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Iran Israel War संकट के बीच PM Modi की सक्रिय कूटनीति
दुनिया की सियासत में इन दिनों हालात बड़ी तेजी से बदल रहे हैं, और ऐसे मुश्किल वक्त में PM Modi कूटनीति के मैदान में काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं। मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में Iran Israel War के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बढ़ते टकराव की वजह से खाड़ी मुल्कों में बेचैनी का माहौल है और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की हिफाज़त को लेकर फिक्र भी बढ़ गई है।
इन्हीं हालात को देखते हुए PM Modi ने ओमान और कुवैत के आला नेताओं से फोन पर अहम बातचीत की। इस गुफ्तगू में उन्होंने इलाके की ताजा सूरत-ए-हाल पर तफसील से बात की और खास तौर पर वहां बसे भारतीय नागरिकों की सलामती और खैरियत का मुद्दा उठाया।
पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के दौरान भारत ने हमेशा की तरह सब्र, समझदारी और बातचीत के रास्ते पर जोर दिया है। भारत का साफ कहना है कि मसलों का हल जंग से नहीं, बल्कि डायलॉग और अमन के जरिए निकलना चाहिए।
PM Modi ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबरक अल-सबाह से अलग-अलग फोन पर बात की। इन बातचीतों में मोदी ने न सिर्फ बढ़ते हमलों और बिगड़ते हालात पर चिंता जताई, बल्कि वहां काम कर रहे और रह रहे भारतीयों की हिफाज़त के लिए जरूरी कदम उठाने पर भी जोर दिया।
सिर्फ ओमान और कुवैत ही नहीं, बल्कि इससे पहले मोदी बहरीन, सऊदी अरब और कतर जैसे दूसरे खाड़ी मुल्कों के नेताओं से भी संपर्क कर चुके हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रख रहा है और हर मुमकिन कूटनीतिक कोशिश कर रहा है, ताकि मुश्किल हालात में भी भारतीय महफूज रहें।
Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में क्या हो रहा है?
पश्चिम एशिया में जो तनाव आज देखने को मिल रहा है, उसकी बड़ी वजह यूएस और इज़रायल के एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन के बाद ईरान की तरफ से की गई जवाबी कार्रवाई बताई जा रही है। हालात धीरे-धीरे इतने संगीन हो गए कि बात सीधे मिसाइल और ड्रोन हमलों तक पहुंच गई।
ईरान की इस जवाबी कार्रवाई में कई खाड़ी मुल्कों के शहरों और फौजी ठिकानों को निशाना बनाया गया। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में अचानक अलर्ट और इमरजेंसी जैसे हालात बन गए। लोगों में खौफ और बेचैनी का माहौल है।
इन हमलों में कई बेगुनाह लोगों की जान जाने की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ जगहों पर भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी भी मिली है, जिससे भारत में उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
इन सबके बीच भारत ने बहुत ही समझदारी और सब्र वाला रुख अपनाया है। भारत की विदेश नीति हमेशा से अमन, बातचीत और कूटनीति पर यकीन करती आई है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से गुजारिश की है कि हालात को और बिगाड़ने के बजाय बातचीत की मेज पर बैठकर मसले का हल निकाला जाए।
भारत ने साफ लफ्जों में कहा है कि हिंसा किसी भी मसले का हल नहीं होती। इसलिए जंग और टकराव को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत का जोर इस बात पर है कि इलाके में अमन कायम रहे, आम लोग महफूज रहें और हालात जल्द से जल्द काबू में आएं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा — सरकार का फोकस
करीब 90 लाख भारतीय नागरिक पश्चिम एशिया के अलग-अलग मुल्कों में रहते और काम करते हैं। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे देशों में बड़ी तादाद में हमारे लोग मौजूद हैं। कोई वहां नौकरी कर रहा है, कोई कारोबार से जुड़ा है, तो कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। हजारों परिवार भी वहीं बस चुके हैं और अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी गुजार रहे हैं।
ऐसे में जब इलाके में तनाव और जंग जैसे हालात पैदा होते हैं, तो सबसे बड़ी फिक्र अपने लोगों की सलामती को लेकर ही होती है। यही वजह है कि भारत सरकार के लिए इन सभी भारतीयों की सुरक्षा, सेहत और भलाई सबसे अहम मुद्दा बन गई है।
PM Modi ने बातचीत के दौरान साफ तौर पर यह बात रखी कि भारत अपने नागरिकों की हिफाज़त के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जल्दबाजी या उकसावे में आने के बजाय संयम, बातचीत और मजबूत कूटनीतिक रिश्तों के जरिए हालात को संभालने की कोशिश करेगा। मकसद यही है कि अगर कोई नाजुक सूरत-ए-हाल पैदा हो, तो भारतीयों को महफूज तरीके से बाहर निकाला जा सके।

