Skip to content

Strong Reaction: India ने Pakistan के Afghanistan पर Airstrikes की कड़ी निंदा की, Regional Stability पर दिया Clear Message

Strong Reaction: India ने Pakistan के Afghanistan पर Airstrikes की कड़ी निंदा की, Regional Stability पर दिया Clear Message

Pakistan के Afghanistan में Airstrikes पर India का प्रारंभिक रिएक्शन, विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

22 फ़रवरी 2026 को पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के मशरिक़ी (पूर्वी) सूबों — नंगरहार और पकतीका — में अपनी एयर फ़ोर्स के ज़रिये कार्रवाई की। पाकिस्तान का कहना है कि उसने जिन जगहों पर बमबारी की, वहाँ कुछ दहशतगर्द तंज़ीमें और छिपे हुए गिरोह मौजूद थे, जिनसे उसे अपनी क़ौमी सलामती को ख़तरा महसूस हो रहा था। उनके मुताबिक़ ये हमले उन अड्डों को तबाह करने के लिए थे जहाँ से उनके ख़िलाफ़ साज़िशें रची जा रही थीं।

लेकिन ज़मीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। इन हमलों के दौरान आम शहरी आबादी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। कई बेगुनाह और मासूम लोग, जिनमें औरतें, छोटे-छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल थे, इस बमबारी की ज़द में आ गए। मकान तबाह हुए, घरों में मातम छा गया और इलाक़े में ख़ौफ़ और अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। यही वजह है कि इस कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय सतह पर भी चिंता जताई जा रही है।

भारत ने इस पूरे मामले पर सख़्त रुख़ अपनाया है। नई दिल्ली ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि ये सिर्फ़ एक फ़ौजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि इससे इंसानियत को ठेस पहुँची है और इलाक़ाई अमन-ओ-अमान पर भी बुरा असर पड़ा है। भारत का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ हालात को और ज़्यादा पेचीदा और नाज़ुक बना देती हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “भारत उन हवाई हमलों की सख़्त मज़म्मत (निंदा) करता है जिनमें बेगुनाह शहरी अफ़राद की जानें गई हैं, ख़ास तौर पर जब ये वाक़या पाक महीने रमज़ान के दौरान पेश आया हो।” उन्होंने ये भी इशारा किया कि मुमकिन है ये कार्रवाई पाकिस्तान की अपनी अंदरूनी मुश्किलात और नाकामियों से तवज्जो हटाने की कोशिश हो।

भारत ने इसे पाकिस्तान के घरेलू सियासी और अमन-ओ-अमान से जुड़े मसाइल से ध्यान भटकाने की एक जुगत करार दिया। बयान में ये भी कहा गया कि अगर किसी मुल्क को दहशतगर्दी से वाक़ई ख़तरा है और वो किसी ठिकाने पर कार्रवाई करना चाहता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून, इंसानी हक़ूक़ और आलमी उसूलों का पूरी तरह ख़याल रखना चाहिए।

भारत का साफ़ कहना है कि किसी भी देश की सरज़मीन और उसकी ख़ुदमुख़्तारी (संप्रभुता) का एहतराम किया जाना चाहिए। सीमा पार जाकर की गई सैन्य कार्रवाईयाँ अक्सर मसले को हल करने के बजाय और ज़्यादा उलझा देती हैं। इसलिए बेहतर यही है कि मसाइल का हल बातचीत, सियासी डायलॉग और कूटनीतिक रास्तों से निकाला जाए, ताकि बेगुनाह लोगों को इसकी क़ीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।

कुल मिलाकर, इस पूरे वाक़ये ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में नाज़ुक हालात की याद दिला दी है। ज़रूरत इस बात की है कि तमाम मुल्क सब्र, हिकमत और दानिशमंदी से काम लें, ताकि इलाक़े में अमन और इस्तेहकाम (स्थिरता) बरक़रार रह सके।

