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Big Move! Abhinav Panday ने आखिर क्यों छोड़ा Lallantop? Abhinav का Lallantop में अब तक की Journey

Big Move! Abhinav Panday ने आखिर क्यों छोड़ा Lallantop ? Abhinav का Lallantop में अब तक की Journey

Abhinav Panday का Lallantop से इस्तीफ़ा

पत्रकारिता की दुनिया में जब भी कोई बड़ा नाम या मशहूर चेहरा अचानक से नई राह चुनता है, तो चर्चा होना बिल्कुल तय है। अभी हाल ही में ऐसा ही हुआ, जब जाने-माने युवा पत्रकार Abhinav Panday ने लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म द Lallantop को अलविदा कह दिया।

अभिनव पांडेय पिछले लगभग तीन सालों से लल्लनटॉप से जुड़े हुए थे और वहाँ उन्होंने बतौर एसोसिएट एडिटर काम करते हुए कई ऐसी अहम और असरदार कहानियाँ लोगों तक पहुँचाईं, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया। उनकी खासियत यही रही कि वो मुद्दों को सीधे और साफ तरीके से रखते थे।

लेकिन अब उनका इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक नौकरी छोड़ने भर का मामला नहीं माना जा रहा। इसे पत्रकारिता की दुनिया में एक नई शुरुआत और नई उड़ान के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि जब कोई पत्रकार अपने लिए नई राह चुनता है, तो उसके पीछे सिर्फ़ करियर का फ़ैसला नहीं होता, बल्कि उसमें आगे कुछ नया और बड़ा करने की चाह भी छुपी होती है।

Abhinav Panday ने सोशल मीडिया पर कहा अलविदा

अभिनव पांडेय ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा बड़े ही भावुक अंदाज़ में सोशल मीडिया (X) पर की। उन्होंने लिखा—“अलविदा Lallantop… इन रंगों को समेटे हुए अब नए रंग भरने निकल पड़ा हूँ. शुक्रिया संस्थान, अब कुछ नया करने का वक़्त है…”यह एक छोटा-सा मैसेज था, लेकिन इसमें बहुत कुछ छिपा था। यह साफ इशारा था कि वे अब नई मीडिया यात्रा शुरू करने वाले हैं।

नई मंज़िल कहाँ है?

खबरों से जो सबसे बड़ी बात सामने आ रही है, वो यह है कि अभिनव पांडेय अब अपना खुद का नया मीडिया प्लेटफ़ॉर्म शुरू करने जा रहे हैं। यह कोई साधारण-सा कदम नहीं है, बल्कि पत्रकारिता की दुनिया में उनके लिए एक बड़ा और अहम मोड़ है।

ये प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ एक यूट्यूब चैनल तक ही सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि इसके साथ-साथ वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी लाया जाएगा। इसका सीधा मतलब ये है कि अब वो पूरी तरह से डिजिटल पत्रकारिता में अपनी अलग और स्वतंत्र पहचान बनाने जा रहे हैं।

इस नई शुरुआत का आग़ाज़ उन्होंने एक बेहद खास दिन के लिए चुना है—15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस। यह तारीख अपने आप में बहुत मायने रखती है। जिस दिन पूरा देश आज़ादी का जश्न मनाता है, उसी दिन एक पत्रकार अपनी स्वतंत्र आवाज़ के साथ नया सफ़र शुरू कर रहा है। यह सिर्फ़ संयोग नहीं बल्कि एक गहरा प्रतीक भी है—आजादी के दिन एक नई स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की उड़ान।

क्यों हो रहा है Abhinav Panday के इस्तीफे पर इतना शोर?

