Table of Contents
अंतरिक्ष की ऊँचाइयों में मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS पर इंसान लगातार करीब पच्चीस सालों से काम कर रहा है। यह अपने-आप में विज्ञान और इंसानी हिम्मत की एक बड़ी मिसाल है।
ऐसे में जब अचानक यह खबर सामने आई कि NASA ने ISS पर तैनात Crew 11 mission के चारों अंतरिक्ष यात्रियों को तय समय से पहले ही धरती पर वापस बुलाने का फैसला कर लिया है, तो पूरी दुनिया चौंक गई।यह कोई आम फैसला नहीं था।
NASA के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी मिशन को सिर्फ मेडिकल वजहों से बीच में ही खत्म करने का निर्णय लिया गया हो। NASA आमतौर पर हर स्थिति के लिए पहले से तैयार रहता है, लेकिन इस बार हालात कुछ ऐसे बने कि इंसानी सेहत को हर चीज़ से ऊपर रखा गया। इस फैसले के पीछे की कहानी सिर्फ अहम ही नहीं, बल्कि बेहद दिलचस्प और सोचने पर मजबूर करने वाली भी है।
Crew 11 Mission: क्या थी असली योजना और कैसे शुरू हुआ सफर
Crew-11 कोई साधारण मिशन नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण था। इस मिशन में दुनिया के चार अलग-अलग कोनों से आए अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल थे।
इस टीम में शामिल थे ज़ेना कार्डमैन, जो NASA की तरफ से इस मिशन की कमांडर थींमाइक फिन्के, NASA के ही एक सीनियर और बेहद अनुभवी एस्ट्रोनॉटकिमिया यूई, जो जापान की स्पेस एजेंसी JAXA का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
और ओलेग प्लातोनोव, जो रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos से जुड़े थेइन चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने अगस्त 2025 में SpaceX के Crew Dragon Endeavour नाम के अत्याधुनिक स्पेसक्राफ्ट से उड़ान भरी थी।
लंबी तैयारी, सख्त ट्रेनिंग और महीनों की प्लानिंग के बाद वे ISS पहुंचे थे।मिशन की अवधि करीब छह महीने तय की गई थी। इस दौरान उन्हें ISS पर रहकर कई अहम जिम्मेदारियां निभानी थीं।
जैसे नए-नए वैज्ञानिक प्रयोग करना, स्टेशन की तकनीकी जांच और मरम्मत, और यह सुनिश्चित करना कि स्पेस स्टेशन बिना किसी रुकावट के लगातार काम करता रहे।
NASA की नजर में यह मिशन पूरी तरह से रूटीन था, लेकिन अंतरिक्ष में हालात कब बदल जाएँ, यह कोई नहीं जानता। जो मिशन पूरी तैयारी और भरोसे के साथ शुरू हुआ था, वही कुछ महीनों बाद एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
अचानक सामने आई Medical Problem और NASA का बड़ा फैसला
जनवरी 2026 की शुरुआत में NASA ने एक ऐसी खबर साझा की, जिसने पूरी स्पेस कम्युनिटी को हैरान कर दिया। बिना किसी पहले संकेत के NASA ने बताया कि Crew-11 मिशन में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री की तबीयत को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
हालांकि, NASA ने पूरी सावधानी बरतते हुए ना तो उस एस्ट्रोनॉट का नाम उजागर किया और ना ही यह साफ किया कि बीमारी आखिर किस तरह की है। इसकी वजह बताई गई medical privacy यानी निजी मेडिकल जानकारी की गोपनीयता और astronaut confidentiality।
NASA का कहना साफ था अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत से जुड़ी बातें सार्वजनिक करना सही नहीं होता।NASA के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेम्स पोल्क ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि फिलहाल उस अंतरिक्ष यात्री की हालत स्थिर (stable) है, यानी जान को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।

लेकिन असली परेशानी यह है कि अब तक बीमारी की सही वजह यानी diagnosis पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।डॉ. पोल्क के मुताबिक, यही अनिश्चितता सबसे बड़ी चिंता है। जब बीमारी की जड़ साफ न हो, तो भविष्य में जोखिम बना रहता है।
NASA ने इसी हालत को “लिंगरिंग रिस्क” यानी लटका हुआ खतरा कहा है ऐसा खतरा जो तुरंत नजर न आए, लेकिन किसी भी वक्त गंभीर हो सकता है।ISS पर मेडिकल सुविधाएँ मौजूद जरूर हैं, लेकिन वे सीमित हैं।
वहां न तो बड़े टेस्ट किए जा सकते हैं और न ही एडवांस इलाज संभव है। ऐसे में NASA इस नतीजे पर पहुँचा कि बेहतर जांच, सही इलाज और पूरी मेडिकल निगरानी सिर्फ धरती पर ही मुमकिन है।
इसी सोच और एहतियात के चलते NASA ने एक ऐतिहासिक और बेहद अहम फैसला लिया Crew-11 मिशन को उसके तय समय से पहले ही खत्म करने का। यह कोई आपातकालीन भगदड़ नहीं थी, बल्कि इंसानी जान और सेहत को सबसे ऊपर रखते हुए लिया गया सोच-समझा फैसला था।
करीब 25 साल के ISS इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है, जब सिर्फ मेडिकल वजहों से किसी पूरे क्रू को समय से पहले वापस बुलाया गया हो। यह फैसला इस बात का साफ संकेत है कि चाहे विज्ञान कितना भी आगे क्यों न बढ़ जाए, इंसान की सेहत और सलामती से बढ़कर कुछ भी नहीं।
“Lingering Risk” आखिर इसका मतलब क्या है?
