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Rajpal Yadav के ₹9 करोड़ Check bounce case में जमानत को लेकर big update

Rajpal Yadav के ₹9 करोड़ Check bounce case में जमानत को लेकर big update

Rajpal Yadav ₹9 करोड़ का विवाद और चेक बाउंस मामले की पृष्ठभूमि

लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेता Rajpal Yadav आजकल अपनी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। कभी जिनकी कॉमेडी पर लोग खुलकर हँसते थे, आज वही कलाकार अदालतों और जेल की चारदीवारी के बीच फँसे हुए हैं। Delhi High Court में चल रहे करीब ₹9 करोड़ के चेक बाउंस केस की वजह से वह इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी जमानत की अर्जी पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है और अदालत ने सुनवाई को सोमवार, 16 फरवरी 2026 तक के लिए टाल दिया है।

यह मामला सिर्फ कागज़ी कार्रवाई या कानूनी बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे कलाकार की कहानी है जिसने सालों तक अपनी मेहनत और हुनर से लोगों को हँसाया, खुशियाँ दीं और दिल जीते। आज वही इंसान अपने निजी और पारिवारिक हालात का हवाला देकर अदालत से रहम की गुहार लगा रहा है। Rajpal Yadav ने कोर्ट से कहा कि परिवार में शादी है, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए जमानत दी जाए, ताकि वह इस खुशी के मौके में शामिल हो सकें।

दरअसल, Rajpal Yadav का यह मामला कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें करीब दस साल पुरानी हैं। उस वक्त Rajpal Yadav ने अपनी फिल्म Ata Pata Laapata बनाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी से लगभग ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म अच्छा बिज़नेस करेगी और वह आसानी से पैसा लौटा देंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।

फिल्म के नहीं चलने की वजह से वह समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। धीरे-धीरे उस रकम पर ब्याज जुड़ता गया और देखते ही देखते मामला करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गया। जब उन्होंने पैसा चुकाने के लिए चेक दिए, तो वे भी बाउंस हो गए। इसके बाद मामला कोर्ट पहुँच गया और उनके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट यानी चेक बाउंस कानून के तहत केस दर्ज हुआ।

इस केस में Rajpal Yadav और उनकी पत्नी दोनों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। हालांकि, शुरुआत में हाई कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी और कहा था कि अगर वे सामने वाले पक्ष से समझौता कर लें और पैसा चुका दें, तो सजा में ढील दी जा सकती है। उस वक्त सभी को लगा था कि शायद मामला यहीं खत्म हो जाएगा।

लेकिन अफसोस, ऐसा नहीं हो पाया। कई मौके मिलने के बावजूद राजपाल यादव पूरा भुगतान नहीं कर सके। कभी आर्थिक तंगी, कभी काम की कमी और कभी दूसरी परेशानियों की वजह से वह अपनी बात पर कायम नहीं रह पाए। अदालत ने भी देखा कि बार-बार समय देने के बावजूद मामला सुलझ नहीं रहा है।

आखिरकार Delhi High Court ने सख्त रुख अपनाया और उन्हें सजा भुगतने का आदेश दे दिया। इसके बाद 5 फरवरी 2026 को Rajpal Yadav ने खुद जाकर तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया। यह पल उनके लिए और उनके चाहने वालों के लिए बेहद दर्दनाक था। एक ऐसा कलाकार, जिसने ज़िंदगी भर लोगों को हँसाया, आज खुद आँसुओं और मुश्किलों में घिरा हुआ है।

आज Rajpal Yadav की हालत देखकर यही लगता है कि शोहरत और नाम के बावजूद ज़िंदगी कभी भी किसी को आसान रास्ता नहीं देती। अदालत ने साफ कर दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह आम आदमी हो या बड़ा स्टार। सिर्फ परिवार की शादी या निजी मजबूरी के आधार पर तुरंत जमानत देना सही नहीं समझा गया।

Rajpal Yadav की यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि ज़िंदगी में फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। कर्ज, पैसा और कानूनी जिम्मेदारियों को हल्के में लेना कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाता है। आज वह अपने किए हुए फैसलों की कीमत चुका रहे हैं।

अब सबकी नजरें सोमवार की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। देखना यह है कि कोर्ट उन्हें कुछ राहत देती है या नहीं। उनके फैंस और चाहने वाले दुआ कर रहे हैं कि हालात बेहतर हों और वह जल्द इस मुश्किल दौर से बाहर निकलें। लेकिन फिलहाल उनकी ज़िंदगी एक कठिन इम्तिहान से गुजर रही है, जहाँ हर कदम पर सब्र, हिम्मत और उम्मीद की जरूरत है।

12 फरवरी 2026 की सुनवाई: क्या हुआ Delhi High Court में?