काबुल की संप्रभुता और भारत का समर्थन

भारत ने सिर्फ़ हमलों की सख़्त अल्फ़ाज़ में मज़म्मत (निंदा) ही नहीं की, बल्कि इस पूरे मसले का एक गहरा सियासी और कूटनीतिक पहलू भी सामने रखा। नई दिल्ली ने दो टूक अंदाज़ में कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान की पूरी आज़ादी, उसकी ख़ुदमुख़्तारी (सार्वभौमिक संप्रभुता) और उसकी सरज़मीन की सलामती के साथ खड़ा है।

भारत का ये बयान दरअसल एक साफ़ पैग़ाम था — कि किसी भी मुल्क की हदूद (सीमाओं) और उसकी ज़मीन का एहतराम किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय क़ानून और आलमी उसूल यही कहते हैं कि बिना इजाज़त किसी दूसरे देश की सरज़मीन पर फ़ौजी कार्रवाई करना ग़लत है। भारत ने साफ़ कर दिया कि वो हर तरह के गैरकानूनी सैन्य दख़ल के ख़िलाफ़ है, चाहे वो किसी भी बहाने से क्यों न किया जाए।

साथ ही, भारत ने आलमी बिरादरी (अंतरराष्ट्रीय समुदाय) से भी गुज़ारिश की कि वो इस पूरे वाक़ये को सिर्फ़ सियासी नज़रिये से न देखे, बल्कि इंसानी पहलू को भी समझे। जिन इलाक़ों में बमबारी हुई, वहाँ आम लोग, औरतें और बच्चे रहते हैं — इसलिए इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर इंसानी हक़ूक़ और मानवीय हालात पर पड़ता है। भारत ने ज़ोर देकर कहा कि बेगुनाह लोगों की जान और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त सबसे ज़रूरी होनी चाहिए।

ये रुख़ पाकिस्तान के उन इल्ज़ामात से थोड़ा अलग नज़र आता है, जिनमें वो दावा करता है कि अफ़ग़ानिस्तान में कुछ “दहशतगर्द गिरोहों” को पनाह दी जा रही है। भारत का कहना है कि अगर किसी के पास ऐसे आरोप हैं, तो उन्हें सबूत और हक़ीक़त की बुनियाद पर, अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में रहकर उठाया जाना चाहिए। सिर्फ़ इल्ज़ाम लगाकर या अचानक फ़ौजी कार्रवाई करके हालात को और बिगाड़ना किसी के हक़ में नहीं है।

कुल मिलाकर, भारत का रुख़ यही रहा है कि मसलों का हल ताक़त के ज़रिये नहीं, बल्कि बातचीत, सब्र और कूटनीतिक रास्ते से निकाला जाना चाहिए, ताकि इलाक़े में अमन-ओ-अमान कायम रह सके और बेगुनाह लोगों को इसकी क़ीमत न चुकानी पड़े।

पाकिस्तान का दावा और विरोधी प्रतिक्रियाएँ

Pakistan सरकार का कहना है कि उसने जो हवाई हमले Afghanistan में किए, उनका मकसद Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) और Islamic State-Khorasan Province (ISKP) जैसे दहशतगर्द गिरोहों के ठिकानों को तबाह करना था। Pakistan का दावा है कि हाल ही में उसके इलाक़े में जो आतंकी हमले हुए, उनके पीछे यही तंजीमें थीं, इसलिए अपनी क़ौमी सलामती के लिए ये कार्रवाई ज़रूरी थी।

लेकिन Afghanistan के अफ़सरों और वहां के मुक़ामी लोगों की बात कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। उनका कहना है कि ज़मीनी हक़ीक़त Pakistan के दावे से काफ़ी अलग थी। इन एयर स्ट्राइक्स में सिर्फ़ कथित ठिकाने ही नहीं, बल्कि आम लोगों के घर, मदरसे और दूसरी शहरी इमारतें भी नुक़सान का शिकार हुईं। कई मकान मलबे में तब्दील हो गए और बस्ती में खौफ़ और अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।

