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Kashmir Baramulla में Landslide की भीषण घटना
जम्मू और Kashmir के उत्तर कश्मीर में स्थित Baramulla ज़िले में शुक्रवार दोपहर एक बेहद खौफ़नाक और दिल दहला देने वाला Landslide देखने को मिला। यह हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस भूस्खलन की वजह से श्रीनगर-बारामूला-उरी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-1) पूरी तरह से बंद हो गया और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।
हुआ यूं कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। देखते ही देखते भारी-भरकम चट्टानें, मिट्टी और पत्थरों का अंबार सड़क पर फैल गया। हाईवे पर चल रही गाड़ियां वहीं की वहीं रुक गईं। कुछ ही पलों में यह इलाका एक ख़तरनाक मंजर में बदल गया, जहां लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नज़र आए।
इस Landslide हादसे के कुछ ही मिनटों के भीतर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पहाड़ की ढलान से बड़े-बड़े पत्थर लुढ़कते हुए सड़क पर गिर रहे हैं और वहां मौजूद लोग घबराकर अपनी गाड़ियां छोड़कर भाग रहे हैं। किसी की चीख-पुकार सुनाई देती है तो कोई बस दुआ करता नज़र आता है कि जान बच जाए। यह वीडियो देखकर किसी का भी दिल कांप जाए।
घटना कहां और कब हुई?
यह Landslide Baramulla के इको पार्क के पास, उरी रोड पर हुआ। यही वह इलाका है जहां इन दिनों सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ के किनारे की कटाई की जा रही थी। इसी वजह से पहाड़ी ढलान कमज़ोर हो गई थी और अचानक अपना संतुलन खो बैठी।
जैसे ही ढलान खिसकी, टन-के-टन मिट्टी और चट्टानें सीधे सड़क पर आ गिरीं। कुछ ही सेकंड में पूरा रास्ता मलबे से ढक गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
वो खौफ़नाक लम्हा, जब यह Landslide हादसा हुआ, उस वक्त हाईवे पर कई गाड़ियां मौजूद थीं। अचानक ऊपर से पत्थर गिरते देख ड्राइवरों और मुसाफ़िरों के होश उड़ गए। लोग बिना कुछ सोचे-समझे अपनी गाड़ियां वहीं छोड़कर भागने लगे। कोई सड़क के किनारे दौड़ता दिखा, तो कोई दूर खड़े होकर जान बचाने की कोशिश करता रहा।
वीडियो में साफ नज़र आता है कि लोग बाल-बाल बचते हुए, डर और घबराहट में चीखते-चिल्लाते हुए अपनी जान बचा रहे हैं। हालात ऐसे थे कि अगर ज़रा-सी भी देर हो जाती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।
राहत की खबर
इस पूरे Landslide हादसे में सबसे सुकून की बात यह रही कि अब तक किसी की मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे खतरनाक हादसे में किसी की जान न जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों ही राहत की सांस ले रहे हैं।
Baramulla Landslide में हुआ यह भूस्खलन एक बार फिर यह याद दिलाता है कि पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण कितना जोखिम भरा हो सकता है, अगर सही सावधानियां न बरती जाएं। कुछ सेकंड का यह मंजर लोगों के ज़ेहन में लंबे वक्त तक डर बनकर रहेगा।
फिलहाल प्रशासन हालात पर नज़र बनाए हुए है और मलबा हटाने का काम शुरू किया जा रहा है, ताकि रास्ता फिर से खोला जा सके। लेकिन इस Landslide हादसे ने यह साफ कर दिया है कि ज़रा-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी तबाही ला सकती है।
मुख्य कारण: सड़क चौड़ीकरण और ढलान की अस्थिरता
स्थानीय अफ़सरों और जानकार लोगों का कहना है कि यह भूस्खलन सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान हुई लापरवाही और पहाड़ी ढलान के कमज़ोर पड़ जाने की वजह से हुआ। जब सड़क को बड़ा और चौड़ा करने का काम चल रहा था, उसी दौरान पहाड़ के किनारे की मिट्टी और ज़मीन धीरे-धीरे ढीली होती चली गई। ऊपर से देखने में सब ठीक लग रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर ज़मीन अपना संतुलन खो चुकी थी।
फिर एक पल ऐसा आया जब पहाड़ी ढलान अचानक खिसक गई और देखते ही देखते भारी-भरकम चट्टानें और मिट्टी सड़क पर आ गिरीं। कुछ सेकंड में पूरा रास्ता मलबे से भर गया। यह सब इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