12 फरवरी को Delhi High Court में Rajpal Yadav की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। इस दौरान उनके वकील ने अदालत से गुज़ारिश की कि उन्हें कुछ समय के लिए जमानत दे दी जाए, क्योंकि परिवार में शादी है। बताया गया कि उनके भतीजे या भतीजी की शादी होने वाली है और वह इस खुशी के मौके पर अपने घरवालों के साथ रहना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट से थोड़ी राहत माँगी।

लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत का रवैया काफी सख्त नजर आया। जज ने Rajpal Yadav से सीधे और साफ सवाल किया कि इतने सालों तक उन्होंने कोर्ट से किए गए अपने वादों को क्यों नहीं निभाया। उन्होंने पूछा कि जब उन्हें बार-बार समय दिया गया, बार-बार मौका दिया गया, तब भी वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा क्यों नहीं कर पाए।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आप जेल इसलिए नहीं गए हैं कि अदालत ने जबरदस्ती भेज दिया, बल्कि इसलिए गए हैं क्योंकि आपने खुद अपने वादों और बातों का सम्मान नहीं किया। आपने जो कहा, जो भरोसा दिलाया, उसे निभाया नहीं। इसी वजह से आज आपको यह दिन देखना पड़ रहा है।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कानून की नजर में सब बराबर होते हैं। कोई बड़ा कलाकार हो या आम इंसान, सबके लिए नियम एक जैसे हैं। सिर्फ यह कह देना कि घर में शादी है या कोई निजी परेशानी है, इसके आधार पर खास रियायत नहीं दी जा सकती। अदालत ने माना कि हालात इंसानी नजर से देखें तो मुश्किल जरूर हैं, लेकिन कानून और न्याय की प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जा सकता।

Delhi High Court का साफ कहना था कि हम भावनाओं से नहीं, बल्कि कानून के हिसाब से फैसला करते हैं। अगर हर किसी को निजी वजहों पर छूट मिलने लगे, तो फिर इंसाफ का मतलब ही खत्म हो जाएगा।

इसी वजह से अदालत ने उस दिन जमानत पर कोई तुरंत फैसला नहीं सुनाया। जज ने कहा कि अभी इस मामले को और अच्छे से देखना होगा। इसलिए सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए अगली तारीख सोमवार, 16 फरवरी 2026 तय कर दी गई।

Delhi High Court ने शिकायतकर्ता यानी जिस कंपनी या व्यक्ति का पैसा बकाया है, उसे भी नोटिस भेजा है कि वह अपनी बात और दलीलें सामने रखे। अदालत चाहती है कि दोनों पक्षों की पूरी बात सुनने के बाद ही कोई सही और इंसाफ वाला फैसला लिया जाए।

जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में ही रहना होगा। फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। अदालत का मानना है कि बिना दूसरे पक्ष को सुने कोई फैसला देना ठीक नहीं होगा, क्योंकि इससे न्याय पर सवाल उठ सकते हैं।

कुल मिलाकर, इस सुनवाई में कोर्ट ने साफ कर दिया कि इंसाफ के रास्ते में कोई शॉर्टकट नहीं होता। चाहे कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, अगर जिम्मेदारियाँ नहीं निभाई गईं, तो उसके नतीजे भुगतने ही पड़ते हैं। अब सबकी निगाहें 16 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि राजपाल यादव को राहत मिलती है या नहीं।

कोर्ट की तीखी टिप्पणियाँ: क्यों खींची गईं सुनवाई?

