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Big Relief: Strait of Hormuz संकट के बीच भारत को मिला Safe Passage, Jaishankar की कूटनीति हुई Successful

Big Relief: Strait of Hormuz संकट के बीच भारत को मिला Safe Passage, Jaishankar की कूटनीति हुई Successful

Strait of Hormuz पर स्थिति क्यों तनावपूर्ण थी?

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और जंग जैसे हालात की वजह से दुनिया के सबसे अहम समुंद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz की हिफाज़त पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। यह वही अहम रास्ता है जहाँ से पूरी दुनिया के करीब 20–30% oil और gas की सप्लाई गुजरती है। ऐसे में अगर यहाँ कोई भी परेशानी पैदा होती है तो उसका असर सीधे ग्लोबल व्यापार और energy supply पर पड़ता है।

पिछले कुछ दिनों में इस इलाके में हालात काफी खराब हो गए थे। अलग-अलग जगहों पर oil tankers और commercial ships पर हमलों की खबरें सामने आईं। इन हमलों के कारण कई जहाज़ों को अपना रास्ता बदलना पड़ा और कुछ समय के लिए समुद्री आवाजाही लगभग ठप सी हो गई। जहाज़ चलाने वाली कंपनियाँ और उनके मालिक अपने crew members की safety को लेकर बेहद फिक्रमंद हो गए थे, इसलिए कई ships को रोक दिया गया या दूसरे रास्तों से भेजा गया।

लेकिन इसी बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई। Iran ने भारत के जहाज़ों को इस रास्ते से गुजरने की इजाज़त दे दी है। यानी अब Indian-flag oil tankers को Strait of Hormuz से सुरक्षित तरीके से गुजरने दिया जाएगा। इस फैसले को भारत की कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह अहम फैसला तब हुआ जब भारत के विदेश मंत्री Dr. S. Jaishankar ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से सीधे बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस diplomatic बातचीत के बाद ही Iran ने भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देने का फैसला किया।

दरअसल इस वक्त Strait of Hormuz का इलाका किसी जंग के मैदान से कम नजर नहीं आ रहा। America, Israel और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे इलाके को बेहद संवेदनशील बना दिया है। समुद्री रास्तों की सुरक्षा इस टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ जहाज़ों पर missile और projectile से हमला भी किया गया। इन हमलों ने दुनिया भर की shipping companies की चिंता और बढ़ा दी। हाल ही में एक Thai cargo ship पर भी जोरदार हमला हुआ था, जिसके बाद जहाज़ में आग लग गई। हालांकि बाद में जहाज़ पर मौजूद crew को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

इधर Iran Revolutionary Guard ने भी सख्त चेतावनी दी है कि उनकी इजाज़त के बिना कोई भी जहाज़ इस इलाके से गुजरने की कोशिश न करे। इस ऐलान के बाद कई देशों की shipping companies और भी ज्यादा सतर्क हो गईं।

इन तमाम घटनाओं के कारण कुछ समय के लिए समुद्री व्यापार लगभग ठहर सा गया था। जहाज़ों के मालिक अपने crew की जान को खतरे में डालना नहीं चाहते थे, इसलिए कई ships को रोक दिया गया या सुरक्षित रास्ते का इंतजार किया जाने लगा।

ऐसे मुश्किल हालात में भारत के लिए यह खबर काफी राहत देने वाली मानी जा रही है कि Iran ने भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित passage देने का भरोसा दिलाया है। इससे न सिर्फ भारत की oil supply को राहत मिलेगी बल्कि global trade के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत को सुरक्षित मार्ग कैसे मिला?

भारत के विदेश मंत्री डॉ. Jaishankar ने हालात की नज़ाकत को देखते हुए ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर सीधी बात की। इस बातचीत को एक तरह से अहम diplomatic dialogue माना जा रहा है। बातचीत के दौरान जयशंकर ने बड़ी साफगोई और नरमी के साथ भारत का पक्ष सामने रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव और टकराव के बावजूद कुछ बुनियादी बातें बहुत ज़रूरी हैं जिनका ख़याल रखा जाना चाहिए।

