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Dr. Manmohan Singh: एक विनम्र नेता की याद
आज पूरे देश में Dr. Manmohan Singh की पहली पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उन्हें याद करते हुए सिर्फ़ राजनीतिक गलियारों में ही नहीं, बल्कि आम लोगों के दिलों में भी एक खास सी ख़ामोशी और एहतराम महसूस किया जा रहा है। एक साल बीत जाने के बाद भी उनका नाम, उनका काम और उनकी सादगी लोगों की ज़ेहन में ताज़ा है।
कांग्रेस पार्टी की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें दिल से ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की। इन कार्यक्रमों में कही गई बातें सिर्फ़ औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि डॉ. Manmohan Singh की सोच, उनकी ईमानदारी और उनके फैसलों पर एक गहरी भावनात्मक चर्चा देखने को मिली।
कई नेताओं ने कहा कि मनमोहन सिंह जी ऐसे नेता थे, जिनकी आवाज़ भले ही धीमी रही हो, लेकिन उनके फैसलों की गूँज आज भी देश की तरक्की में सुनाई देती है।
डॉ. Manmohan Singh, जो भारत के 13वें प्रधानमंत्री रहे, का निधन 26 दिसंबर 2024 को 92 साल की उम्र में हुआ था। आज, ठीक एक साल बाद, पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। लोग उन्हें सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री या राजनीतिज्ञ के तौर पर नहीं देखते, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में याद करते हैं जो सादगी, ज्ञान और ईमानदारी की मिसाल थे।
एक अर्थशास्त्री के रूप में उनका योगदान बेमिसाल रहा। देश की आर्थिक नीतियों को नई दिशा देने में उनका रोल बेहद अहम था। उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों ने भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने मज़बूती से खड़ा किया। उदारीकरण से लेकर सामाजिक कल्याण योजनाओं तक, उनके दौर की नीतियों ने आम आदमी की ज़िंदगी पर गहरा असर डाला।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हर तरफ़ यही बात सुनने को मिल रही है कि डॉ. मनमोहन सिंह जैसे नेता बहुत कम होते हैं — जो सत्ता में रहते हुए भी शोर-शराबे से दूर, ख़ामोशी से देश की बुनियाद मज़बूत करते हैं। उनकी यादें आज भी ज़िंदा हैं, और उनका काम आने वाली नस्लों के लिए एक राहनुमा बना रहेगा।
कांग्रेस का स्मरण समारोह
आज दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से कई जगहों पर Dr. Manmohan Singh को याद करते हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखे गए। इन मौक़ों पर पार्टी के बड़े नेता, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे और सबने एक सुर में उनके योगदान को सलाम किया।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मौके पर कहा कि मनमोहन सिंह ने सिर्फ़ देश की अर्थव्यवस्था को नई पहचान ही नहीं दी, बल्कि अपने फैसलों के ज़रिए करोड़ों लोगों की ज़िंदगी में असली बदलाव लाया। उन्होंने कहा कि सिंह जी की सादगी, ईमानदारी और देश के लिए उनका समर्पण ही वो बातें थीं, जिन्होंने भारत को ज़्यादा मज़बूत और सबको साथ लेकर चलने वाला मुल्क बनाया।
खड़गे ने खास तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया कि डॉ. मनमोहन सिंह सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री भर नहीं थे, बल्कि आम जनता के सच्चे सेवक थे। उन्होंने गरीबों, मज़लूमों और समाज के सबसे पिछड़े तबकों के लिए ऐसी नीतियाँ बनाई, जिनका असर ज़मीन पर साफ़ दिखाई दिया। उनके लिए सत्ता नहीं, बल्कि लोगों की भलाई सबसे अहम थी।
कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (जो पहले ट्विटर कहलाता था) पर भी एक भावुक पोस्ट साझा की। इसमें कहा गया कि हम आज एक ऐसे राज्यपुरुष को याद कर रहे हैं, जिनकी ईमानदारी, विनम्रता और दूरअंदेशी सोच ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को और ज़्यादा मज़बूती दी।
पार्टी ने लिखा कि डॉ. मनमोहन सिंह का नाम हमेशा इज़्ज़त और एहतराम के साथ लिया जाएगा, क्योंकि उन्होंने बिना शोर-शराबे के देश की सेवा की और एक मिसाल क़ायम की।
राहुल गांधी का भावपूर्ण संदेश
नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सीनियर नेता राहुल गांधी ने भी Dr. Manmohan Singh को दिल से ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की। उन्होंने सिंह जी को एक दूरअंदेश और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनकी सोच अपने समय से कहीं आगे की थी। राहुल गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह के रणनीतिक फैसलों और साहस भरे कदमों ने भारत को दुनिया के नक़्शे पर एक नई पहचान दिलाई, ख़ास तौर पर आर्थिक मोर्चे पर।
उन्होंने आगे कहा कि Dr. Manmohan Singh जी की सादगी, ईमानदारी और लगातार मेहनत करने की आदत ने सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को प्रेरणा दी है। उनके मुताबिक़, आज भी कांग्रेस उन्हें महज़ एक राजनेता के तौर पर नहीं देखती, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक व्यक्तित्व के रूप में मानती है, जिनकी सीख आज के दौर में भी उतनी ही मायने रखती है।