कोर्ट ने अपने फैसले में दो बहुत अहम बातें साफ-साफ कही, जिन पर खास तौर से ध्यान दिया गया।

सबसे पहली बात यह थी कि Rajpal Yadav ने अदालत के सामने जो-जो वादे और भरोसे दिए थे, उन्हें ठीक से निभाया नहीं। उन्होंने कई बार कहा था कि वह धीरे-धीरे करके बकाया पैसा चुका देंगे, मामले को सुलझा लेंगे और समझौता पूरा कर देंगे। लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं पाया। वक्त गुजरता गया, तारीखें बढ़ती गईं, मगर पैसा समय पर नहीं आया। इसी वजह से कोर्ट को लगा कि उनकी बातों और वादों पर अब भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

अदालत ने कहा कि जब कोई इंसान खुद कोर्ट से कुछ वादा करता है, तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह उसे पूरा करे। अगर बार-बार वादा करके भी निभाया न जाए, तो फिर राहत की उम्मीद करना ठीक नहीं है। इसलिए सिर्फ यह कह देना कि घर में शादी है या कोई पारिवारिक मजबूरी है, इसके आधार पर जमानत देना सही नहीं माना जा सकता।

दूसरी बड़ी बात जो कोर्ट ने कही, वह थी कानून की बराबरी। न्यायालय ने बिल्कुल साफ लहजे में कहा कि कानून सबके लिए एक जैसा होता है। कोई बड़ा अभिनेता हो, कोई आम आदमी हो, कोई अमीर हो या गरीब सब पर नियम बराबर लागू होते हैं। किसी की शोहरत, नाम या पहचान देखकर अलग कानून नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर मशहूर इंसान को खास रियायत मिलने लगे, तो फिर आम आदमी के लिए इंसाफ कहाँ बचेगा? इससे पूरी न्याय व्यवस्था कमजोर हो जाएगी और लोगों का भरोसा अदालत से उठ जाएगा।

न्यायाधीश का कहना था कि अदालत का काम किसी के साथ हमदर्दी दिखाना नहीं, बल्कि इंसाफ करना है। अगर हर मामले में भावनाओं के आधार पर फैसले होने लगें, तो कानून का मतलब ही खत्म हो जाएगा।

इसी वजह से कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब तक Rajpal Yadav अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाते और अपने पुराने वादों को पूरा नहीं करते, तब तक उन्हें सिर्फ निजी या पारिवारिक वजहों पर राहत नहीं दी जा सकती।

कुल मिलाकर, अदालत ने यह संदेश दे दिया कि कानून के सामने सब बराबर हैं, और जो अपनी बात का पास नहीं रखता, उसे उसके नतीजे भी भुगतने पड़ते हैं चाहे वह कितना ही बड़ा नाम क्यों न हो।

फिल्म इंडस्ट्री का दखल: समर्थन और आलोचना

Rajpal Yadav का यह मामला अब सिर्फ कोर्ट तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री में इसकी चर्चा होने लगी है। बॉलीवुड के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक लोग इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। कोई उनके हक में बोल रहा है, तो कोई उनसे सवाल भी कर रहा है।

उनके वकील का कहना है कि Rajpal Yadav अब तक करीब ढाई करोड़ रुपये तक चुका चुके हैं और बाकी बची हुई रकम भी देने की नीयत रखते हैं। वकील के मुताबिक, वह जानबूझकर पैसा नहीं रोक रहे हैं, बल्कि हालात और मजबूरियों की वजह से देरी हुई है। उनका कहना है कि राजपाल इस मामले को खत्म करना चाहते हैं और किसी तरह का विवाद आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

इधर, उनके कई फैंस और कुछ फिल्मी सितारे भी उनके समर्थन में सामने आए हैं। उनका कहना है कि Rajpal Yadav एक बेहतरीन कलाकार हैं, जिन्होंने सालों तक लोगों को हँसाया, खुशियाँ दीं और अपने अभिनय से लाखों दिल जीते। ऐसे इंसान के साथ थोड़ी नरमी बरती जानी चाहिए। उनके चाहने वाले दुआ कर रहे हैं कि यह मुश्किल वक्त जल्द खत्म हो और वह फिर से अपनी पुरानी जिंदगी में लौट सकें।

लेकिन दूसरी तरफ, कुछ लोग इस मामले पर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब कोई इंसान इतना बड़ा कलाकार है, इतना नाम और पहचान है, तो फिर इतने बड़े कर्ज को समय पर क्यों नहीं चुकाया गया? पैसा कमाने के बावजूद इतनी बड़ी रकम अटकी कैसे रह गई? ऐसे सवालों पर अब खुलेआम बहस हो रही है। कई लोग मानते हैं कि इस तरह के मामलों पर समाज में चर्चा होना जरूरी है, ताकि आगे कोई ऐसी गलती न दोहराए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है क्या यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक शादी तक सीमित है? क्या सिर्फ यह कह देने से कि घर में शादी है, जमानत मिल जानी चाहिए?

