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कौन हैं Nitesh Rajput?
Nitesh Rajput एक जाने-माने YouTuber और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। ये अक्सर सरकारी नीतियों, परीक्षाओं और राजनीतिक मामलों पर अपने वीडियोस में गहराई से चर्चा करते हैं। उनकी वीडियोस में आमतौर पर RTI (Right to Information) यानी जनता के हक की जानकारी, सरकारी दस्तावेज़ और ठोस तथ्यों के आधार पर सवाल उठाए जाते हैं, ताकि आम आदमी को भी यह समझ आए कि सरकार कैसे काम कर रही है।
भारत में सरकारी नौकरी के लिए SSC (Staff Selection Commission) की परीक्षाएँ बहुत अहम होती हैं। लाखों छात्र इन परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं क्योंकि ये उनकी ज़िंदगी का बड़ा फैसला कर देती हैं। लेकिन इन परीक्षाओं के संचालन, पारदर्शिता और vendor यानी ठेकेदारों के चयन को लेकर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं।
हाल ही में यह मुद्दा एक बड़े विवाद की तरफ बढ़ गया, जब नितीश राजपूत के खिलाफ ₹2.5 करोड़ का मानहानि (defamation) केस दायर किया गया। इस केस में आरोप लगाया गया कि उनके वीडियोस में SSC और संबंधित अधिकारियों के बारे में कुछ बातें कही गईं, जिन्हें कथित तौर पर गलत और अपमानजनक माना गया।
इससे ना सिर्फ कानूनी मुद्दे खड़े हो गए, बल्कि राजनीतिक माहौल में भी हलचल मच गई। लोग सोशल मीडिया पर इस मामले पर अपनी राय देने लगे, और कईयों ने इसे सरकारी व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाला मुद्दा भी माना।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत में क्या फैसला आता है, और क्या इस केस से SSC परीक्षाओं और सरकारी सिस्टम में किसी तरह की पारदर्शिता या सुधार की राह खुलती है।
क्या था वीडियो में दावा?
Nitesh Rajput ने हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने SSC परीक्षा प्रक्रिया, टेंडर (Tender) प्रक्रिया और परीक्षा का कॉन्ट्रैक्ट किसे दिया जाता है, इस पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए। वीडियो में उन्होंने बड़े ही विस्तार से और ठोस तथ्यों के साथ ये मुद्दे सामने रखे।
मुख्य बातें जो उन्होंने वीडियो में साझा कीं, वो कुछ इस तरह थीं:
सबसे पहले उन्होंने SSC के Vendor Selection यानी यह तय करने की प्रक्रिया कि किस कंपनी को परीक्षा कराने का कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा, को बहुत ही साफ़ तरीके से उजागर किया। उन्होंने इसमें पारदर्शिता (Transparency) के सवाल उठाए और बताया कि सिस्टम में अक्सर कैसे उलझन और अस्पष्टता देखने को मिलती है।
वीडियो में उन्होंने RTI के जवाब, सरकारी दस्तावेज़ और प्रक्रिया में होने वाले बदलावों के रिकॉर्ड भी दिखाए, ताकि हर दर्शक खुद समझ सके कि चीजें कैसे काम कर रही हैं। उनका कहना था कि SSC के नियमों में बार-बार बदलाव होने से उम्मीदवारों का भरोसा परीक्षा प्रबंधन पर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