अभिनव पांडेय कोई आम पत्रकार नहीं हैं। द लल्लनटॉप में रहते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। शुरू में भले ही लोग उन्हें कम जानते हों, लेकिन समय के साथ वो वहां के बड़े चेहरों में शामिल हो गए। यहां तक कि कई लोग उन्हें सौरभ द्विवेदी के बाद लल्लनटॉप का सबसे मज़बूत स्तंभ मानने लगे थे।

उनकी सबसे ज़्यादा चर्चा तब हुई जब उन्होंने महाकुंभ कवरेज किया। उस दौरान उनकी रिपोर्टिंग इतनी दमदार रही कि हर तरफ उनकी तारीफ हुई। उनकी खासियत थी कि वो सीधी, सरल और असरदार भाषा में बातें करते थे। आम लोग उनकी बातों से तुरंत जुड़ जाते थे। वो रिपोर्टिंग करते वक्त मुश्किल बातों को भी आसान लफ़्ज़ों में समझा देते थे, जिससे दर्शकों को लगता था कि मानो कोई अपना ही उनसे बात कर रहा हो।

यही वजह है कि जब अचानक उनके इस्तीफ़े की खबर आई, तो सबका ध्यान उनकी तरफ खिंच गया। लोगों के लिए ये चौंकाने वाली खबर थी, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ वहां अपना बड़ा नाम बनाया था, बल्कि दर्शकों से एक गहरा रिश्ता भी जोड़ लिया था।

Abhinav Panday के इस्तीफे की असल वजह

जहाँ एक तरफ़ अभिनव पांडेय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बिल्कुल पॉज़िटिव अंदाज़ अपनाया और बस इतनी ही बात कही कि अब वो एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मीडिया के गलियारों में तरह-तरह की बातें चल रही हैं।

कहा जा रहा है कि लल्लनटॉप के अंदर ही पावर स्ट्रगल यानी सत्ता संघर्ष चल रहा था। कुछ बड़े मुद्दों पर एडिटोरियल टीम के अंदर मतभेद थे। माना जा रहा है कि इन्हीं वजहों से अभिनव ने अलग राह चुनने का फैसला किया।

हालाँकि, इस पूरे मामले पर खुद अभिनव पांडेय ने अभी तक कोई साफ बयान नहीं दिया है। उन्होंने ना तो किसी विवाद का ज़िक्र किया और ना ही किसी पर उंगली उठाई। बस उन्होंने अपनी नई शुरुआत को ही सबके सामने रखा।

यानी सच क्या है—क्या वाकई अंदरूनी मतभेद की वजह से उन्होंने ये कदम उठाया या फिर सिर्फ़ अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए—ये अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

Lallantop और Abhinav Panday का रिश्ता

जब भी हम लल्लनटॉप का नाम लेते हैं, तो सबसे पहले दिमाग़ में सौरभ द्विवेदी का नाम आता है। लेकिन वक्त के साथ-साथ अभिनव पांडेय भी इस प्लेटफ़ॉर्म का उतना ही अहम हिस्सा बन गए।

उनकी रिपोर्टिंग का अंदाज़ बिल्कुल अलग था। वो सिर्फ न्यूज़ नहीं सुनाते थे, बल्कि न्यूज़ को ज़मीन से जोड़कर, आसान और समझने लायक भाषा में लोगों तक पहुँचाते थे। यही वजह थी कि दर्शक उनसे जल्दी जुड़ जाते थे।

चाहे महाकुंभ का कवरेज हो, कोई बड़ा इवेंट हो या फिर ग्राउंड रिपोर्ट—अभिनव की रिपोर्टिंग में एक अलग ही बात होती थी। उनकी बातों में वो सीधापन और असर था, जो हर किसी के बस की बात नहीं होती।

उनका यही अंदाज़ उन्हें बाकी पत्रकारों से अलग करता था। लोग उनकी रिपोर्टिंग में न सिर्फ़ ख़बर देखते थे, बल्कि उस ख़बर का असली रंग और अहसास भी महसूस कर पाते थे।

शायद यही वजह है कि आज जब उन्होंने लल्लनटॉप को अलविदा कहा, तो इसे सिर्फ़ “एक कर्मचारी का इस्तीफ़ा” नहीं माना जा रहा। बल्कि इसे लल्लनटॉप के लिए एक बड़ा झटका समझा जा रहा है।

Abhinav Panday के नए सफर की शुरुआत

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभिनव पांडेय की नई पारी कैसी होगी?
क्या वो सिर्फ़ न्यूज़ बेस्ड कंटेंट बनाएँगे या फिर उसमें थोड़ा एंटरटेनमेंट और स्टोरीटेलिंग का तड़का भी होगा?
क्या वो अपना वही पुराना अंदाज़—यानी सीधी-सादी और असरदार रिपोर्टिंग—को आगे बढ़ाएँगे, या फिर एकदम से कोई नई दिशा पकड़ेंगे?

