Skip to content

Dargah Shareef Patte Shah हादसा 6 लोगों की मौत: Pain, Panic और Warning

Dargah Shareef Patte Shah हादसा 6 लोगों की मौत: Pain, Panic और Warning

Delhi Dargah Shareef Patte Shah में कैसे हुआ हादसा?

यह दर्दनाक हादसा 15 अगस्त 2025 (शुक्रवार) को दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में हुआ। यहां पर मौजूद है Dargah Shareef Patte Shah, जो कि मशहूर Humayun के मकबरे के बिल्कुल पास स्थित है।

उस दिन Dargah Shareef Patte Shah के एक छोटे से कमरे में कई लोग मौजूद थे। कुछ लोग शुक्रवार की नमाज़ अदा करने आए थे, वहीं कुछ लोग तेज़ बारिश से बचने के लिए शरण लिए हुए थे। तभी अचानक उस कमरे की छत भरभराकर गिर पड़ी।

अचानक हुए इस हादसे से वहां भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे कई लोग दब गए। इस घटना में 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को बचाने के लिए रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घंटों तक चले राहत और बचाव अभियान के बाद दबे हुए लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। आसपास के लोग भी मदद के लिए जुट गए और मिलकर घायलों को अस्पताल तक पहुँचाया।

Dargah Shareef Patte Shah पर बचाव और राहत कार्य

Dargah Shareef Patte Shah हादसे की खबर बाहर आई, तुरंत ही दिल्ली फायर सर्विस, नेशनल डिज़ास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (NDRF), दिल्ली पुलिस और दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की टीमें मौके पर पहुँच गईं। चारों ओर हड़कंप मच गया और तेजी से बचाव अभियान शुरू कर दिया गया।

रेस्क्यू टीमों ने पूरी ताक़त लगाकर मलबा हटाना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10 से 12 लोगों को मलबे के नीचे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें से कुछ लोगों की हालत गंभीर थी। उन्हें तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में ले जाया गया।

जिन्हें चोटें आई थीं, उन्हें AIIMS, लोक नायक अस्पताल और राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया, ताकि उन्हें तुरंत सही इलाज मिल सके। डॉक्टरों की टीमें पहले से तैयार थीं और उन्होंने घायलों का इलाज शुरू कर दिया।

आसपास मौजूद लोगों ने भी बचाव दल का भरपूर साथ दिया- किसी ने घायलों को स्ट्रेचर पर उठाने में मदद की, तो कोई पानी और दवाइयाँ लाकर दे रहा था। पूरे इलाके में माहौल गमगीन था, लेकिन साथ ही लोगों के बीच मदद और इंसानियत की भावना भी साफ नज़र आ रही थी।

प्रभावित परिवारों की दुख भरी कहानी

Dargah Shareef Patte Shah हादसे के बाद जब पीड़ितों और उनके परिवारों की कहानियाँ सामने आईं तो माहौल और भी ज़्यादा ग़मगीन हो गया।

    सबसे पहले नाम आया अनिता सैनी (59 वर्ष) का। अनिता जी कुछ ही दिनों पहले अपने बेटे की एक दुर्घटना से बेहद परेशान थीं। बेटे की चिंता ने उन्हें बेचैन कर रखा था। इस चिंता में वह दरगाह पर एक मौलवी से सलाह लेने और मन की शांति पाने आई थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था—वह हादसे की शिकार हो गईं। उनकी अचानक मौत की ख़बर ने पूरे परिवार को अंदर तक तोड़ दिया।

    दूसरा नाम है मौनुद्दीन (32 वर्ष) का। वह भी उसी कमरे में मौजूद थे। हादसे के बाद जब मलबा हटाया जा रहा था, तो उनके साथी ने बताया कि शुरू में लोगों को लगा कि वहां सिर्फ ईंट-पत्थर के टुकड़े पड़े हैं। लेकिन जब ध्यान से देखा गया तो पता चला कि वह मौनुद्दीन थे। यह नज़ारा इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद लोगों की आँखों से आँसू निकल आए।

    इसके बाद कहानी आती है अशिक (40 वर्ष) की, जो एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वह Dargah Shareef Patte Shah अपनी पत्नी रफ़ात परवीन (33 वर्ष) से मिलने आए थे। हादसे के दौरान अशिक किसी तरह बच गए, लेकिन उनकी पत्नी मलबे के नीचे दब गईं। राहत टीम ने उन्हें ज़िंदा तो बाहर निकाल लिया, लेकिन वह गंभीर रूप से घायल थीं। इस घटना ने पति-पत्नी दोनों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी।

    Dargah Shareef Patte Shah हादसे में कई और नाम सामने आए जिनकी ज़िंदगियाँ इस मलबे में दफ़न हो गईं। स्वरूप चंद (79 वर्ष), मीना अरोरा, मोनू अरोरा, और आरिफ—इन सबको अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इनकी पहचान बाद में डीसीपी (DCP) ने आधिकारिक रूप से की।

    Dargah Shareef Patte Shah हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि वहां मौजूद हर शख़्स के दिल पर गहरी चोट छोड़ दी।

    Dargah Shareef Patte Shah पर असर – क्या हुआ नुकसान?