कोर्ट ने इस पर बिल्कुल साफ रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि सिर्फ शादी या किसी निजी खुशी का बहाना बनाकर जमानत देना सही वजह नहीं हो सकता। कानून अपनी जगह है और उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी बताया कि जिस पक्ष का पैसा फंसा हुआ है, यानी शिकायतकर्ता, उसकी बात सुनना भी उतना ही जरूरी है। उसकी दलीलें, उसका दर्द और उसका नुकसान भी मायने रखता है। इसलिए बिना उसकी पूरी बात सुने कोई फैसला देना इंसाफ के खिलाफ होगा।

इसी वजह से अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया, ताकि दोनों पक्ष खुलकर अपनी-अपनी बातें रख सकें। कोर्ट चाहती है कि हर पहलू को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला हो, न कि जल्दबाजी में।

कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ राजपाल यादव की निजी परेशानी नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है, जिस पर पूरी इंडस्ट्री, फैंस और आम लोग नजर रखे हुए हैं। सब यही दुआ कर रहे हैं कि इंसाफ भी हो और इंसानियत भी बनी रहे, ताकि सच सामने आ सके और सही रास्ता निकल सके।

संक्षेप में — आज तक की स्थिति

इस वक्त Rajpal Yadav करीब ₹9 करोड़ के चेक बाउंस मामले की वजह से तिहाड़ जेल में बंद हैं। यह मामला उनकी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल दौर बन चुका है। उन्होंने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई थी और इसमें यह दलील दी थी कि परिवार में शादी है, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए बाहर आने की इजाज़त दी जाए।

लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि राजपाल यादव पहले जो-जो वादे करते रहे हैं, उन्हें ठीक से निभा नहीं पाए। बार-बार समय मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया, इसी वजह से कोर्ट उनके मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

कोर्ट ने फिलहाल कोई आखिरी फैसला नहीं सुनाया और सुनवाई को आगे बढ़ा दिया। अगली तारीख सोमवार, 16 फरवरी 2026 तय की गई है, ताकि दोनों पक्ष यानी Rajpal Yadav और शिकायतकर्ता अपनी-अपनी पूरी बात खुलकर रख सकें। अदालत चाहती है कि बिना जल्दबाजी के, हर पहलू को समझकर ही कोई फैसला लिया जाए।

अब सबकी नजरें सोमवार की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। उस दिन कोर्ट सबसे पहले शिकायतकर्ता की दलीलें सुनेगी। वह बताएगा कि उसे कितना नुकसान हुआ, अब तक क्या-क्या हुआ और वह क्या चाहता है। इसके बाद राजपाल यादव की तरफ से भी फिर से अपनी बात रखी जाएगी।

इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि उन्हें जमानत दी जाए या नहीं। अगर कोर्ट को Rajpal Yadav की दलीलें सही और भरोसेमंद लगीं, और यह लगा कि अब वह अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, तो हो सकता है कि उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत मिल जाए। लेकिन फिलहाल इस बारे में कुछ भी पक्के तौर पर कहना मुश्किल है।

यह मामला इसलिए भी बहुत अहम बन गया है, क्योंकि यह पूरे समाज को एक बड़ा सबक देता है। यह दिखाता है कि चाहे इंसान कितना ही मशहूर क्यों न हो, कितना ही बड़ा कलाकार क्यों न हो अगर वह अपने पैसों और कानूनी जिम्मेदारियों को समय पर पूरा नहीं करता, तो कानून उसके सामने सख्ती से खड़ा हो जाता है।

नाम, शोहरत और पहचान यहां काम नहीं आती। अदालत के सामने हर कोई बराबर होता है। राजपाल यादव का यह मामला यही बताता है कि ज़िंदगी में जिम्मेदारी निभाना कितना जरूरी है, वरना एक दिन इंसान को इसके नतीजे भुगतने ही पड़ते हैं।

अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह कहानी कौन सा मोड़ लेती है राहत का या और मुश्किलों का। उनके चाहने वाले दुआ कर रहे हैं कि उन्हें इंसाफ भी मिले और अपनी गलती सुधारने का एक और मौका भी।

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