जब NASA ने “Lingering Risk” शब्द का इस्तेमाल किया, तो बहुत से लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर यह खतरा कैसा है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है ऐसा जोखिम जो फिलहाल साफ़ दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है।
NASA का कहना है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मेडिकल सुविधाएँ जरूर मौजूद हैं, लेकिन वे सीमित स्तर की हैं। वहां न तो बड़ी जांच मशीनें होती हैं, न ही ऐसे एडवांस उपकरण, जिनसे किसी जटिल बीमारी की पूरी तरह पुष्टि की जा सके।
जिस अंतरिक्ष यात्री की तबीयत को लेकर चिंता जताई गई है, उसकी हालत इस वक्त महत्वपूर्ण लेकिन स्थिर बताई जा रही है। यानी हालात काबू में हैं, मगर असली दिक्कत यह है कि अब तक बीमारी की पूरी वजह सामने नहीं आ पाई है।
ISS में माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति होती है। ऐसे माहौल में इंसानी शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है। ऊपर से मेडिकल किट भी सीमित होती है।
यही वजह है कि गंभीर स्वास्थ्य मामलों को अंतरिक्ष में संभालने से बेहतर होता है उन्हें सीधे धरती पर लाया जाए, जहां पूरी मेडिकल टीम, मशीनें और विशेषज्ञ मौजूद हों।
NASA के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइज़ैकमैन ने भी साफ शब्दों में कहा कि यह कोई आपातकालीन निकासी नहीं है। हालात इतने बिगड़े नहीं हैं कि घबराहट में फैसला लिया जाए। लेकिन यह एक precautionary कदम है — यानी पहले से सावधानी बरतते हुए लिया गया फैसला, ताकि किसी भी तरह का खतरा आगे चलकर बड़ा न बन जाए।
NASA के लिए crew की wellbeing यानी भलाई और सुरक्षा सबसे ऊपर है।Spacewalk और दूसरे कार्यक्रमों पर क्या असर पड़ा?इस मेडिकल स्थिति का असर सिर्फ वापसी के फैसले तक ही सीमित नहीं रहा।
NASA ने पहले से तय की गई एक स्पेसवॉक (EVA) को भी रद्द कर दिया। यह अपने-आप में बड़ा संकेत था कि Crew-11 मिशन में अब चीजें पहले जैसी नहीं रहने वाली हैं।स्पेसवॉक कोई छोटी या हल्की-फुल्की गतिविधि नहीं होती।
इसके लिए महीनों की तैयारी, स्पेससूट की बारीक जांच, और अंतरिक्ष यात्री की बेहतरीन शारीरिक स्थिति जरूरी होती है। जरा-सी भी कमजोरी या मेडिकल रिस्क होने पर स्पेसवॉक को टालना ही बेहतर माना जाता है।
यही वजह है कि NASA ने कोई जोखिम नहीं लिया और साफ कर दिया कि सेहत के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।कौन लौट रहा है धरती पर — और कौन रहेगा ISS पर?NASA के फैसले के मुताबिक Crew-11 मिशन से जुड़े चारों अंतरिक्ष यात्री अब धरती पर लौटेंगे।
इनमें शामिल हैं—ज़ेना कार्डमैनमाइक फिन्केकिमिया यूईओलेग प्लातोनोवहालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ISS पूरी तरह खाली हो जाएगी। स्टेशन पर अभी भी तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहेंगे, जो जरूरी कामकाज संभालते रहेंगे
क्रिस विलियम्स (NASA)
सर्गेई मिकायेव (Roscosmos)
सर्गेई कुड-स्वेर्चकोव (Roscosmos)
इनकी मौजूदगी से यह सुनिश्चित किया गया है कि ISS का संचालन बिना किसी रुकावट के जारी रहे, और जरूरी सिस्टम्स पर नजर बनी रहे।
वापसी की तारीख और पूरी तैयारी
NASA ने जानकारी दी है कि Crew-11 का स्पेसक्राफ्ट 14 जनवरी 2026 से पहले ISS से अलग (undock) नहीं होगा। इसके बाद मौसम और समुद्री हालात को देखते हुए, 15 जनवरी 2026 को अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी कराई जाएगी।
यह वापसी कैलिफ़ोर्निया के समुद्र के पास splashdown के ज़रिए होगी, जहां पहले से रेस्क्यू टीमें और मेडिकल स्टाफ तैनात रहेंगे।गौर करने वाली बात यह है कि यह वापसी मूल योजना से करीब एक महीना पहले हो रही है।
पहले Crew-11 का मिशन फरवरी या मिड-फरवरी 2026 तक चलने वाला था, लेकिन हालात को देखते हुए NASA ने वक्त रहते फैसला बदल लिया।
इतिहास में क्या खास है इस फैसले में?