इस मौके पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि Dr. Manmohan Singh ने अपनी पूरी ज़िंदगी बराबरी, इंसानी गरिमा और भारत के विकास के लिए वक़्फ़ कर दी। प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी ज़िंदगी हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जिसमें विनम्रता हो, समझदारी हो और देश के लिए सच्चा समर्पण हो।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवाओं को Dr. Manmohan Singh जी के आदर्शों और मूल्यों से सीख लेनी चाहिए। देशभक्ति, सामाजिक न्याय और बिना किसी दिखावे के ईमानदारी से काम करना यही वो बातें हैं, जो उन्हें एक असली नेता बनाती हैं और जिनकी आज भी देश को सख़्त ज़रूरत है।
अन्य नेताओं की Dr. Manmohan Singh श्रद्धांजलि
Dr. Manmohan Singh की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने वालों में सिर्फ़ कांग्रेस के नेता ही नहीं हैं, बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं ने भी खुलकर उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की है। इससे साफ़ झलकता है कि उनके लिए इज़्ज़त और सम्मान किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी Dr. Manmohan Singh को याद करते हुए कहा कि देश के विकास में उनका योगदान क़ीमती और बेमिसाल रहा है। उन्होंने माना कि सिंह जी ने अपने काम और नीतियों के ज़रिए भारत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
इसी तरह कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर याद किया, जिन्होंने मुश्किल आर्थिक हालात के दौर में देश को सही राह दिखाई। उनका कहना था कि जब देश चुनौतियों से जूझ रहा था, तब Dr. Manmohan Singh के फैसलों ने हालात को संभालने में बड़ी मदद की।
इन तमाम बयानों से यह बात साफ़ हो जाती है कि मनमोहन सिंह के लिए सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामने आ रहा है। उन्हें आज एक ऐसी राष्ट्रीय धरोहर के रूप में देखा जा रहा है, जिनका योगदान सिर्फ़ अपने दौर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बन गया है।
Dr. Manmohan Singh का वारिस legacy
Dr. Manmohan Singh ने अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ राजनीति तक ही सीमित रहकर काम नहीं किया, बल्कि देश की आर्थिक नीतियों, लोकतंत्र को मज़बूत करने और समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने में भी बड़ी भूमिका निभाई।
Dr. Manmohan Singh ने अलग-अलग अहम ज़िम्मेदारियाँ संभालीं कभी रिज़र्व बैंक के गवर्नर के तौर पर, कभी देश के वित्त मंत्री के रूप में और फिर प्रधानमंत्री बनकर। हर ओहदे पर रहते हुए उन्होंने अपने ज्ञान और समझ से देश को सही दिशा देने की कोशिश की।
साल 1991 में लागू की गई आर्थिक उदारीकरण की नीतियाँ आज भी उनके सबसे बड़े योगदानों में गिनी जाती हैं। इन फैसलों की वजह से भारत दुनिया के बाज़ार में मज़बूती से खड़ा हुआ और देश की अर्थव्यवस्था को नई जान मिली। आम आदमी से लेकर कारोबार जगत तक, इन नीतियों का असर दूर तक देखने को मिला।
उनके कार्यकाल में कई ऐसी योजनाएँ शुरू की गईं, जिनका मक़सद सीधा आम जनता की ज़िंदगी को बेहतर बनाना था। मनरेगा जैसी योजना ने गरीबों को रोज़गार का सहारा दिया, वहीं आरटीआई क़ानून ने सरकार के कामकाज में पारदर्शिता लाई। इन कदमों ने लोगों का लोकतंत्र पर भरोसा और भी मज़बूत किया।
एक राष्ट्र, अनेक यादें
आज, Dr. Manmohan Singh की पहली पुण्यतिथि पर यह साफ़ महसूस होता है कि उनकी राजनीति और उनकी निजी सादगी ने भारत के लोकतंत्र और नीति बनाने की प्रक्रिया में एक अलग ही छाप छोड़ी है। भले ही राजनीतिक दलों के बीच मतभेद रहे हों, लेकिन उनके लिए जो इज़्ज़त और एहतराम आज हर तरफ़ देखने को मिल रहा है, वह इस बात का सबूत है कि उनका योगदान सबके लिए क़ाबिल-ए-इज़्ज़त रहा है। यह तस्वीर हमारे देश की साझी सोच और आपसी सम्मान को भी दिखाती है।
प्रेरणा और विरासत
Dr. Manmohan Singh की पुण्यतिथि पर कांग्रेस और दूसरे नेताओं की ओर से दी गई श्रद्धांजलि सिर्फ़ एक रस्मी कार्यक्रम नहीं है। यह असल में एक सोच, एक रास्ता और एक प्रेरणा का पैग़ाम है। उनके विचार, उनका काम करने का तरीक़ा और देश के लिए उनका सच्चा समर्पण आज भी भारतीय राजनीति और ख़ासकर नौजवानों के लिए एक मिसाल है।
उनकी विनम्रता, दूरअंदेशी, ईमानदारी और लगातार सेवा का जज़्बा आज भी आदर्श नेतृत्व की पहचान माना जाता है। आज की यह श्रद्धांजलि सिर्फ़ उन्हें याद करने भर का दिन नहीं है, बल्कि उस विरासत का जश्न भी है, जिसे आने वाली नस्लें आगे बढ़ाती रहेंगी और जिससे भारत को आगे की राह मिलती रहेगी।
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