सबसे पहले उन्होंने यह बात रखी कि भारत के oil tankers और जहाज़ों की हिफ़ाज़त बेहद अहम है, क्योंकि इन जहाज़ों के ज़रिये ही भारत तक तेल और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई पहुंचती है। अगर इन जहाज़ों को खतरा होगा तो इसका असर सीधे भारत की energy supply और व्यापार पर पड़ेगा।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समुंद्री कारोबार यानी maritime trade को किसी भी हालत में पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था इन समुद्री रास्तों पर टिकी हुई है, इसलिए इन रास्तों का खुला रहना बहुत ज़रूरी है।

जयशंकर ने यह भी वाज़ेह किया कि चाहे इलाके में कितना भी तनाव क्यों न हो, लेकिन Strait of Hormuz जैसे अहम जलमार्ग को पूरी तरह बंद करना किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होगा। बेहतर यही है कि इस रास्ते को खुला रखा जाए ताकि जहाज़ सुरक्षित तरीके से अपनी मंज़िल तक पहुँच सकें।

बताया जाता है कि इस बातचीत का अच्छा असर हुआ और दोनों देशों के बीच समझदारी का माहौल बना। इसी के बाद Iran ने भारत को खास इजाज़त देते हुए भारतीय झंडे वाले जहाज़ों को Strait of Hormuz से गुजरने की मंजूरी दे दी।

खास तौर पर भारत के दो बड़े oil tankers — Pushpak और Parimal — को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई। अच्छी खबर यह है कि ये दोनों जहाज़ अब बिना किसी परेशानी के उस इलाके से निकल भी चुके हैं और पूरी तरह महफूज़ बताए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो मौजूदा तनाव भरे माहौल में यह एक राहत भरी खबर है। भारत की समझदारी भरी कूटनीति और बातचीत की वजह से न सिर्फ जहाज़ों की हिफ़ाज़त मुमकिन हुई, बल्कि यह भी साफ हो गया कि मुश्किल हालात में भी dialogue और diplomacy के ज़रिये रास्ते निकाले जा सकते हैं।

यह भारत के लिए क्यों बड़ी जीत है?

भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी बेहद अहम और राहत देने वाला माना जा रहा है, क्योंकि देश की energy security काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर करती है। दरअसल भारत का करीब 40% crude oil और gas इसी समुद्री रास्ते, यानी Strait of Hormuz, के ज़रिये देश तक पहुँचता है। ऐसे में अगर किसी वजह से यह रास्ता बंद हो जाता या जहाज़ों की आवाजाही रुक जाती, तो भारत के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती थी।

अगर यह जलमार्ग बंद हो जाता तो देश को energy crisis जैसी सूरत का सामना करना पड़ सकता था। तेल की सप्लाई कम होने लगती, जिससे oil prices में तेज़ उछाल आता और इसका असर आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक महसूस होता। पेट्रोल, डीज़ल और गैस की कीमतें बढ़ने से पूरे मुल्क की economy पर दबाव बढ़ जाता।

इतना ही नहीं, इस रास्ते के बंद होने से भारत के export-import trade पर भी असर पड़ता। कई ज़रूरी सामान और कच्चा माल इसी समुद्री रास्ते से आता-जाता है। अगर जहाज़ों की आवाजाही में रुकावट आती, तो व्यापार की लागत बढ़ जाती और सप्लाई चेन में भी दिक्कतें पैदा हो सकती थीं।

लेकिन अब जब Iran ने भारत को खास इजाज़त देते हुए उसके जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिया है, तो हालात कुछ बेहतर नज़र आ रहे हैं। इससे भारतीय oil tankers और commercial ships के मालिकों को भी कुछ सुकून मिला है।

अब जहाज़ चलाने वाली कंपनियाँ पहले की तुलना में कम खतरे के साथ अपना काम जारी रख सकेंगी। यानी भारतीय जहाज़ों के लिए समुंदर का यह अहम रास्ता फिलहाल खुला रहेगा, जिससे देश की oil supply और व्यापारिक गतिविधियाँ भी ज्यादा आसानी से चलती रहेंगी।

वैश्विक परिदृश्य

दुनिया भर की economy पर इन दिनों तेल की कीमतों का असर साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और टकराव की वजह से पहले ही oil prices में तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है। कई देशों की तरफ से यह तक कहा गया है कि अगर हालात और बिगड़े तो इस अहम समुद्री रास्ते को बंद भी किया जा सकता है या फिर यहाँ से गुजरना और भी ज्यादा ख़तरनाक हो सकता है।

