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कैनेडी स्पेस सेंटर से चार मील की धीमी यात्रा
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने आख़िरकार वो काम शुरू कर दिया है, जिसका दुनिया को कई सालों से इंतज़ार था। NASA का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे ताक़तवर रॉकेट, जिसे SLS यानी स्पेस लॉन्च सिस्टम कहा जाता है, अब धीरे-धीरे अपने लॉन्चपैड की तरफ़ बढ़ रहा है। यह कोई मामूली तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक ऐसा ऐतिहासिक लम्हा है जो दशकों बाद इंसान को दोबारा चाँद के क़रीब ले जाने की तैयारी का एलान करता है।
यह पूरा क़दम Artemis 2 Mission का अहम हिस्सा है। इस मिशन में पहली बार कई सालों बाद इंसानी चालक दल चाँद की दिशा में उड़ान भरेगा, चाँद के चारों ओर चक्कर लगाएगा और फिर सुरक्षित तरीके से वापस धरती पर लौट आएगा। भले ही इस मिशन में चाँद पर उतरने की योजना नहीं है, लेकिन फिर भी इसका महत्व बहुत बड़ा है। दरअसल, 1972 के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान चाँद के इतना क़रीब पहुँचेगा। इसलिए इसे मानव इतिहास में एक नई ऊँचाई की शुरुआत माना जा रहा है।
17 जनवरी 2026 को यह नज़ारा दुनिया ने देखा, जब नासा ने अपने विशालकाय मून रॉकेट को आगे बढ़ाना शुरू किया। करीब 98 मीटर ऊँचा यह रॉकेट, जिसे Artemis 2 Mission SLS कहा जाता है, फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर के Vehicle Assembly Building (VAB) से निकलकर Launch Pad 39B की ओर रवाना हुआ। यह दूरी लगभग 4 मील, यानी करीब 6 किलोमीटर है, लेकिन इतनी भारी और नाज़ुक मशीन के लिए यह सफ़र किसी इम्तिहान से कम नहीं होता।
रॉकेट को जानबूझकर बहुत ही धीमी रफ़्तार, यानी करीब 1 मील प्रति घंटे की स्पीड से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसकी वजह साफ़ है रॉकेट और उसके साथ लगे मोबाइल लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म का वज़न करीब 11 मिलियन पाउंड, यानी लगभग 50 लाख किलो है।
इतनी भारी और क़ीमती मशीन को ज़रा-सी भी लापरवाही के बिना, पूरी सतर्कता और संतुलन के साथ ले जाना ज़रूरी होता है। हर इंच पर इंजीनियरों और तकनीशियनों की नज़र रहती है, ताकि कोई भी तकनीकी ख़ामी या जोखिम सामने न आए।
इस पूरे सफ़र के दौरान माहौल भी बेहद ख़ास था। ठंडी सुबह में नासा के कर्मचारी, इंजीनियर, तकनीशियन और उनके परिवार के लोग वहाँ जमा हो गए। बहुत से लोगों की आँखों में ख़ुशी, गर्व और भावुकता साफ़ दिखाई दे रही थी। कई लोगों के लिए यह सिर्फ़ एक रॉकेट की मूवमेंट नहीं थी, बल्कि इंसानी मेहनत, सब्र और सपनों की जीत का मंज़र था। यह वही लोग हैं जिन्होंने सालों तक दिन-रात मेहनत करके इस मिशन को इस मुक़ाम तक पहुँचाया है।
कुल मिलाकर, यह पल सिर्फ़ नासा के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए मायने रखता है। यह बताता है कि इंसान अब भी आसमान की ऊँचाइयों को छूने का हौसला रखता है, अब भी चाँद और उससे आगे जाने के ख़्वाब देखता है। Artemis II मिशन उसी सफ़र की पहली मज़बूत सीढ़ी है, जो आने वाले वक़्त में इंसान को चाँद पर फिर से उतारने और शायद मंगल तक पहुँचाने की राह बनाएगी।
Artemis 2 Mission: किसका नेतृत्व करेगा?