अगर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के इतिहास पर नज़र डालें, तो पिछले करीब दो दशकों में कई बार अंतरिक्ष यात्रियों को सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कभी किसी को ब्लड क्लॉट यानी खून जमने की समस्या हुई, तो कभी लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर अलग-अलग असर दिखाई दिए।
लेकिन इन सबके बावजूद अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ था कि पूरा का पूरा मिशन ही तय समय से पहले खत्म कर दिया जाए। आमतौर पर NASA ऐसे मामलों को वहीं संभाल लेता था और मिशन अपने तय शेड्यूल के मुताबिक चलता रहता था।
NASA के मुताबिक, इतिहास में आखिरी बार ऐसा कदम साल 1985 में उठाया गया था, जब एक सोवियत कॉस्मोनॉट को स्वास्थ्य कारणों से अंतरिक्ष से वापस बुलाना पड़ा था। उसके बाद इतने लंबे समय तक किसी भी बड़े स्पेस मिशन को सिर्फ मेडिकल वजहों से बीच में नहीं रोका गया।
इसी वजह से Crew-11 को जल्दी वापस लाने का फैसला अपने-आप में इतिहास बनाने वाला माना जा रहा है। यह साफ दिखाता है कि इस बार मिशन के लक्ष्य, प्रयोग और रिकॉर्ड से ज़्यादा इंसानी जान को अहमियत दी गई।
NASA ने यह संदेश दिया कि काम कितना भी बड़ा क्यों न हो, सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं।क्या यह कोई अपूरणीय या बहुत बड़ी समस्या है?NASA ने इस बात पर भी पूरी साफगोई से जवाब दिया है कि यह कोई इमरजेंसी निकासी नहीं है।
हालात इतने बिगड़े नहीं हैं कि तुरंत भागकर वापसी कराई जाए।यह फैसला सिर्फ इसलिए लिया गया है ताकि प्रभावित अंतरिक्ष यात्री को बेहतर जांच, सही इलाज और पूरी मेडिकल देखरेख मिल सके। NASA का कहना है कि उस एस्ट्रोनॉट की हालत इस वक्त स्थिर है और कोई जानलेवा खतरा नहीं है।
धरती पर लौटने के बाद उसकी सेहत की जांच घर-परिवार के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अनुभवी मेडिकल टीम द्वारा की जाएगी, ताकि बीमारी की असली वजह पूरी तरह समझी जा सके। यानी हालात गंभीर जरूर हैं, लेकिन बेकाबू नहीं।
सबक: इंसानी जान सबसे ऊपर
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बात साबित कर दी है कि चाहे हम ISS जैसे अत्याधुनिक और हाई-टेक माहौल में क्यों न पहुँच जाएँ, इंसानी सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
NASA ने बिल्कुल साफ कहा है कि तकनीक, विज्ञान, रिसर्च और मिशन के टारगेट अपनी जगह बेहद अहम हैं, लेकिन अगर इंसान सुरक्षित नहीं है, तो बाकी सब बेमानी है। यही सोच NASA के हर फैसले की बुनियाद रही है।
ISS पर Crew-11 मिशन के दौरान एक गोपनीय लेकिन गंभीर मेडिकल समस्या सामने आई।इसी वजह से NASA ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को तय समय से पहले धरती पर वापस बुलाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। ताकि सभी एस्ट्रोनॉट्स सलामती से धरती पे आ सके अपने परिवार के पास सलामती से लौट सके।
यह पहली बार हुआ है जब किसी ISS मिशन को सिर्फ मेडिकल एहतियात के चलते पहले खत्म किया गया।Crew-11 के सभी सदस्यों की हालत स्थिर बताई जा रही है और फैसला पूरी तरह precautionary है।वहीं दूसरी तरफ, ISS पर वैज्ञानिक रिसर्च, अध्ययन और जरूरी ऑपरेशन्स लगातार जारी रहेंगे।
यह पूरा मामला एक बात साफ कर देता है अंतरिक्ष कितना भी विशाल क्यों न हो, इंसान की जान और सेहत ही हर मिशन की असली प्राथमिकता होती है। इसी प्राथमिकता के चलते इन चारों एस्ट्रोनॉट्स को जल्द आस जल्द वापस बुलाया जा रहा है ।इसी से पता चलता है कि इंसानी जान की कीमत किसी मिशन से बढ़कर है।
यह भी पढ़ें –