मुक़ामी लोगों का कहना है कि जो लोग ज़ख़्मी हुए या जिनकी जान गई, उनमें से ज़्यादातर का दहशतगर्दी से दूर-दूर तक कोई ताल्लुक़ नहीं था। वो आम शहरी अफ़राद थे — औरतें, बच्चे और मज़दूरी करके गुज़ारा करने वाले लोग। इस वजह से लोगों में ग़ुस्सा और बेचैनी साफ़ देखी जा रही है।

Afghanistan के Defense Ministry ने इस पूरी कार्रवाई को अपने मुल्क की sovereignty (संप्रभुता) की खुली खिलाफ़वर्ज़ी बताया। उनका कहना है कि बिना इजाज़त किसी दूसरे देश की सरज़मीन पर हमला करना क़ाबिले-क़बूल नहीं है। उन्होंने साफ़ इशारा किया कि अगर ऐसे क़दम दोहराए गए तो वो जवाबी कार्रवाई करने का हक़ महफ़ूज़ रखते हैं।

Taliban-controlled Afghanistan government ने भी सख़्त लहजे में बयान जारी किया। उन्होंने इसे “illegal act” और international law की खुली तौहीन बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने Pakistan के ambassador को तलब करके अपना एहतिजाज (विरोध) दर्ज कराया और जवाबी बातचीत के लिए बुलाया।

कुल मिलाकर, इस पूरे मामले ने India, Pakistan और Afghanistan के दरमियान पहले से मौजूद तनाव को और नाज़ुक बना दिया है। हालात ये बताते हैं कि अगर मसले को सियासी डायलॉग और कूटनीतिक तरीक़े से हल नहीं किया गया, तो इलाक़े में बेवजह की तनातनी और बढ़ सकती है।

मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता

ये पूरा मामला सिर्फ़ दो मुल्कों के दरमियान का झगड़ा बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने पूरे South Asia में इंसानी हालात को लेकर फिक्र और बेचैनी बढ़ा दी है। खास तौर पर जब ये वाक़या रमज़ान जैसे मुक़द्दस (पवित्र) महीने में पेश आया, तो Islamic देशों और दुनिया भर के Muslim communities में भी इस पर गहरी चिंता जताई गई। रमज़ान को सब्र, रहमत और अमन का महीना माना जाता है, ऐसे वक़्त में आम शहरी लोगों की मौत की खबरों ने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया।

India, Pakistan और Afghanistan — तीनों मुल्क पहले ही कई सियासी और सुरक्षा से जुड़े मसलों से जूझ रहे हैं। ऐसे में जब एयर स्ट्राइक्स की वजह से बेगुनाह लोगों के जान-माल का नुकसान होता है, तो सवाल सिर्फ़ एक फ़ौजी कार्रवाई का नहीं रहता, बल्कि इंसानियत और अख़लाक़ का भी बन जाता है।

इस पूरे वाक़ये ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है — अगर किसी मुल्क को “आतंकी सरगनाओं” या दहशतगर्द गिरोहों से खतरा है, तो उनसे निपटने का तरीका क्या होना चाहिए? क्या सख़्त फ़ौजी कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है, या फिर ऐसा कोई तरीका भी हो सकता है जिसमें दहशतगर्दी से भी सख्ती से निपटा जाए और साथ ही आम इंसानी जानों की हिफ़ाज़त भी हो?