Artemis 2 Mission का असली मक़सद इंसान को एक बार फिर चाँद के बेहद क़रीब ले जाना है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री एक साथ अंतरिक्ष की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा पर निकलेंगे। ये सभी अंतरिक्ष यात्री रॉकेट में सवार होकर चाँद के चारों ओर घूमेंगे, उसकी परिक्रमा करेंगे और उसके बाद सुरक्षित तरीके से वापस धरती पर लौट आएंगे।
इस ऐतिहासिक Artemis 2 Mission में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। इन बहादुर यात्रियों के नाम हैं — रीड वाइज़मैन (Reid Wiseman), विक्टर ग्लोवर (Victor Glover), क्रिस्टीना हैमक कॉक (Christina Hammock Koch) और जेरेमी हैंसन (Jeremy Hansen)। ये चारों अपने-अपने अनुभव, हौसले और तकनीकी समझ के साथ इस मिशन को कामयाब बनाने जा रहे हैं।
यह Artemis 2 Mission करीब 10 दिनों तक चलेगा। इन दस दिनों में अंतरिक्ष यात्री चाँद के चारों ओर कई चक्कर लगाएंगे और इस दौरान कई अहम वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। ये टेस्ट भविष्य के मिशनों के लिए बेहद ज़रूरी हैं, खासकर तब जब आगे चलकर इंसान को चाँद पर उतारने और उससे भी आगे मंगल तक भेजने की तैयारी की जा रही है।
जिस रॉकेट से ये अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे, वह नासा का अब तक का सबसे ताक़तवर रॉकेट है। इसकी ताक़त इतनी ज़बरदस्त है कि यह इंसानों को धरती से बहुत दूर, उस जगह तक ले जाने की क़ाबिलियत रखता है जहाँ अब तक बहुत कम लोग पहुँचे हैं। यह यात्रा इंसानी इतिहास की अब तक की सबसे दूर की इंसानी उड़ान मानी जाएगी धरती की हदों से बाहर, चाँद के बिल्कुल क़रीब तक।
कुल मिलाकर, Artemis 2 Mission सिर्फ़ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि यह इंसान के हौसले, जिज्ञासा और आसमान से आगे देखने के ख़्वाब की एक ज़िंदा मिसाल है।
लॉन्चपैड पर तैयारियों का अंतिम चरण
जब रॉकेट Launch Pad 39B पर पहुँच जाएगा, तो उसके बाद असली और सबसे नाज़ुक तैयारियों का दौर शुरू होगा। लॉन्च से पहले यह ज़रूरी होता है कि रॉकेट के हर छोटे-बड़े हिस्से को अच्छी तरह परखा जाए, ताकि उड़ान के दिन कोई भी ख़ामी सामने न आए। इसी वजह से नासा रॉकेट को कई अहम और सख़्त तकनीकी टेस्ट से गुज़ारता है।
सबसे पहला और सबसे अहम टेस्ट होता है Wet Dress Rehearsal। इसे आसान भाषा में समझें तो यह लॉन्च की पूरी रिहर्सल होती है। इस टेस्ट में रॉकेट को बिल्कुल असली लॉन्च की तरह तैयार किया जाता है। इसमें रॉकेट के टैंकों में पूरा ईंधन भरा जाता है और सभी सिस्टम को उसी तरह चालू किया जाता है, जैसे उड़ान वाले दिन किया जाएगा। पूरा काउंटडाउन भी वैसा ही होता है, बस फर्क इतना होता है कि रॉकेट उड़ान नहीं भरता।

इस rehearsal का मक़सद कई बातें साफ़ करना होता है। सबसे पहले यह देखा जाता है कि ईंधन भरने की प्रक्रिया सही ढंग से और बिना किसी दिक्कत के हो रही है या नहीं। इसके बाद काउंटडाउन सिस्टम और लॉन्च से जुड़े सभी कंट्रोल सिस्टम की पूरी जांच की जाती है। साथ ही, अगर किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी या संभावित ख़तरा सामने आता है, तो उसे पहले ही पकड़ लिया जाता है और वक्त रहते ठीक कर दिया जाता है। यह रिहर्सल तब तक दोहराई जाती है, जब तक नासा को पूरा भरोसा न हो जाए कि सब कुछ बिल्कुल सुरक्षित और दुरुस्त है।
इसके अलावा एक और बेहद ज़रूरी प्रक्रिया होती है, जिसे Ground Support System Check कहा जाता है। इसमें रॉकेट से जुड़े ज़मीनी सिस्टम की आख़िरी बार गहराई से जांच की जाती है। रॉकेट के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, कम्युनिकेशन यानी संचार व्यवस्था, और पर्यावरण नियंत्रण सिस्टम को बारीकी से परखा जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि लॉन्च के वक्त रॉकेट और कंट्रोल सेंटर के बीच संपर्क बिल्कुल सही रहे और अंदर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए माहौल पूरी तरह सुरक्षित हो।
कुल मिलाकर, लॉन्चपैड पर होने वाली ये सारी जांच और रिहर्सल नासा की उस सोच को दिखाती हैं, जिसमें सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाता है। रॉकेट के उड़ान भरने से पहले हर मुमकिन जोखिम को खत्म करने की पूरी कोशिश की जाती है, ताकि मिशन कामयाब हो और अंतरिक्ष यात्री सही-सलामत अपने सफ़र पर निकल सकें।
Artemis 2 Mission: संभावित लॉन्च विंडोज़
फिलहाल Artemis 2 Mission के लिए NASA ने लॉन्च की तारीख़ को लेकर कुछ अलग-अलग लॉन्च विंडो तय की हैं। सबसे पहली और अहम लॉन्च विंडो 6 फ़रवरी 2026 से शुरू हो रही है। अगर किसी वजह से जैसे मौसम की खराबी या कोई तकनीकी जांच पूरी न हो पाए उस दिन रॉकेट उड़ान नहीं भर पाता, तो घबराने की बात नहीं है।
NASA ने इसके लिए पहले से ही मार्च और अप्रैल तक के दूसरे विकल्प भी तैयार रखे हैं। इससे यह साफ़ हो जाता है कि एजेंसी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती और मिशन की कामयाबी के लिए हर मुमकिन तैयारी कर रही है।
अब सवाल उठता है कि आख़िर Artemis 2 Mission इतना अहम क्यों माना जा रहा है?
