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India US Trade Deal का सार्विक अवलोकन
India और US ने 7 फरवरी 2026 को आपस में एक अहम Trade Deal समझौता किया है, जिसे इंटरिम ट्रेड फ्रेमवर्क कहा जा रहा है। इसका मकसद यही है कि दोनों देशों के बीच कारोबार को और मज़बूत बनाया जाए और सामान बेचने-खरीदने में लगने वाला टैक्स कम किया जाए।
इस समझौते के तहत US ने India से जाने वाले कई सामानों पर लगने वाला टैक्स घटाकर करीब 18% कर दिया है। इतना ही नहीं, कुछ खास भारतीय चीज़ों पर अब बिल्कुल भी टैक्स नहीं लगेगा, यानी उन पर जीरो टैरिफ होगा।
वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने कई बार साफ कहा है कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे-छोटे कारोबारियों (MSME), एक्सपोर्ट करने वालों और टेक्नोलॉजी से जुड़े उद्योगों के लिए बहुत बड़ा मौका लेकर आया है। इससे उन्हें अमेरिका जैसे बड़े बाज़ार में अपनी चीज़ें आसानी से बेचने का मौका मिलेगा।
साथ ही सरकार ने यह भी पूरा ध्यान रखा है कि इस समझौते से भारत के संवेदनशील क्षेत्रों को कोई नुकसान न हो, खासकर खेती-किसानी और डेयरी से जुड़े लोगों को। यानी दूध, अनाज और दूसरी ज़रूरी चीज़ों के मामले में भारत के हितों की पूरी हिफ़ाज़त की गई है। कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के लिए तरक्की, रोज़गार और कारोबार बढ़ाने का एक सुनहरा मौका माना जा रहा है।
कौन-कौन से भारतीय सामानों पर US में अब 0% टैरिफ?
वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal के बयान और सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अब भारत से जाने वाले कई सामान अमेरिका में बिना किसी टैक्स के पहुँच सकेंगे। यानी इन चीज़ों पर अब कोई इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी और इन्हें जीरो टैरिफ का फायदा मिलेगा।
इनमें सबसे पहले आते हैं खेती और खाने-पीने से जुड़े सामान। जैसे — चाय, अलग-अलग तरह के मसाले, कॉफी और उससे बने प्रोडक्ट्स। इसके अलावा नारियल, नारियल का तेल, कोप्रा, काजू, बदाम और दूसरे ड्राय फ्रूट्स जैसे सुपारी (अरेका नट), ब्राज़ील नट और चेस्टनट भी अब आसानी से अमेरिका भेजे जा सकेंगे।
फल-सब्ज़ियों की बात करें तो आम, आमड़ा, अमरूद, पपीता, कीवी, अनानास, एवोकाडो जैसे फल, और तरह-तरह की सब्ज़ियाँ व मशरूम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। इतना ही नहीं, सब्ज़ियों से बने कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे वेजिटेबल वैक्स, जौ (बार्ले), बेकरी आइटम, तिल के बीज, खसखस और संतरे जैसे फलों का जूस भी अब बिना टैक्स के निर्यात किया जा सकेगा।
यानि साफ शब्दों में कहें तो अब इन सभी चीज़ों को अमेरिका भेजना पहले से कहीं ज़्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा, जिससे किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा।
लेकिन यहाँ एक बात समझना ज़रूरी है कुछ अहम खेती से जुड़े सामान अभी भी इस समझौते से बाहर रखे गए हैं। जैसे धान, गेहूँ, मक्का, सोयाबीन, दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स, मीट और कुछ फल जैसे केला और कुछ साइट्रस फल।
इन चीज़ों पर अभी भी अमेरिका में टैक्स लगेगा और इन्हें जीरो टैरिफ का फायदा नहीं मिलेगा। सरकार ने जानबूझकर इन्हें बाहर रखा है, ताकि हमारे किसानों और देसी बाजार को नुकसान न पहुँचे। कुल मिलाकर, यह फैसला भारत के किसानों और कारोबारियों के लिए राहत और तरक्की की नई राह खोलने वाला माना जा रहा है।
फार्मा और स्वास्थ्य-संबंधी उत्पाद
इस Trade Deal का सबसे बड़ा फायदा India की दवा इंडस्ट्री को मिलने वाला है। अब India में बनने वाली जनरल और ब्रांडेड दवाओं को US में बिना किसी टैक्स के बेचा जा सकेगा। यानी फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाज़ार में सीधी और आसान एंट्री मिलेगी।
यह इसलिए भी बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि US दुनिया का सबसे बड़ा दवा बाज़ार है। वहीं भारत को पूरी दुनिया में सस्ती और अच्छी जेनरिक दवाओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में अब भारतीय दवाओं की मांग और भी तेज़ी से बढ़ेगी, जिससे कंपनियों के साथ-साथ रोज़गार को भी फायदा होगा।
सिर्फ दवाइयाँ ही नहीं, बल्कि महंगे और हाई-वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स के लिए भी यह समझौता बहुत फायदेमंद साबित होने वाला है।
जैसे — India के रत्न और हीरे, स्मार्टफोन और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक चीज़ें, हवाई जहाज़ों के पुर्जे, मशीनें और उनके पार्ट्स, घड़ियाँ, सिक्के, प्लैटिनम, खुशबू वाले ज़रूरी तेल (Essential Oils), और घर सजाने की चीज़ें व कला से जुड़ी कलाकृतियाँ।

अब इन सभी सामानों पर भी अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगेगा। यानी इन्हें वहाँ भेजना सस्ता पड़ेगा और भारतीय कंपनियाँ दूसरी देशों से मुकाबले में और मज़बूत हो जाएँगी।
इससे इन इंडस्ट्रीज़ के लिए नए रास्ते खुलेंगे, नए ऑर्डर मिलेंगे, निवेश बढ़ेगा और हज़ारों लोगों को रोज़गार मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए तरक्की का एक नया दरवाज़ा खोल रहा है।
India ने किन क्षेत्रों में अपनी “रेड-लाइन” कायम रखी?