जानकारों का मानना है कि ऐसे बड़े निर्माण कार्यों के दौरान ढलान की मज़बूती पर खास ध्यान देना बेहद ज़रूरी होता है। पहाड़ी इलाकों में काम करते वक्त सिर्फ मशीनें चलाना ही काफी नहीं होता, बल्कि हर कदम पर विशेषज्ञों की निगरानी, पुख़्ता सुरक्षा इंतज़ाम और तकनीकी जांच भी ज़रूरी होती है।
विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि अगर पहले से ही ढलान को संभालने के पुख़्ता उपाय, जैसे मजबूत सहारे, जाल और सुरक्षा दीवारें लगाई गई होतीं, तो शायद यह हादसा टल सकता था। सही वक्त पर सावधानी बरती जाती तो न सड़क बंद होती, न लोग डर के साए में भागते, और न ही ऐसा खौफ़नाक मंजर देखने को मिलता।
यह घटना एक बार फिर यह सबक देती है कि पहाड़ों से छेड़छाड़ बिना पूरी तैयारी और समझदारी के की जाए, तो अंजाम बहुत भारी पड़ सकता है।
Baramulla Landslide यातायात पर असर: संचार टूटा
इस भूस्खलन की वजह से NH-1 पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यह वही सड़क है जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है, इसलिए इसके बंद होते ही आम लोगों की ज़िंदगी पर सीधा असर पड़ा है। सड़क पर चलने वाली बसें, ट्रक, माल ढोने वाले वाहन और निजी गाड़ियां सभी जगह-जगह फंसी हुई हैं। यात्रियों को समझ नहीं आ रहा कि आगे कैसे जाएं और कब तक रास्ता खुलेगा।
हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस हाईवे को पूरी तरह सील कर दिया है। अफ़सरों का कहना है कि अभी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि पहाड़ की ढलान से कभी भी फिर से पत्थर और चट्टानें गिर सकती हैं। ऐसे में किसी भी तरह की आवाजाही लोगों की जान के लिए ख़तरा बन सकती है।
इसी वजह से पुलिस और प्रशासन ने साफ तौर पर लोगों से अपील की है कि जब तक हालात सामान्य न हो जाएं, इस रास्ते से सफ़र करने से बचें। रास्ता बंद होने से व्यापार, सप्लाई और आम आवाजाही पर भी असर पड़ा है, लेकिन अफ़सरों का कहना है कि लोगों की जान सबसे ज़्यादा क़ीमती है, इसलिए पूरी सुरक्षा के बाद ही सड़क को दोबारा खोला जाएगा।
यह बंदी भले ही लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हो, लेकिन फिलहाल यही कदम सबकी हिफ़ाज़त के लिए ज़रूरी माना जा रहा है।
राहत-बचाव और बहाली के प्रयास
Landslide हादसे की खबर मिलते ही आपातकालीन विभाग, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सड़क बनाने वाली एजेंसियों की टीमें फौरन मौके पर पहुंच गईं। हालात का जायज़ा लेते ही भारी मशीनें और जेसीबी लगाकर सड़क पर पड़े मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। हर कोई यही कोशिश कर रहा है कि रास्ता जल्द से जल्द साफ़ हो और लोगों की परेशानी कम हो सके।
लेकिन अफ़सरों का कहना है कि अभी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। पहाड़ की ढलान अभी भी कमज़ोर बनी हुई है और ऊपर से कभी भी फिर से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से मलबा हटाने का काम बहुत एहतियात और धीरे-धीरे किया जा रहा है। जब तक यह पूरी तरह यक़ीन न हो जाए कि पहाड़ अब स्थिर है और पत्थर गिरना बंद हो चुके हैं, तब तक काम को पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ाना मुश्किल है।
अधिकारियों को इस बात की भी फिक्र है कि अगर अचानक फिर से चट्टानें गिरीं, तो राहत और बचाव में जुटी टीमों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाज़ी नहीं की जा रही है।
इसी बीच प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि फिलहाल इस रास्ते से सफ़र करने से बचें। जिन्हें ज़रूरी काम से जाना ही है, उन्हें वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने या अपनी यात्रा कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसी तरह की और दुर्घटना न हो और बेवजह भीड़ जमा न हो।
प्रशासन का साफ कहना है कि जब तक हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ जाते, लोगों की हिफ़ाज़त सबसे पहली प्राथमिकता रहेगी।
