Table of Contents
Silver ने बनाया नया रिकॉर्ड, दामों में ज़बरदस्त उछाल
सोमवार को silver price के दामों ने ऐसा उछाल मारा कि बाज़ार में हर तरफ़ इसकी चर्चा होने लगी। चांदी के वायदा भाव में एक ही दिन में 6 फ़ीसदी से ज़्यादा की तेज़ी देखने को मिली और कीमत ₹2 लाख 54 हज़ार 174 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई। यह अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है, यानी चांदी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में आई इस तेज़ बढ़त ने साफ़ कर दिया है कि निवेशकों का भरोसा चांदी पर तेज़ी से बढ़ रहा है। लोग अब चांदी को सिर्फ़ ज़ेवर या औद्योगिक धातु के तौर पर नहीं, बल्कि मजबूत और सुरक्षित निवेश के रूप में देखने लगे हैं। यही वजह है कि बाज़ार में इसकी मांग अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ गई है।
Silver की यह चमक सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी चांदी ने ज़ोरदार छलांग लगाई और इसका भाव 80 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा संकेत है, क्योंकि इससे साफ़ होता है कि दुनिया भर के निवेशक चांदी की तरफ़ रुख कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर silver के दामों का इस तरह उछलना इस बात का इशारा है कि मौजूदा आर्थिक हालात में लोग जोखिम से बचना चाहते हैं और ऐसी चीज़ों में पैसा लगा रहे हैं जिन्हें सुरक्षित माना जाता है। जानकारों की मानें तो जब बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोने के साथ-साथ चांदी भी निवेशकों की पहली पसंद बन जाती है।
कुल मिलाकर, silver की मौजूदा तेज़ी यह दिखाती है कि आने वाले दिनों में भी इस धातु पर सबकी नज़र बनी रह सकती है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो चांदी के दाम और भी नई ऊँचाइयों को छू सकते हैं।
इतनी भारी ख़रीदारी क्यों हो रही है? – Silver में तेज़ी के 4 बड़े कारण
Silver के दामों में जो अचानक इतनी ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिल रही है, वो यूँ ही नहीं आई है। इसके पीछे कई बड़े और अहम कारण एक साथ काम कर रहे हैं। बाज़ार का मिज़ाज बदला है और निवेशक बड़ी तादाद में चांदी की तरफ़ रुख कर रहे हैं। आइए, आसान ज़बान में समझते हैं इसकी वजहें।
फेडरल रिज़र्व से ब्याज़ दर घटने की उम्मीदअमेरिका के केंद्रीय बैंक, यानी फेडरल रिज़र्व, को लेकर बाज़ार में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि आने वाले वक़्त में वह ब्याज़ दरों में कटौती कर सकता है। जैसे ही ब्याज़ दरें घटने की उम्मीद बनती है, वैसे ही शेयर बाज़ार और दूसरे जोखिम भरे निवेश थोड़े फीके लगने लगते हैं।
ऐसे हालात में निवेशक अपना पैसा महफ़ूज़ ठिकानों की तरफ़ ले जाना पसंद करते हैं। चांदी और सोना हमेशा से ऐसे ही सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। यही वजह है कि ब्याज़ दर कटौती की आहट मिलते ही चांदी में निवेश बढ़ने लगा है।

सुरक्षित निवेश की तलाश और ज़बरदस्त निवेशदुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल, कहीं जंग का साया, कहीं देशों के बीच तनातनी और कहीं व्यापार नीतियों में अचानक बदलाव इन सब बातों ने निवेशकों को थोड़ा बेचैन कर दिया है।ऐसे माहौल में लोग जोखिम उठाने से बचते हैं और ऐसी चीज़ों में पैसा लगाना चाहते हैं जो तूफ़ान में भी सहारा बनी रहें।
Silver इसी वजह से “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित पनाहगाह बनकर उभरी है। मौजूदा तेज़ी उसी भरोसे का नतीजा है। सप्लाई की कमी और घटते भंडारचांदी की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन उत्पादन उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ पा रहा। ऊपर से सप्लाई चेन में रुकावटें और खनन से जुड़ी परेशानियाँ हालात को और मुश्किल बना रही हैं।
इससे बाज़ार में यह डर पैदा हो गया है कि आने वाले समय में चांदी की उपलब्धता कम हो सकती है। जब लोगों को कमी का अंदेशा होता है, तो वे पहले से ज़्यादा खरीदारी करने लगते हैं और नतीजा होता है, दामों में तेज़ उछाल। औद्योगिक इस्तेमाल में ज़बरदस्त बढ़ोतरीआज चांदी सिर्फ़ गहनों या निवेश तक सीमित नहीं रही।
इसका 60 फ़ीसदी से ज़्यादा इस्तेमाल उद्योगों में हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसे आधुनिक सेक्टर चांदी पर काफी हद तक निर्भर हैं।जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है और हरित ऊर्जा पर ज़ोर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे चांदी की औद्योगिक मांग भी बढ़ती जा रही है। यही बढ़ती ज़रूरतें भी इसके भावों को ऊपर ले जा रही हैं।
वैश्विक रुझान – $80 प्रति औंस के पार जाना क्यों है बड़ी बात?