इसी सिलसिले में भारत सरकार संभावित निकासी योजनाओं पर भी गौर कर रही है। जरूरत पड़ने पर खास उड़ानों और दूसरे इंतजामों के जरिए भारतीयों को सुरक्षित वतन वापस लाने की तैयारी पर भी विचार किया जा रहा है। साफ है कि सरकार अपने लोगों को किसी भी सूरत में अकेला छोड़ने के मूड में नहीं है, बल्कि हर हाल में उनकी हिफाज़त को यकीनी बनाना चाहती है।
कूटनीतिक विस्तार — केवल खाड़ी ही नहीं
ओमान और कुवैत के नेताओं के साथ हुई यह बातचीत कोई अकेली कोशिश नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों से PM Modi की बड़ी और व्यापक कूटनीतिक पहल का ही हिस्सा है। इससे पहले भी वह यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और जॉर्डन जैसे मुल्कों के रहनुमाओं से बात कर चुके हैं। इन तमाम बातचीतों का मकसद एक ही रहा है — इलाके में अमन कायम रहे, हालात ज्यादा न बिगड़ें और वहां मौजूद भारतीय नागरिक पूरी तरह महफूज रहें।
इन फोन कॉल्स को सिर्फ औपचारिक या सियासी बातचीत समझना ठीक नहीं होगा। दरअसल, यह भारत की जिम्मेदार और संतुलित विदेश नीति की एक साफ तस्वीर पेश करते हैं। जब दुनिया के किसी हिस्से में तनाव बढ़ता है, तो भारत अपने लोगों का साथ देने और हालात को काबू में रखने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक रास्ता अपनाता है।
PM Modi की यह पहल दिखाती है कि भारत जल्दबाजी या टकराव की सियासत में यकीन नहीं रखता, बल्कि सब्र, समझदारी और बातचीत के जरिए मसलों का हल निकालने में भरोसा करता है। साथ ही यह भी साफ संदेश जाता है कि भारत अपने नागरिकों को किसी भी मुश्किल घड़ी में अकेला नहीं छोड़ता।
कुल मिलाकर, यह पूरी रणनीति भारत की उस बड़ी सोच को सामने लाती है, जो अमन, तरक्की और आपसी सहयोग पर टिकी हुई है। भारत चाहता है कि इलाके में स्थिरता बनी रहे, विकास का पहिया चलता रहे और सभी देश मिलकर बेहतर भविष्य की तरफ बढ़ें।
भारत की प्राथमिकता — शांति, सुरक्षा और साझेदारी
PM Modi सरकार ने साफ और दो टूक लहजे में यह बात रखी है कि भारत अमन और स्थिरता चाहता है। भारत का मानना है कि जंग और टकराव से किसी का भला नहीं होता, इसलिए सभी मुल्कों को सब्र, समझदारी और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
PM Modi सरकार ने तमाम संबंधित देशों से दरख्वास्त की है कि हालात को और ज्यादा बिगाड़ने के बजाय डायलॉग के जरिए मसले का हल निकाला जाए, ताकि यह तनाव भरा दौर जल्द खत्म हो और आम लोग — खास तौर पर दूसरे देशों में रह रहे विदेशी समुदाय — खुद को महफूज महसूस कर सकें।
भारत ने यह भी रेखांकित किया है कि पश्चिम एशिया सिर्फ सियासी नजरिए से ही अहम नहीं है, बल्कि ऊर्जा सप्लाई, तेल-गैस और बड़े पैमाने पर व्यापारिक साझेदारी के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण इलाका है। अगर वहां लंबे वक्त तक अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए भारत चाहता है कि वहां अमन कायम रहे, ताकि व्यापार और आर्थिक गतिविधियां बिना रुकावट चलती रहें।
एक तरफ पश्चिम एशिया में संघर्ष की गर्माहट पूरी दुनिया की सियासत को प्रभावित कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की लगातार बातचीत यह इशारा देती है कि भारत की प्राथमिकता साफ है — शांतिपूर्ण हल, भारतीयों की सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी को मजबूत बनाए रखना। भारत यह दिखाना चाहता है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की घड़ी में वह घबराने के बजाय समझदारी और कूटनीति का रास्ता अपनाएगा।
इन तमाम कदमों से यह पैगाम भी जाता है कि भारत अपने नागरिकों की हिफाज़त के लिए पूरी तरह संजीदा है। जरूरत पड़ी तो हर मुमकिन इंतजाम करेगा, लेकिन साथ ही जंग के बजाय अमन की आवाज को बुलंद करता रहेगा।
आज की यह सक्रिय और मुतवाजिन (संतुलित) कूटनीति न सिर्फ पश्चिम एशिया में बसे भारतीय समुदाय को भरोसा देती है, बल्कि दुनिया के सामने भारत की एक जिम्मेदार और सकारात्मक ताकत की छवि भी मजबूत करती है।
भारत ने ईरान से जुड़े हालात पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। PM Modi ने कनाडा के प्रधानमंत्री से भी बातचीत की, जिसमें शांति, सहयोग और कूटनीतिक हल पर जोर दिया गया। साथ ही सरकार ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक जोखिमों को लेकर भी पूरी तरह चौकन्नी है, ताकि देश के हित सुरक्षित रह सकें।
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