Baramulla के स्थानीय लोगों का अनुभव और प्रतिक्रिया
बारामूला और उसके आस-पास के इलाक़ों में रहने वाले लोग इस हादसे के बाद से काफी परेशान और सहमे हुए हैं। हर किसी के चेहरे पर डर साफ़ नज़र आ रहा है। एक स्थानीय शख़्स ने बताया,
“हम रोज़ इसी रास्ते से आना-जाना करते हैं। आज जो कुछ भी हुआ, उसने हम सबको अंदर तक हिला दिया है। हमारी आंखों के सामने लोग अपनी गाड़ियां छोड़कर भागते नज़र आए। उस वक़्त समझ आ गया था कि हालात कितने ख़तरनाक हो चुके हैं।”
वहीं, वहां फंसे एक दूसरे यात्री ने कहा,
“अगर पहले से थोड़ी और समझदारी बरती जाती, और पहाड़ की ढलान को संभालने के पुख़्ता इंतज़ाम होते, तो शायद आज यह हादसा देखने को नहीं मिलता। ज़रा-सी लापरवाही ने इतने लोगों की जान ख़तरे में डाल दी।”
ऐसे खौफ़नाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों में ग़ुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। लोग अब राज्य प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं कि सिर्फ़ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी सुरक्षा कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि पहाड़ी इलाक़ों में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा को हल्के में लेना अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों की यही गुज़ारिश है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, ताकि किसी बेगुनाह को अपनी जान से हाथ न धोना पड़े और लोग बेख़ौफ़ होकर सफ़र कर सकें।
भूस्खलन की आम चुनौतियाँ और भविष्य की तैयारी
कश्मीर और पूरे हिमालयी इलाक़ों में भूस्खलन कोई नई बात नहीं है। यहां ऐसे हादसे अक्सर देखने को मिलते हैं, ख़ासकर तब जब मौसम और इंसानी दख़ल दोनों मिलकर हालात को और ख़तरनाक बना देते हैं।
जब लगातार तेज़ बारिश होती है, या सर्दियों के बाद बर्फ़ पिघलने लगती है, तब पहाड़ों की मिट्टी नरम और ढीली हो जाती है। इसके अलावा जब सड़क चौड़ीकरण जैसे बड़े निर्माण कार्य चलते हैं, तो पहाड़ों की प्राकृतिक बनावट से छेड़छाड़ होती है, जिससे ढलान अपने आप कमज़ोर पड़ जाती है।
इन हालात में ज़रा-सी चूक भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि भूस्खलन को रोकने के लिए खतरनाक इलाक़ों में मज़बूत रोकड़ दीवारें, पत्थर रोकने वाले जाल और आधुनिक ढलान सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल बेहद ज़रूरी है। ये इंतज़ाम न सिर्फ़ सड़क को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि वहां से गुजरने वाले लोगों की जान की हिफ़ाज़त भी करते हैं।
निष्कर्ष: खतरा और ज़रूरी सावधानियाँ
Baramulla के NH-1 पर हुआ यह भूस्खलन एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि पहाड़ी इलाक़ों में विकास के नाम पर की जा रही गतिविधियों के साथ सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करना कितना भारी पड़ सकता है। सड़क विस्तार और निर्माण ज़रूरी हैं, लेकिन इनके साथ-साथ ढलानों की मज़बूती, लगातार निगरानी और सही योजना उतनी ही अहम है।
अगर पहले से ही बेहतर प्लानिंग, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इंजीनियरिंग और सही नक़्शा तैयार करके काम किया जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल प्रशासन राहत और बचाव के काम में जुटा हुआ है और पूरी कोशिश की जा रही है कि हालात जल्द काबू में आएं।
उम्मीद यही की जा रही है कि जल्द ही सड़क दोबारा खोली जाएगी, यातायात बहाल होगा और लोग बिना डर के, सलामती के साथ अपने-अपने मुक़ाम तक पहुंच सकेंगे। लेकिन यह हादसा एक सख़्त चेतावनी भी है कि आने वाले वक्त में ऐसी लापरवाहियों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
अगर फिर ये लापरवाही की गई तो इस बार तो लोगों की जान बच गई है, लेकिन ऐसा जरूरी तो नहीं कि हमेशा ऐसा चमत्कार हो। इस तरह के हादसों से बचना है तो पहाड़ों को चीरना बंद करना होगा।
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