    Archaeological Survey of India (ASI) ASI और विशेषज्ञों का बयान – इस हादसे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि कहीं इस घटना से हुमायूँ का मकबरा (Humayun’s Tomb) भी तो प्रभावित नहीं हुआ। इस पर तुरंत ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने साफ़ कर दिया कि मकबरा पूरी तरह से सुरक्षित है और उसकी संरचना बिल्कुल सही हालत में है। यानी इस हादसे का हुमायूँ के असली मकबरे पर कोई असर नहीं पड़ा।

      इसी बात को और स्पष्ट करते हुए संरक्षण आर्किटेक्ट रतीश नंदा, जो आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर से जुड़े हुए हैं, ने बताया कि जिस हिस्से में हादसा हुआ वह दरअसल मकबरे की परिधीय (boundary) संरचना का हिस्सा था, न कि मुख्य मकबरा। उन्होंने कहा कि मुख्य मकबरे की दीवारों, गुंबद या पूरी इमारत को पूरी तरह से चेक किया|

      Delhi Dargah पर हादसे का कारण और सुरक्षा—क्या हुई चूक?

      Dargah Shareef Patte Shah हादसा जिस वक्त हुआ, उस समय दिल्ली में तेज़ मौसमी बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए कई लोग दरगाह के उस छोटे से कमरे में शरण लेने पहुँच गए थे। लेकिन वही कमरा, जिसकी छत पुरानी और जर्जर हालत में थी, अचानक भरभराकर गिर पड़ा। माना जा रहा है कि इस हादसे की सबसे बड़ी वजह थी उस ढांचे की लंबे समय से अनदेखी और अपर्याप्त देखरेख।

      Dargah Shareef Patte Shah हादसा स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभागों पर कई सवाल खड़े करता है। जिस इमारत में यह घटना हुई, वह कोई साधारण जगह नहीं थी बल्कि एक ऐसी संरचना थी जो हेरिटेज ज़ोन (heritage zone) के पास मौजूद थी। ऐसे में उसका नियमित निरीक्षण और रखरखाव होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

      लोगों का कहना है कि अगर समय-समय पर उस ढांचे की जाँच होती, उसकी मरम्मत की जाती और उसकी मजबूती का आंकलन किया जाता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। हादसे ने साफ़ तौर पर प्रशासन की लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर कर दिया है।

      अब ज़रूरत इस बात की है कि ऐसी ऐतिहासिक और धार्मिक संरचनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए, ताकि आगे जाकर कोई और हादसा मासूम जिंदगियों को निगल न ले|

      Dargah Shareef Patte Shah हादसे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया

      Dargah Shareef Patte Shah हादसे के बाद प्रेस रिपोर्ट्स ने तुरंत ही प्रशासन और हेरिटेज संरक्षण एजेंसियों से तेज़ कार्रवाई की अपील की। मीडिया ने यह साफ़ किया कि ऐसे पुराने और कमजोर ढांचे समाज के लिए कितने बड़े खतरे बन सकते हैं, खासकर हेरिटेज ज़ोन के आसपास।

        रिपोर्टिंग ने प्रशासन की जवाबदेही पर भी ध्यान दिलाया। सवाल उठाया गया कि अगर आसपास के ढांचों की समय-समय पर जांच और देखभाल की जाती, तो यह हादसा रोका जा सकता था।

        मीडिया ने यह भी रेखांकित किया कि हादसा मुख्य मकबरे को नहीं, बल्कि उसके आसपास मौजूद कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुँचाने वाला था। इसने साफ़ कर दिया कि अब आगे सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाने की सख्त ज़रूरत है। मीडिया की इस रिपोर्टिंग ने समाज में चेतना जगाई और अधिकारियों को याद दिलाया कि इतिहास और सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी बराबर जरूरी है।

        हादसे से क्या सबक मिले?

        इस दर्दनाक हादसे ने हमें एक बहुत बड़ा सबक दिया है-कि इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों के आसपास मौजूद पुरानी और कमजोर संरचनाओं की समय-समय पर जांच और मरम्मत कितनी ज़रूरी है।

        इसके लिए जिम्मेदार संस्थाओं, जैसे कि अरकेओलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) और Aga Khan Trust for Culture, को चाहिए कि वे हेरिटेज बफ़र ज़ोन (heritage buffer zones) में किसी भी लापरवाह निर्माण पर रोकथाम और निगरानी को और अधिक कड़ा करें।

          साथ ही, आपातकालीन सेवाओं को भी चाहिए कि वे ऐसे क्षेत्रों में संभावित जोखिमों के प्रति हमेशा सजग रहें। ताकि अगर कभी हादसा हो भी, तो रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी और तत्परता के साथ किया जा सके और जिंदगियों को बचाया जा सके। इस तरह की सतर्कता और तैयारी न सिर्फ़ पुराने ढांचों को सुरक्षित रखेगी, बल्कि लोगों की जान

          यह भी पढ़ें –

          Har Ghar Tiranga अभियान 2025: The Power of Unity और Pride

          Mumbai Weather 2025: Red Alert जारी Intense बारिश का जनजीवन पर असर

          Subscribe

          Join WhatsApp Channel