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Silver का भाव $80 प्रति औंस से ऊपर निकल जाना एक बहुत बड़ा संकेत है। यह बताता है कि दुनिया भर के निवेशक अब चांदी को लेकर काफ़ी आशावान हैं।इसका मतलब साफ़ है:वैश्विक निवेशकों का भरोसा चांदी पर और मज़बूत हुआ है। सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी की अहमियत बढ़ गई है।

डॉलर के कमजोर होने से डॉलर-आधारित धातुएँ और महँगी नज़र आ रही हैं। सोना और प्लैटिनम के साथ-साथ अब चांदी भी बड़े निवेश पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
यही नहीं, कुछ रिपोर्ट्स में तो यह भी कहा जा रहा है कि चांदी का भाव $82 प्रति औंस तक पहुँच चुका है, जो इस बात का इशारा करता है कि मौजूदा तेज़ी अभी थमी नहीं है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो चांदी आने वाले दिनों में और भी नए रिकॉर्ड बना सकती है।
क्या गिरावट भी देखने को मिली? – बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी
हालांकि Silver ने एक दिन के लिए $80 प्रति औंस का अहम स्तर पार कर लिया, लेकिन इसके बाद बाज़ार में थोड़ा ठहराव भी देखने को मिला। जैसे ही दाम इस ऊँचाई पर पहुँचे, कुछ निवेशकों ने मुनाफ़ा सुरक्षित करने के लिए अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी।
इस मुनाफ़ा वसूली का असर यह हुआ कि चांदी के भाव में हल्की गिरावट आई और कीमतें थोड़ी देर के लिए लगभग $75.40 प्रति औंस तक फिसल गईं। यह बताता है कि भले ही चांदी रिकॉर्ड ऊँचाइयों पर हो, लेकिन बाज़ार पूरी तरह शांत नहीं है।इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ़ हो जाती है कि चांदी में तेज़ी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव भी बना हुआ है।
यानी दाम ऊपर जा सकते हैं, लेकिन बीच-बीच में गिरावट का दौर भी आ सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है।निवेशकों के लिए क्या सलाह है?चांदी में मौजूदा हालात को देखते हुए जानकार निवेशकों को जल्दबाज़ी के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिएअगर आप चांदी में लंबे समय के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इसके मजबूत औद्योगिक इस्तेमाल और “सुरक्षित ठिकाने” वाली खासियतें आने वाले वक़्त में फ़ायदेमंद साबित हो सकती हैं। टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के बढ़ते इस्तेमाल से चांदी की मांग लंबे समय तक बनी रह सकती है।
अल्पकालिक ट्रेडर्स के लिएजो लोग शॉर्ट-टर्म या कम समय के लिए ट्रेडिंग करते हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। चांदी के दामों में जिस तरह तेज़ उछाल आ रहा है, उसी तरह अचानक गिरावट भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सही टाइमिंग और सतर्कता बहुत ज़रूरी है।
जोखिम को समझना ज़रूरी बाज़ार में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है। इसलिए निवेश सिर्फ़ इस वजह से न करें कि दाम रिकॉर्ड पर हैं। बेहतर यही होगा कि बाज़ार के संकेत, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के मक़सद को समझकर ही फ़ैसला लिया जाए।
