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Dr. Bhimrao Ambedkar 135वीं जयंती पर Fadnavis का संदेश, महाराष्ट्र की preparation और special आयोजन

Dr. Bhimrao Ambedkar 135वीं जयंती पर Fadnavis का संदेश, महाराष्ट्र की preparation और special आयोजन

Dr. Bhimrao Ambedkar की 135वीं जयंती

मुंबई, 3 अप्रैल 2026 — महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हुई एक अहम meeting में बड़ी साफगोई से कहा कि Dr Bhimrao Ambedkar की 135वीं जयंती को सिर्फ एक formal celebration या रस्मी कार्यक्रम बनाकर नहीं छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे एक “महापर्व” की तरह मनाया जाना चाहिए, यानी ऐसा मौका जो सिर्फ खुशी या दिखावे तक सीमित न हो, बल्कि लोगों के दिल और सोच दोनों पर असर डालने वाला हो।

फडणवीस ने अपने अंदाज़ में कहा कि Dr Bhimrao Ambedkar के जो खयालात थे — जैसे बराबरी (equality), तालीम (education) और समाज में इंसाफ — वो आज भी उतने ही relevant हैं जितने पहले थे। उन्होंने बताया कि India का जो Constitution है, उसकी मजबूत बुनियाद Ambedkar साहब ने रखी थी, और आज भी देश उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने ये भी कहा कि सिर्फ stage लगाकर speeches देना, फूल चढ़ाना या rallies निकालना ही असली इज़्ज़त नहीं है। असल इज़्ज़त तो तब होगी जब हम उनके बताए हुए रास्ते पर चलें, उनके ideals को अपनी daily life में अपनाएं, और society में real change लाने की कोशिश करें।

फडणवीस का कहना था कि आने वाली generations को भी Dr Bhimrao Ambedkar के thoughts से connect करना बहुत ज़रूरी है, ताकि वो समझ सकें कि एक बेहतर और बराबरी वाला समाज कैसे बनाया जाता है। उन्होंने साफ लफ्ज़ों में कहा कि अगर हम सच में Ambedkar साहब को tribute देना चाहते हैं, तो हमें उनके mission को आगे बढ़ाना होगा — चाहे वो education के field में हो, social justice की बात हो या फिर हर इंसान को बराबरी का हक दिलाने की कोशिश।

आखिर में उन्होंने ये भी जोड़ा कि ये जयंती सिर्फ एक दिन का event नहीं होनी चाहिए, बल्कि एक ऐसा movement बनना चाहिए जो लोगों की सोच में बदलाव लाए और पूरे society को एक नई दिशा दे।

Dr. Bhimrao Ambedkar जयंती के आयोजन की तैयारियाँ

मुख्यमंत्री ने 14 अप्रैल 2026 को होने वाली Dr Bhimrao Ambedkar की जयंती से पहले तैयारियों को लेकर एक detailed review meeting ली। इस meeting में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बार तैयारियों में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि ये सिर्फ एक event नहीं बल्कि लोगों के जज़्बात और अकीदत से जुड़ा हुआ दिन है।

सरकार की planning है कि इस साल का आयोजन पहले से कहीं ज्यादा बड़े level पर किया जाए, ताकि society के हर तबके तक बाबासाहेब के खयालात और उनका पैगाम आसानी से पहुँच सके। कोशिश ये है कि सिर्फ शहरों तक ही नहीं, बल्कि गांव-गांव तक लोग उनके विचारों से जुड़ें और उन्हें अपनी ज़िंदगी में अपनाएं।

हर साल की तरह इस बार भी लाखों की तादाद में लोग मुंबई के पर पहुँचकर Dr Bhimrao Ambedkar को श्रद्धांजलि देंगे। इस भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए administration को पहले से ही पूरी तरह alert रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो और सब कुछ आराम से और सलीके से चलता रहे।

मुख्यमंत्री ने खास तौर पर कहा कि गर्मी का मौसम होने की वजह से लोगों के लिए छाया (shade), ठंडा पानी और proper health facilities का इंतज़ाम बहुत बेहतर तरीके से किया जाए। साथ ही traffic management को भी strong बनाने के लिए जरूरी steps लेने को कहा गया है, ताकि भीड़ और गाड़ियों की आवाजाही में कोई अफरा-तफरी न हो।

इसके अलावा public information boards को और clear और helpful बनाने, और bus services को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को सफर में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

सरकार ने ये भी हिदायत दी है कि इस मौके पर सिर्फ speeches तक बात सीमित न रहे, बल्कि असल मकसद ये होना चाहिए कि हर आम इंसान तक Constitution की अहमियत और Dr Bhimrao Ambedkar के message को सही तरीके से समझाया जाए। इसके लिए अलग-अलग educational programs, awareness campaigns और ground-level activities कराने की भी planning की जा रही है, ताकि लोगों में असली समझ और जागरूकता पैदा हो सके।

विशेष आकर्षण: ड्रोन शो और शिक्षण पहल

इस बार के जयंती समारोह को पहले से अलग और खास बनाने की पूरी तैयारी की जा रही है। सरकार ने तय किया है कि सिर्फ पारंपरिक श्रद्धांजलि तक ही कार्यक्रम सीमित न रहें, बल्कि कुछ नए और असरदार events भी शामिल किए जाएं, ताकि लोगों पर गहरा असर पड़े और वो Dr Bhimrao Ambedkar के जीवन और उनके पैगाम को बेहतर तरीके से समझ सकें।