असल में Strait of Hormuz सिर्फ एक साधारण समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि कई बड़े देशों की energy supply के लिए किसी जीवनरेखा से कम नहीं है। भारत, चीन और यूरोप जैसे बड़े देश अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से हासिल करते हैं। ऐसे में अगर कभी यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए, तो ज़रा सोचिए दुनिया भर में oil prices कहाँ तक पहुँच सकती हैं। इसका असर सिर्फ पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक economy हिल सकती है।

इसी नाज़ुक हालात को देखते हुए भारत ने सिर्फ एक बयान देकर या एक संदेश भेजकर अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं की। भारत ने पूरे मामले को समझदारी और दूरअंदेशी के साथ संभालने की कोशिश की। दरअसल भारत की रणनीति सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया।

सबसे पहले बात करें diplomacy की। भारत ने ईरान से खुलकर और साफगोई के साथ बातचीत की। भारत ने अपनी चिंताओं को बड़े सलीके से सामने रखा और यह बताया कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा और व्यापार की निरंतरता कितनी अहम है।

इसके साथ ही भारत ने maritime security यानी समुद्री सुरक्षा को भी बराबर तवज्जो दी। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उसके जहाज़ बिना किसी बड़े खतरे के इस रास्ते से गुजर सकें। जहाज़ों की सुरक्षा और उनके रास्ते को सुरक्षित बनाए रखना इस पूरी रणनीति का अहम हिस्सा रहा।

इसके अलावा भारत सिर्फ एक ही रास्ते पर निर्भर रहने की गलती नहीं कर रहा। सरकार लगातार दूसरे देशों से भी energy supply के विकल्प तलाश रही है। मसलन Russia और UAE जैसे देशों से भी तेल और गैस की आपूर्ति के नए रास्ते और समझौते तलाशे जा रहे हैं, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश की ऊर्जा ज़रूरतों पर ज्यादा असर न पड़े।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि विदेश मंत्रालय और भारत सरकार ने इस पूरे मसले को बड़ी समझदारी और सटीक रणनीति के साथ संभाला। यही वजह है कि मुश्किल हालात के बावजूद भारत अपने जहाज़ों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में कामयाब होता नजर आ रहा है।

क्या यह स्थायी समाधान है?

फिलहाल देखा जाए तो यह पूरी तरह से स्थायी हल नहीं बल्कि एक तरह का आंशिक समाधान ही माना जा रहा है। वजह साफ है कि इलाके में तनाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है। संघर्ष और टकराव अब भी जारी है और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते। कई जहाज़ अभी भी उसी खतरे भरे माहौल में सफर कर रहे हैं, जहाँ कभी भी कोई नई घटना सामने आ सकती है।

इसके अलावा पूरी दुनिया की oil supply भी अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही। अगर हालात अचानक बिगड़ते हैं या संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सीधे global energy market पर पड़ सकता है। इसलिए फिलहाल हालात को लेकर पूरी दुनिया की नज़रें इस इलाके पर टिकी हुई हैं।

लेकिन इन सबके बीच भारत के लिए एक अहम बात यह है कि उसे अलग से इस रास्ते से गुजरने की इजाज़त मिल गई है। यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि मुश्किल और तनाव भरे हालात में भी diplomacy और dialogue यानी कूटनीति और बातचीत का रास्ता बड़ा असरदार साबित हो सकता है। जब देशों के बीच सीधे संवाद होता है, तो कई बार ऐसे रास्ते निकल आते हैं जो टकराव को थोड़ा कम कर देते हैं।

दरअसल आज जो खबर सामने आई है, वह सिर्फ एक साधारण news update भर नहीं है। इसे भारत की कूटनीतिक कामयाबी और उसकी energy security strategy की एक बड़ी मिसाल के तौर पर भी देखा जा रहा है। जिस वक्त दुनिया के कई देश Strait of Hormuz को लेकर चिंता में डूबे हुए थे और समुद्री व्यापार पर खतरा मंडरा रहा था, उस वक्त भारत ने समझदारी, बातचीत और दूरअंदेशी के साथ अपने हितों को सुरक्षित करने की कोशिश की।

भारत ने यह दिखा दिया कि मुश्किल हालात में भी अगर समझदारी से काम लिया जाए, तो देश अपने strategic interests की हिफाज़त कर सकता है। आगे चलकर यही सोच और यही रणनीति भारत की global energy policy, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी मजबूत भूमिका की एक अहम मिसाल बन सकती है।

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