पीयूष गोयल ने बिल्कुल साफ लहजे में कहा है कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे कारोबारियों (MSME), कारीगरों और देसी उद्योगों के लिए किसी भी तरह का नुकसान नहीं करेगा। सरकार ने पूरा ध्यान रखा है कि देश के संवेदनशील क्षेत्रों को कोई ठेस न पहुँचे और उनके हक़ की पूरी हिफ़ाज़त हो।
उन्होंने बताया कि कई ऐसी खेती और खाने-पीने की चीज़ें हैं, जिन पर इस डील के तहत कोई भी टैक्स कम नहीं किया गया है। यानी इन मामलों में भारत ने अपनी मज़बूत पोज़ीशन बनाए रखी है।
इनमें सबसे पहले डेयरी से जुड़े सामान आते हैं — जैसे दूध, पनीर, घी और दूसरे दुग्ध उत्पाद। इसके अलावा चावल, गेहूँ, मक्का और सोयाबीन जैसे अनाज भी इस समझौते से बाहर रखे गए हैं।
साथ ही चीनी, बाजरा, रागी जैसे मोटे अनाज, केला, संतरे और दूसरे कुछ फल-फूलों को भी जीरो टैरिफ की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
एक और अहम बात यह है कि जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी जीएम फसलों के आयात पर भारत ने सख्त पाबंदी बनाए रखी है। मतलब बाहर से ऐसी फसलें मंगाने की इजाज़त नहीं दी गई है।
इसके अलावा मांस और पोल्ट्री से जुड़े प्रोडक्ट्स को भी इस डील में शामिल नहीं किया गया है, ताकि देसी किसानों और पशुपालकों को नुकसान न हो।
पीयूष गोयल ने ज़ोर देकर कहा कि यह पूरा समझौता भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और खेती को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से तैयार किया गया है। सरकार चाहती है कि देश का किसान मज़बूत रहे, खेत-खलिहान सुरक्षित रहें और भारत खाने के मामले में किसी पर निर्भर न बने। कुल मिलाकर, यह डील व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के हक़ और देश के हितों की हिफ़ाज़त का भी पूरा ख्याल रखती है।
डील का व्यापक प्रभाव
इस व्यापार समझौते से सबसे ज़्यादा फायदा भारत के निर्यातकों को होने वाला है। किसानों, खाने-पीने का सामान विदेश भेजने वालों, छोटे कारोबारियों (MSME) और बड़ी फैक्ट्रियों में सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए अब एक बहुत बड़ा बाज़ार खुल गया है।
अमेरिका में जब भारतीय सामानों पर 0% टैक्स लगेगा, तो हमारी चीज़ें वहाँ और सस्ती पड़ेंगी। इससे भारतीय प्रोडक्ट्स की कीमत दूसरे देशों के मुकाबले कम होगी और वे आसानी से मुकाबला कर पाएँगे। यानी हमारी चीज़ें ज़्यादा बिकेंगी और मांग भी बढ़ेगी।
इसका सीधा असर रोज़गार पर पड़ेगा। जैसे-जैसे एक्सपोर्ट बढ़ेगा, वैसे-वैसे नई फैक्ट्रियाँ लगेंगी, काम बढ़ेगा और हज़ारों लोगों को नौकरी मिलेगी। खासतौर पर गाँवों और छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को इससे बड़ी ताक़त मिलेगी।
सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि इस समझौते से भारत और अमेरिका के रिश्ते भी और मज़बूत होंगे। दोनों देश आर्थिक और सामरिक मामलों में पहले से ज़्यादा क़रीब आएँगे।
इस डील के बाद भारत और अमेरिका एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार बनकर उभरेंगे, जिससे आने वाले समय में निवेश, टेक्नोलॉजी और व्यापार के और भी नए रास्ते खुलेंगे। कुल मिलाकर, यह समझौता भारत की तरक्की, रोज़गार और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला माना जा रहा है।
आलोचना और सावधानियाँ
कुछ जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते के पूरे कानूनी काग़ज़ात यानी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। कई छोटी-बड़ी बातों की पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए कुछ लोग चाहते हैं कि सरकार इसकी सारी जानकारी खुलकर जनता के सामने रखे।
हालाँकि, भारत और अमेरिका — दोनों ही देशों का यही कहना है कि यह समझौता पूरी तरह संतुलित, साफ-सुथरा और पारदर्शी है। इसमें किसी के साथ नाइंसाफी नहीं की गई है और दोनों देशों के फायदे का पूरा ख्याल रखा गया है।
अगर कुल मिलाकर देखा जाए, तो भारत-अमेरिका का यह व्यापार समझौता एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। इससे भारत के कई सामानों को अमेरिका के बड़े बाज़ार में बिना टैक्स के बेचने का मौका मिलेगा, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
इसका सीधा फायदा देश के किसानों को मिलेगा, दवा बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों को मिलेगा, और छोटे-छोटे कारोबारियों यानी MSME को भी इसका लाभ मिलेगा।
इससे भारत का निर्यात तेज़ी से बढ़ेगा, नई नौकरियाँ पैदा होंगी, लोगों की आमदनी बढ़ेगी और देश की आर्थिक तरक्की को ज़बरदस्त रफ्तार मिलेगी। सीधे शब्दों में कहें तो यह समझौता भारत के लिए आगे बढ़ने, मज़बूत बनने और दुनिया में अपनी पहचान और पक्की करने का एक सुनहरा मौका है।
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