उन्होंने खास तौर पर Eduquity Technologies Pvt. Ltd. जैसी कंपनियों का नाम लिया, जो बार-बार टेंडर जीत जाती हैं। वीडियो में उन्होंने तकनीकी खराबी, पेपर लीक होने जैसी समस्याओं और Normalization जैसी परेशानियों का भी जिक्र किया।
Nitesh Rajput ने इसे एक “एक ऑवर-लॉन्ग विश्लेषण” बताया, जिसे उनके मुताबिक हर सरकारी नौकरी के उम्मीदवार को ज़रूर देखना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि केवल तैयारी करना ही काफी नहीं है, बल्कि सिस्टम में सच्चाई, पारदर्शिता और जवाबदेही का होना बहुत ज़रूरी है। यही वजह है कि उन्होंने इतना गहराई से इन मुद्दों को समझाने की कोशिश की।
SSC परीक्षाओं में छात्रों की नाराज़गी
SSC परीक्षाओं के दौरान अधिकारियों और छात्रों के बीच हमेशा से ही शिकायतों का लंबा सिलसिला चलता आया है। कई बार तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं, जिससे छात्रों में काफी तनाव और परेशानी पैदा होती है।
कभी हल्के प्रश्न-पत्र आते हैं, तो कभी बहुत कठिन Normalisation के चलते रिजल्ट और Answer Key में बार-बार बदलाव देखने को मिलते हैं। यही नहीं, कई उम्मीदवारों को समय पर सपोर्ट और मदद भी नहीं मिल पाती।

लाखों उम्मीदवारों का मानना है कि यह पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार, Vendor नियंत्रण और पैसों की राजनीति से गहरा प्रभावित है। ऐसे माहौल में छात्रों की नाराज़गी और असंतोष बढ़ना लाज़िमी है।
नितीश राजपूत की वीडियो ने इसी नाराज़गी और असंतोष को बड़े पैमाने पर उजागर किया। उनकी वीडियो ने सिर्फ तथ्यों को सामने रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि किस तरह से सिस्टम में सच्चाई, पारदर्शिता और जवाबदेही की बहुत ज़रूरत है।
Rs 2.5 करोड़ का Defamation (मानहानि) केस क्यों?
जब Nitesh Rajput ने वह वीडियो प्रकाशित किया, तो Eduquity Technologies Pvt. Ltd. ने दिल्ली की अदालत में उनके खिलाफ ₹2.5 करोड़ का मानहानि (defamation) केस दायर कर दिया। कंपनी का दावा था कि नितीश की वीडियो में जो जानकारी दी गई है, वह भ्रामक और गलत है।
Eduquity का आरोप था कि वीडियो के कारण उनकी साख (Reputation) और कंपनी की इज़्ज़त को बहुत गंभीर नुकसान हुआ है। इसके साथ ही कंपनी ने अदालत से मुआवज़ा देने और वीडियो को हटाने की भी मांग की। उनका कहना था कि इस वीडियो की वजह से उनके काम में आर्थिक और सामाजिक नुकसान हुआ है और कंपनी की छवि पर असर पड़ा है।
दूसरी तरफ़, Nitesh Rajput ने अपने जवाब में कहा कि उनका विश्लेषण किसी फ़र्जी कहानी या अफ़वाह पर आधारित नहीं है, बल्कि यह सब Verified public records और RTI के दस्तावेज़ों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने साफ़ कहा कि वीडियो को हटाया नहीं जाएगा क्योंकि यह छात्रों के हित में है और सिस्टम में सुधार की दिशा में एक ज़रूरी कदम है।
Nitesh Rajput का कहना है कि उनका मक़सद किसी की इज़्ज़त को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि सरकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी की कितनी ज़रूरत है।
अब मामला कोर्ट तक क्यों गया?