सबसे खास आकर्षण होगा 13 अप्रैल को मुंबई के में होने वाला एक शानदार drone show। इस drone show के जरिए Dr Bhimrao Ambedkar की ज़िंदगी, उनके संघर्ष और उनकी कामयाबी की कहानी को आसमान में रोशनी और technology के ज़रिए पेश किया जाएगा। ये नज़ारा ना सिर्फ दिलचस्प होगा, बल्कि लोगों के लिए एक emotional और यादगार तजुर्बा भी बनेगा।

इसके अलावा, अलग-अलग government departments की तरफ से भी कई informative और जागरूकता बढ़ाने वाले programs organize किए जाएंगे। इनमें Constitution की अहमियत, लोगों के rights और social justice (सामाजिक न्याय) जैसे अहम मुद्दों पर खास sessions रखे जाएंगे, ताकि आम लोग भी इन बातों को आसानी से समझ सकें और अपने हक और जिम्मेदारियों के बारे में aware हो सकें।

खास तौर पर students और youth को ध्यान में रखते हुए कुछ special sessions भी plan किए गए हैं। इन sessions में education (शिक्षा), organization (संगठन निर्माण) और agitation (आंदोलन) के messages पर focus किया जाएगा — यानी बाबासाहेब के उस famous message को आगे बढ़ाया जाएगा कि “Educate, Organize, Agitate”।

सरकार का मकसद साफ है कि ये कार्यक्रम सिर्फ देखने या सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि युवाओं के अंदर एक नई सोच, जोश और समाज को बेहतर बनाने का जज़्बा पैदा करें।

Dr. Bhimrao Ambedkar का विचार और आज का भारत

को भारत के Constitution का main architect माना जाता है। उन्होंने अपने काम और सोच के जरिए society में बराबरी (equality), इंसाफ (justice) और एक balanced development का concept मजबूती से खड़ा किया। उनका vision सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वो चाहते थे कि हर इंसान को उसका हक मिले और समाज में किसी के साथ भी नाइंसाफी न हो।

बाबासाहेब का message सिर्फ political ideas तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें एक गहरी सोच और असली बदलाव की बात छुपी हुई थी। उनका मानना था कि अगर समाज को आगे बढ़ाना है, तो तीन चीज़ें बहुत ज़रूरी हैं — education (तालीम), organization (इत्तेहाद और संगठन) और agitation (हक के लिए आवाज उठाना)। यानी इंसान को पहले पढ़ना-लिखना चाहिए, फिर लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए और जरूरत पड़े तो अपने हक के लिए आवाज भी बुलंद करनी चाहिए।

आज के दौर में भी Dr Bhimrao Ambedkar की ये legacy उतनी ही मजबूत और असरदार है। उनके खयालात सिर्फ किताबों या speeches तक सीमित नहीं हैं, बल्कि government programs, policies और society के अलग-अलग हिस्सों में साफ दिखाई देते हैं।

इतना ही नहीं, उनके सम्मान में पूरे देश में 14 अप्रैल को एक national holiday के तौर पर भी मनाया जाता है। इस दिन को के नाम से जाना जाता है, और पूरे भारत में public holiday रहता है। इस मौके पर लोग बाबासाहेब को याद करते हैं, उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं और उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का इरादा दोहराते हैं।

युवा पीढ़ी और Dr. Bhimrao Ambedkar का संदेश

मुख्यमंत्री ने खास तौर पर आज की युवा पीढ़ी से दिल से अपील की है कि वो सिर्फ जयंती के दिन Dr Bhimrao Ramji Ambedkar की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझकर न बैठ जाएं। उन्होंने कहा कि असली बात ये है कि उनके खयालात को समझा जाए, उनकी सोच को दिल में उतारा जाए और उसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लागू किया जाए।

उन्होंने बड़े साफ और असरदार अंदाज़ में कहा कि आज का youth ही देश का future है, और उसी के हाथ में ये जिम्मेदारी है कि वो Constitution के दिए हुए inclusive सोच, बराबरी के हक (equal rights) और social justice (सामाजिक न्याय) के पैगाम को आगे बढ़ाए। उनका मानना है कि अगर युवा इन principles को अपनाते हैं, तो society में एक positive और मजबूत बदलाव लाया जा सकता है।

सरकार ने भी इस दिशा में कई अहम एलान किए हैं। ये तय किया गया है कि educational institutions, community centres और mobile awareness programs के जरिए Constitution की असली रूह और उसके मूल values को घर-घर तक पहुँचाया जाएगा। मकसद ये है कि हर आम इंसान, चाहे वो शहर में हो या गांव में, अपने हक और अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से समझ सके।

अगर समापन की बात करें, तो अब Dr Bhimrao Ramji Ambedkar की 135वीं जयंती सिर्फ एक celebration भर नहीं रह गई है। ये एक तरह का “विचारों का महोत्सव” बन चुकी है — एक ऐसा मौका जो society को सही दिशा दिखाता है, लोगों को सोचने पर मजबूर करता है और आने वाली नस्लों को ये याद दिलाता है कि बराबरी और इंसाफ की जंग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसे लगातार जारी रखना है।

अंत में मुख्यमंत्री का पैगाम बिल्कुल साफ और सीधा है:
“आज का भारत अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है, तो उसमें आंबेडकर साहब के विचार और Constitution की सबसे बड़ी भूमिका है — और ये ज़रूरी है कि ये खयालात हर हिंदुस्तानी के दिल और दिमाग में बसें।”

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