्स-फ्री लिमिट ₹1.25 लाख है। अब मांग उठ रही है कि इसे बढ़ाकर ₹2 लाख किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो छोटे और मध्यम निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी।

खास तौर पर सीनियर सिटीज़न्स और वो लोग जो लंबे समय के लिए निवेश करते हैं, उनके लिए यह बदलाव बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे लोग जल्दबाज़ी में निवेश निकालने के बजाय लंबे वक्त तक पैसा लगाए रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

सीधी-सी बात यह है अगर सरकार 80C और LTCG दोनों में राहत देती है, तो लोग ज़्यादा निवेश करेंगे, ज़्यादा बचत करेंगे और भविष्य को लेकर थोड़ा बेफ़िक्र महसूस करेंगे। इससे न सिर्फ़ आम आदमी को फायदा होगा, बल्कि देश में लॉन्ग टर्म सेविंग कल्चर भी मज़बूत होगा।

यानी बजट 2026 में अगर ये बदलाव आते हैं, तो यह फैसला मिडिल क्लास और निवेशकों—दोनों के लिए सुकून देने वाला कदम साबित हो सकता है।

ITR दाखिल करने और टैक्स कंप्लायंस को सरल बनाने की उम्मीद

आज के दौर में मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों की एक बड़ी परेशानी सिर्फ़ टैक्स देना नहीं है, बल्कि टैक्स से जुड़ी पेचीदा प्रक्रियाएँ भी हैं। इसी वजह से अब ज़ोर-शोर से मांग उठ रही है कि सरकार टैक्स सिस्टम को और आसान, साफ़ और समझने लायक बनाए।

सैलरीड क्लास चाहती है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना, TDS का क्रेडिट क्लेम करना, और दूसरी टैक्स कंप्लायंस से जुड़ी औपचारिकताएँ कम उलझी हुई हों। आज हालात ये हैं कि छोटी-सी गलती भी नोटिस का कारण बन जाती है, जिससे आम आदमी बेवजह परेशान हो जाता है। लोग चाहते हैं कि टैक्स भरना एक बोझ नहीं, बल्कि एक सरल और भरोसेमंद प्रक्रिया बने।

अगर टैक्स फाइलिंग और क्रेडिट क्लेमिंग को आसान किया जाता है, तो टैक्सपेयर्स को कम झंझट, तेज़ रिफंड और बेहतर सर्विस मिलेगी। साथ ही सिस्टम जितना साफ़ होगा, धोखाधड़ी और गलत क्लेम की गुंजाइश भी उतनी ही कम रह जाएगी, जिससे ईमानदार टैक्सपेयर्स का भरोसा और मज़बूत होगा।

कई टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के बाद आकलन (Assessment) और विवाद समाधान की प्रक्रिया में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। अगर टैक्स से जुड़े झगड़े जल्दी और पारदर्शी तरीके से सुलझें, तो आम आदमी को कोर्ट-कचहरी और नोटिसों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सीधी और सच्ची बात यही है एक सरल टैक्स सिस्टम मतलब कम तनाव, ज़्यादा साफ़ नियम और तेज़ी से रिटर्न फाइल करने की सुविधा। यही वो बदलाव है, जिसकी उम्मीद सैलरीड और मिडिल क्लास बजट 2026 से दिल थामकर कर रही है।

कुल मिलाकर Budget 2026 क्या बदल सकता है?

Budget 2026 को लेकर लोगों की उम्मीदें ज़्यादातर टैक्स में राहत, सरल नियमों और मिडिल क्लास के साथ खड़े होने पर टिकी हुई हैं। आम आदमी चाहता है कि इनकम टैक्स के स्लैब बदले जाएँ, छूट और डिडक्शन्स बढ़ाई जाएँ, और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाएँ इतनी आसान हों कि हर कोई बिना डर और तनाव के रिटर्न भर सके।

लोगों की यह भी ख्वाहिश है कि सरकार निवेश करने वालों और घर खरीदने का सपना देखने वालों को कुछ अतिरिक्त सहारा दे, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच भविष्य को थोड़ा सुरक्षित बनाया जा सके। कुल मिलाकर मिडिल क्लास यही चाहता है कि टैक्स का बोझ हल्का हो और मेहनत की कमाई का ज़्यादा हिस्सा अपनी ज़िंदगी बेहतर बनाने में लग सके।

हालाँकि, टैक्स मामलों के जानकार और एक्सपर्ट्स यह भी साफ़ कहते हैं कि सरकार की वित्तीय हालत और ज़िम्मेदारियों को देखते हुए इस बार बहुत बड़ी टैक्स कटौती की उम्मीद करना शायद सही नहीं होगा। उनके मुताबिक़ सरकार बड़े फैसलों के बजाय छोटे-छोटे “ट्यूनिंग” बदलाव कर सकती है, ताकि संतुलन बना रहे और राजकोष पर ज़्यादा दबाव न पड़े।

इसके बावजूद, Budget 2026 से मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों की उम्मीदें काफ़ी ऊँची हैं। खास तौर पर स्टैंडर्ड डिडक्शन, इनकम टैक्स स्लैब, सेक्शन 80C की छूट, होम लोन पर राहत और टैक्स फाइलिंग सिस्टम को आसान बनाने को लेकर लोग बड़ी आस लगाए बैठे हैं।

अगर इन मोर्चों पर सरकार कुछ ठोस कदम उठाती है, तो इसका असर सीधा लाखों भारतीय परिवारों की जेब पर पड़ेगा। लोगों के पास खर्च करने के लिए ज़्यादा पैसा बचेगा, बाज़ार में रौनक आएगी और आम आदमी को यह एहसास होगा कि सरकार वाक़ई उसकी मुश्किलों को समझ रही है।

आख़िर में यही कहा जा सकता है Budget 2026 अगर मिडिल क्लास के हक़ में थोड़ा भी झुकाव दिखाता है, तो यह न सिर्फ़ आर्थिक राहत देगा, बल्कि आम आदमी के चेहरे पर सुकून की मुस्कान भी ले आएगा

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