यह जो मामला सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था, अब धीरे-धीरे कानूनी जंग में बदल चुका है। Eduquity ने Nitesh Rajput के खिलाफ मानहानि (defamation) का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी वीडियो की वजह से कंपनी को भारी आर्थिक और सामाजिक नुकसान हुआ है। फिलहाल, कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने बयान पेश कर रहे हैं।
इस पूरे SSC Controversy ने छात्रों और Aspirant groups को भी सक्रिय कर दिया है। कई छात्र संगठन और तैयारी करने वाले उम्मीदवार अब इस मामले में Judicial Review की मांग कर रहे हैं, ताकि SSC की परीक्षाओं और टेंडर सिस्टम में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
कुछ छात्र संगठन तो इस मामले को और आगे ले जाने की तैयारी में हैं और Supreme Court तक अपील करने का प्लान बना रहे हैं। उनका कहना है कि SSC के Tender और Recruitment System पर Independent और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद और असंतोष पैदा न हों।
इसका मतलब यह साफ़ है कि यह मामूली विवाद अब सिर्फ़ एक वीडियो या कंपनी तक सीमित नहीं है। यह मामला पारदर्शिता, सरकारी परीक्षा प्रक्रिया, शिक्षा नीति और सिस्टम सुधार तक फैल गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस पर क्या फैसला देती है और SSC जैसी संस्थाओं में सुधार की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
इस SSC Controversy का बड़ा मतलब क्या है?
पत्रकारिता और सवाल-जवाब की ताक़त: कई लोग मानते हैं कि अगर कोई सिस्टम की कमियों और खामियों को उजागर करता है, तो उसे बहस (debate) और चर्चा का हिस्सा होना चाहिए, न कि तुरंत कानूनी जंग में घसीटा जाना चाहिए। यही वह मूल सवाल है जो नितीश राजपूत के SSC Controversy में सामने आया।
परीक्षा प्रणाली पर सवाल: लाखों SSC aspirants की निराशा, उनके सवाल और प्रशासन की जवाबदेही — ये दो बड़ी बातें हैं, जो इस विवाद को सिर्फ़ एक व्यक्तिगत झगड़े से कहीं आगे लेकर जाती हैं। यह अब आम जनता के लिए लोकतांत्रिक मुद्दा बन चुका है। क्योंकि सवाल केवल एक वीडियो या कंपनी तक सीमित नहीं हैं; यह सीधे सरकारी भर्ती प्रणाली, नियमों और परीक्षा की सच्चाई, पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की ताक़त: YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म यह साबित कर रहे हैं कि अगर कोई सिरियस और ठोस विश्लेषण सामने लाता है, तो वह सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका तक भी आसानी से पहुँच सकता है। यही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी सीख है। अब कोई भी आम नागरिक या छात्र यह देख सकता है कि सिस्टम में कहाँ खामियाँ हैं और उनकी आवाज़ कितनी दूर तक पहुँच सकती है।
Nitesh Rajput का SSC Controversy सिर्फ़ एक Video बनाम Company का मामूली झगड़ा नहीं है। यह सरकारी भर्ती प्रक्रिया, पारदर्शिता, डिजिटल जवाबदेही और freedom of speech जैसे अहम मुद्दों को छू रहा है। चाहे कोर्ट का फैसला किसी भी तरह का हो, एक बात अब साफ़ है — लाखों SSC उम्मीदवार अब सिर्फ़ परीक्षा की तैयारी ही नहीं कर रहे, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सिस्टम सुधार की लड़ाई भी लड़ रहे हैं।
यह मामला यह भी दिखाता है कि आज का डिजिटल युग छात्रों और आम जनता को अपनी आवाज़ उठाने का मौका दे रहा है। एक साधारण वीडियो ने हजारों लोगों के सवालों को सामने ला दिया और सिस्टम की कमियों पर सवाल खड़े करने का साहस दिखाया। इस वीडियो ने छात्रों और युवाओं में यह संदेश भी दिया कि अगर आप जिम्मेदारी के साथ सच की तलाश करें तो आपकी आवाज़ किसी भी कंपनी या सिस्टम को चुनौती दे सकती है।
सिर्फ़ यही नहीं, इस पूरे SSC Controversy ने यह भी साबित किया कि लोकतंत्र में नागरिकों का सवाल करना, आलोचना करना और पारदर्शिता की मांग करना कोई अपराध नहीं है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया ने छात्रों और आम लोगों को यह ताक़त दी है कि वे सरकारी सिस्टम में सुधार और जवाबदेही की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
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