सोना भी रैली में – Silver अकेली नहीं चमक रही
Silver की तेज़ी के साथ-साथ सोना भी पूरे जोश में नज़र आ रहा है। भारत में सोने के दाम भी लगातार नई ऊँचाइयों की तरफ़ बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि निवेशक अनिश्चित माहौल में अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की तरफ़ रुख कर रहे हैं।इस पूरे रुझान से यह साफ़ संकेत मिलता है कि पूरे प्रेशियस मेटल सेगमेंट में बड़े खिलाड़ी सक्रिय हो चुके हैं।
सिर्फ़ आम निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़े संस्थागत निवेशक भी सोना और चांदी दोनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।कुल मिलाकर, बाज़ार का मिज़ाज बता रहा है कि कीमती धातुओं की चमक अभी बरकरार रह सकती है, लेकिन समझदारी इसी में है कि हर क़दम सोच-समझकर उठाया जाए।
क्या आने वाले दिनों में Silver और तेज़ी दिखा सकती है?
बाज़ार के जानकारों और विश्लेषकों की मानें तो Silver की मौजूदा रफ़्तार अभी थमी नहीं है। उनका कहना है कि अगर कुछ हालात इसी तरह बने रहते हैं, तो चांदी के दाम आने वाले वक़्त में और ऊपर जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों में कटौती करता है, मांग और आपूर्ति के बीच का फर्क और गहरा होता है, और दुनिया भर में चल रहा तनाव और अनिश्चितता बनी रहती है,तो चांदी की कीमतें नई ऊँचाइयों की तरफ़ बढ़ सकती हैं। कुछ जानकार तो यहाँ तक कह रहे हैं कि अगर हालात पूरी तरह चांदी के हक़ में रहे, तो इसका भाव ₹3 लाख प्रति किलो के आसपास भी पहुँच सकता है।
हालाँकि, विशेषज्ञ यह भी साफ़ करते हैं कि यह कोई पक्की बात नहीं है। चांदी का भाव पूरी तरह से बाज़ार की धारणा, वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों के भरोसे पर टिका होता है। ज़रा-सी ख़बर या नीतियों में बदलाव से दामों की दिशा बदल सकती है।
Silver की चमक, लेकिन सतर्कता ज़रूरी
कुल मिलाकर, Silver ने इस बार सचमुच इतिहास रच दिया है।इसने ₹2.54 लाख प्रति किलो का स्तर पार किया और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में $80 प्रति औंस के ऊपर पहुँचकर सबको चौंका दिया।मौजूदा तेज़ी के पीछे कई वजहें हैं —कहीं ब्याज़ दरों में कटौती की उम्मीद,कहीं सप्लाई और डिमांड का बिगड़ा संतुलन,कहीं निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी,और कहीं अनिश्चित माहौल में चांदी का सुरक्षित सहारा बन जाना।
इसके बावजूद, एक बात याद रखना बेहद ज़रूरी है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव अभी भी जारी है। दाम जितनी तेज़ी से ऊपर जाते हैं, उतनी ही तेज़ी से नीचे भी आ सकते हैं। इसलिए निवेशकों को जोश में आकर नहीं, बल्कि समझदारी और सब्र के साथ फ़ैसले लेने चाहिए।
इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि इस वक़्त पूरा कीमती धातुओं का बाज़ार रफ्तार में है। सोना और चांदी, दोनों ही मज़बूती दिखा रहे हैं और बड़े निवेशकों की नज़र इन पर टिकी हुई है।अंत में यही कहा जाएगा कि चांदी की चमक तो बरक़रार है, लेकिन इस चमक के साथ होश और एहतियात भी ज़रूरी है।
यह भी पढ़ें –