बहुत से लोग और सियासी तजज़िया-निगार अब ये कह रहे हैं कि सिर्फ़ ताक़त के दम पर मसले हल नहीं होते। अगर हर बार जवाब बमबारी और गोलीबारी से दिया जाएगा, तो हालात और पेचीदा (जटिल) हो सकते हैं। इसलिए ज़रूरत इस बात की है कि India, Pakistan और Afghanistan जैसे मुल्क सियासी डायलॉग, कूटनीतिक बातचीत और आपसी समझदारी का रास्ता अपनाएँ।

शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (peaceful coexistence) और लंबे समय की इस्तेहकाम (stability) के लिए जंग-जैसे कदमों की बजाय सियासी हल तलाश करना ज़्यादा बेहतर माना जा रहा है। क्योंकि आख़िरकार, किसी भी मुल्क की असली ताक़त उसके लोग होते हैं — और जब वही लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं, तो अमन और तरक़्क़ी दोनों ही पीछे छूट जाते हैं।

क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की तस्वीर

ये वाक़या South Asia में पहले से चले आ रहे तनाव को और ज़्यादा भड़का सकता है। Pakistan और Afghanistan के बीच सरहद (border) को लेकर पुराने इख़्तिलाफ़ात (मतभेद) रहे हैं, जो वक्त-वक्त पर उभरकर सामने आते रहे हैं। Pakistan का कहना है कि वो दहशतगर्दी के खिलाफ़ कार्रवाई कर रहा है, जबकि Afghanistan के अफ़सर इस दावे को अलग नज़रिये से देखते हैं। साफ़ दिख रहा है कि दोनों तरफ़ सोच और बयानात में काफ़ी फ़र्क है।

India की प्रतिक्रिया ने ये इशारा दिया कि वो सीधे इस टकराव का हिस्सा बनने के बजाय कुछ बुनियादी और आलमी उसूलों (universal principles) के साथ खड़ा है। India ने ये साफ़ कर दिया कि किसी भी मुल्क की सरज़मीन और उसकी sovereignty (संप्रभुता) का एहतराम होना चाहिए। बिना इजाज़त सीमा पार जाकर फ़ौजी कार्रवाई करना मसले को सुलझाने के बजाय और उलझा सकता है।

इलाक़ाई अमन (regional peace) और सामाजिक-आर्थिक तरक़्क़ी (development) के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि ऐसे मामलों का हल जल्दबाज़ी में की गई फ़ौजी कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत, तहक़ीक़ात (investigation) और अगर ज़रूरत हो तो अंतरराष्ट्रीय निगरानी (international monitoring) के ज़रिये निकाला जाए। वरना हालात और भी नाज़ुक हो सकते हैं।

India का पैग़ाम इस मामले में काफ़ी मज़बूत और साफ़ रहा है। उसने इस घटना को सिर्फ़ एक सैन्य कार्रवाई नहीं माना, बल्कि इसे इंसानी हक़ूक़ (human rights), international law और पूरे इलाके की stability से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया।

India का साफ़ कहना है:

बेगुनाह शहरी लोगों की मौत और नुक़सान की सख़्त मज़म्मत (condemnation) की जानी चाहिए।

Afghanistan की sovereignty और territorial integrity का पूरा सम्मान होना चाहिए।

कोई भी कार्रवाई global norms और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए।

Pakistan को अपने अंदरूनी मसाइल पर ध्यान देना चाहिए और हिंसात्मक रास्तों से बचना चाहिए।

आज की इस सूरत-ए-हाल ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि दहशतगर्दी, सरहदी झगड़े और इंसानी बोहरान (humanitarian crisis) जैसे मसले सिर्फ़ बंदूक और बम से हल नहीं होते।

असली हल सियासी बातचीत (political dialogue), कूटनीति (diplomacy) और अंतरराष्ट्रीय तआवुन (international cooperation) में ही छुपा हुआ है। अगर India, Pakistan और Afghanistan समझदारी और सब्र से काम लें, तो ही South Asia में स्थायी अमन और तरक़्क़ी का रास्ता खुल सकता है।

यह भी पढ़ें –

Exclusive Alert 2026: Nagpur में New Car Owners को Target करने वाला Dangerous Lucky Draw Scam Exposed

Powerful Action: Nagpur में बिजली चोरी रोकने के लिए MSEDCL की जागरूक अभियान, 4 लोगों पर बिजली चोरी के मामले में जुर्माना