दरअसल, यह मिशन सिर्फ़ एक और अंतरिक्ष उड़ान नहीं है, बल्कि इंसान की चाँद की ओर वापसी का प्रतीक है। करीब 50 साल से भी ज़्यादा वक्त हो चुका है जब आख़िरी बार इंसान चाँद के आसपास गया था। Apollo मिशन के बाद यह पहला मौका है, जब नासा एक बार फिर इंसानी चालक दल को चाँद की दिशा में भेजने जा रहा है।
यह लम्हा इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। Artemis 2 Mission उस दौर की याद दिलाता है, जब Apollo मिशन ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। फर्क सिर्फ़ इतना है कि अब तकनीक और भी ज़्यादा मज़बूत है, तैयारी और भी पुख़्ता है और मंज़िल सिर्फ़ चाँद तक सीमित नहीं, बल्कि आगे चलकर मंगल और उससे आगे की उड़ानों का रास्ता भी खोलना है।
सीधे शब्दों में कहें तो Artemis 2 Mission यह पैग़ाम देता है कि इंसान ने चाँद से अपना रिश्ता कभी तोड़ा नहीं था बस अब एक बार फिर पूरे भरोसे और नए हौसले के साथ उस अधूरी कहानी को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

भविष्य के मंगल मिशन का आधार
Artemis 2 Mission सिर्फ़ इतना भर नहीं है कि रॉकेट चाँद के चारों ओर घूम आए और वापस धरती पर लौट आए। दरअसल, यह मिशन आने वाले वक़्त की बड़ी अंतरिक्ष यात्राओं की बुनियाद रख रहा है। यही मिशन आगे चलकर चाँद पर दोबारा इंसानी लैंडिंग और फिर उससे भी आगे मंगल तक पहुँचने के सपने को हक़ीक़त में बदलने की राह तैयार करेगा। इसे यूँ समझिए कि Artemis II उस लंबे सफ़र की पहली मज़बूत कड़ी है, जिसकी मंज़िल सिर्फ़ चाँद नहीं, बल्कि पूरा सौरमंडल है।
इस पूरे कार्यक्रम की एक और बड़ी ख़ासियत है वैश्विक सहयोग। NASA का Artemis 2 Mission किसी एक देश की मेहनत तक सीमित नहीं है। इसमें दुनिया भर के वैज्ञानिक, इंजीनियर और स्पेस एक्सपर्ट्स मिलकर काम कर रहे हैं। अलग-अलग देशों की तकनीक, अनुभव और सोच एक साथ जुड़कर इस मिशन को आगे बढ़ा रही है। यही वजह है कि Artemis कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग की शानदार मिसाल माना जा रहा है।
अब Artemis 2 Mission की तैयारियाँ अपने आख़िरी मुक़ाम पर पहुँच चुकी हैं। जब यह विशालकाय SLS रॉकेट धीरे-धीरे बढ़ते हुए Launch Pad 39B तक पहुँचा, तो वह सिर्फ़ एक भारी मशीन की ज़मीन पर की गई यात्रा नहीं थी। वह दरअसल इंसान के हौसले, उम्मीद और अंतरिक्ष के लिए उसके जुनून की कहानी थी। उस पल ने यह एहसास कराया कि इंसान आज भी सितारों को छूने का ख़्वाब देखता है और उन्हें हासिल करने की ताक़त रखता है।
अब बस कुछ ही हफ्तों का इंतज़ार बाकी है। जब यह रॉकेट इंसानी चालक दल के साथ आसमान की तरफ़ उड़ान भरेगा, तो वह सिर्फ़ अंतरिक्ष की ओर नहीं जाएगा, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें और दुआएँ भी अपने साथ लेकर जाएगा। यह उड़ान न सिर्फ़ इंसानों को चाँद के क़रीब ले जाएगी, बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और लाखों अंतरिक्ष प्रेमियों के दिलों में एक नई उम्मीद और जोश भी भर देगी।
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