ये सारे सवाल अभी लोगों के मन में घूम रहे हैं। दर्शक भी उत्सुक हैं कि आखिरकार उनका नया प्लेटफ़ॉर्म किस रूप में सामने आएगा।

एक चीज़ तो साफ है—उनका ये कदम मीडिया इंडस्ट्री में हलचल जरूर मचाने वाला है। क्योंकि जब कोई बड़ा और जाना-पहचाना चेहरा खुद का रास्ता चुनता है, तो लोग उसे देखना चाहते हैं, सुनना चाहते हैं और उसके काम को समझना चाहते हैं।

इसलिए आने वाले समय में ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अभिनव किस तरह का कंटेंट क्रिएट करते हैं और दर्शकों से कैसे जुड़ते हैं। लेकिन इतना तय है कि उनकी ये नई शुरुआत मीडिया की दुनिया में एक नई ऊर्जा और नई बहस जरूर लेकर आएगी।

पत्रकारिता एक चुनौती भरा काम

आज के समय में पत्रकारिता करना बिल्कुल आसान काम नहीं रह गया है।एक तरफ़ न्यूज़ चैनलों पर टीआरपी का दबाव है—हर शो, हर खबर को ऐसे पेश करना पड़ता है कि लोग टीवी से न हटें।

दूसरी तरफ़ डिजिटल मीडिया की दुनिया में व्यूज़ और वायरलिटी का दबाव है—कौन-सा वीडियो कितने लाख या करोड़ लोगों तक पहुँचा, किसने कितने लाइक्स और शेयर पाए, इसी में पूरी मेहनत का हिसाब हो जाता है।

ऐसे माहौल में निष्पक्ष रहकर और असरदार पत्रकारिता करना वाकई बड़ी चुनौती है। दर्शकों तक सच्चाई पहुँचाना और साथ ही उन्हें जोड़कर रखना आसान नहीं। शायद यही वजह रही कि अभिनव पांडेय ने अब अपना अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला लिया।

उन्होंने सोचा कि अब वक्त आ गया है कि एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाया जाए जहाँ न किसी टीआरपी का दबाव हो, न ही व्यूज़ की अंधी दौड़। वहाँ वो अपनी सोच, अपनी स्टाइल और अपने अंदाज़ में पत्रकारिता कर पाएँ।

यानी, ये इस्तीफ़ा सिर्फ़ नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने की शुरुआत है।

दर्शकों की Abhinav Pandey से उम्मीदें

दर्शकों के लिए अभिनव पांडेय सिर्फ़ एक पत्रकार भर नहीं थे, बल्कि एक भरोसेमंद और सच्ची आवाज़ थे। जब वे स्क्रीन पर आते थे, तो लोग यह मानकर सुनते थे कि जो कह रहे हैं, वह दिल से और सच के साथ कह रहे हैं। यही वजह है कि उनका लल्लनटॉप वाला सफ़र धीरे-धीरे दर्शकों की यादों में बस गया।

अब जब उन्होंने अपनी राह अलग कर ली है, तो लोगों की उम्मीदें पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।
सबके मन में सवाल है कि उनका नया चैनल कैसा होगा?
क्या यह सिर्फ न्यूज़ पर आधारित होगा या फिर इसमें कहानियों और एंटरटेनमेंट का भी तड़का होगा?
क्या यहाँ भी वही ज़मीन से जुड़ी पत्रकारिता दिखेगी जो उन्हें खास बनाती थी, या फिर इस बार बिल्कुल नए अंदाज़ में सामने आएँगे?

दर्शक यही सोच रहे हैं कि क्या उनका नया प्लेटफ़ॉर्म भी उतना ही असरदार और दमदार साबित होगा, जैसा उनका लल्लनटॉप का सफ़र रहा था।
एक तरह से देखा जाए तो अब लोग सिर्फ़ पत्रकार अभिनव को नहीं, बल्कि क्रिएटर अभिनव को देखने के लिए उत्साहित हैं।

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