Table of Contents
Zelensky का बड़ा बयान: “शांति योजना लगभग 90% तैयार”
Ukraine के राष्ट्रपति वोलोदिमिर Zelensky ने शुक्रवार को बड़े साफ़ और सीधे लहजे में कहा कि Ukraine और Russia के बीच चल रही जंग को खत्म करने के लिए जो 20-बिंदुओं वाली शांति योजना बनाई जा रही है, वो अब लगभग 90 फ़ीसदी तक तैयार हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि यह योजना अब सिर्फ काग़ज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अमल में लाने की दिशा में काफ़ी आगे बढ़ा दिया गया है। अब बस आख़िरी दौर की कोशिशें चल रही हैं, ताकि इसे पूरी तरह मुकम्मल किया जा सके।
Zelensky ने कहा, “हमारी पूरी कोशिश यही है कि यह योजना सौ फ़ीसदी पूरी हो जाए। रास्ता आसान नहीं है, कई मुश्किलें हैं, लेकिन हर मुलाक़ात, हर बातचीत और हर बैठक के साथ हम अपने मक़सद के और क़रीब पहुँचते जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी इशारा किया कि बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है और तमाम देशों से सलाह-मशविरा हो रहा है, ताकि ऐसी कोई राह निकाली जा सके जिससे जंग रुक सके और लोगों को राहत मिल सके।
सीधी और बोलचाल वाली ज़ुबान में कहें तो जेलेंस्की का कहना यही है कि शांति अब दूर नहीं है, बस थोड़ी और मेहनत, थोड़ा और सब्र और कुछ अहम फैसलों की ज़रूरत बाकी है। यूक्रेन की तरफ़ से यह साफ़ संदेश है कि वो जंग नहीं, अमन चाहते हैं और इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
ट्रम्प से रविवार को Zelensky की निर्णय-वार्ता
Zelensky ने यह भी बताया कि रविवार, 28 दिसंबर 2025 को उनकी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात होने वाली है। यह अहम बैठक फ़्लोरिडा के Mar-a-Lago में होगी, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुलाक़ात में शांति योजना से जुड़े बचे हुए आख़िरी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। बातचीत का मक़सद सिर्फ़ जंग रोकना ही नहीं, बल्कि आगे की तस्वीर साफ़ करना भी है जैसे यूक्रेन की सुरक्षा कैसे तय होगी, जंग से तबाह हुए इलाक़ों का पुनर्निर्माण किस तरह किया जाएगा, और युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का रास्ता क्या होगा।
सीधी और आम बोलचाल की ज़ुबान में कहें तो यह बैठक इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका इस पूरे मामले में बड़ी सियासी और कूटनीतिक ताक़त रखता है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रम्प से होने वाली यह मुलाक़ात शांति प्रस्ताव की दिशा और दशा तय करने में अहम रोल निभा सकती है।
Zelensky का साफ़ इशारा है कि अगर अमेरिका का मजबूत समर्थन मिला, तो अमन की राह और आसान हो सकती है, और यूक्रेन-रूस जंग को खत्म करने की कोशिशें एक ठोस नतीजे तक पहुँच सकती हैं।
शांति योजना के मुख्य विषय (संभावित मसले)
हालाँकि अभी तक पूरी 20-बिंदुओं वाली शांति योजना को खुले तौर पर सामने नहीं लाया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारों की मानें तो इसमें कुछ बेहद अहम मसलों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
सबसे पहला और ज़रूरी मुद्दा जंग को रोकने का है। यानी लड़ाई को किसी भी सूरत में थामना और ऐसा स्थायी संघर्ष विराम तय करना, जिससे आगे किसी की जान न जाए और और ज्यादा तबाही से बचा जा सके। आम ज़ुबान में कहें तो मक़सद यही है कि गोलियाँ और बम दोनों खामोश हो जाएँ।
इसके बाद आता है इलाक़ों के नियंत्रण का मसला, जो सबसे ज़्यादा पेचीदा और विवादित माना जा रहा है। खास तौर पर डोनेट्स्क और लुहांस्क जैसे इलाक़ों पर किसका अधिकार होगा, इसे लेकर साफ़ नियम बनाने की बात हो रही है। यही वो मुद्दा है जिस पर सबसे ज़्यादा तकरार रही है और जिस पर सहमति बनाना आसान नहीं है।

एक और बड़ा मुद्दा है यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी। शांति योजना में यह सुझाया गया है कि यूक्रेन को ऐसी मज़बूत सुरक्षा यक़ीनन दी जाए, ताकि आने वाले वक़्त में कोई भी देश उस पर फिर से हमला करने की हिम्मत न कर सके। मतलब यह कि जंग खत्म होने के बाद भी यूक्रेन खुद को महफूज़ महसूस कर सके।
इसके साथ-साथ जंग से तबाह हुए इलाक़ों के दोबारा निर्माण पर भी बात हो रही है। मक़सद है कि जो शहर और गाँव बर्बाद हो चुके हैं, उन्हें फिर से बसाया जाए, लोगों को रोज़गार मिले और आर्थिक मदद के ज़रिए ज़िंदगी पटरी पर लौट सके।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि शांति के बाद राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से ज़िंदा करने की योजना है। इसके तहत स्थानीय चुनाव कराए जाने और लोगों को अपने नेता चुनने का हक़ लौटाने पर भी बातचीत चल रही है।
इन तमाम मुद्दों पर यूक्रेन और अमेरिका के बीच तो चर्चा हो ही रही है, साथ ही यूरोपीय देशों और दूसरे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी सलाह-मशविरा किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर सभी पक्ष किसी न किसी तरह की सहमति पर पहुँचते हैं, तो यह योजना जंग के बाद अमन और स्थिरता की एक मजबूत बुनियाद बन सकती है।
दुनिया की प्रतिक्रियाएँ और आशंकाएँ
रूस का रुख़
जहाँ एक तरफ़ शांति की कोशिशें तेज़ हो रही हैं, वहीं रूस ने अब तक इस प्रस्ताव को लेकर कोई खुलकर सकारात्मक संकेत नहीं दिए हैं। मॉस्को की तरफ़ से वही पुरानी बातें दोहराई जा रही हैं। रूस अब भी डोनेट्स्क जैसे इलाक़ों पर अपना नियंत्रण और अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को अहम बता रहा है। इससे साफ़ है कि मामला इतना आसान नहीं है और जंग को खत्म करने की राह में अभी भी कई अड़चनें और मुश्किलें बनी हुई हैं।
यूरोप की कोशिशें
यूक्रेन चाहता है कि इस शांति बातचीत में यूरोपीय देशों की भी मजबूत हिस्सेदारी हो, ताकि यह समझौता सिर्फ़ दो-चार देशों तक सीमित न रहे, बल्कि एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय समझौता बन सके। यूक्रेन का मानना है कि यूरोप की मौजूदगी से समझौते को और मज़बूती मिलेगी। हालांकि, वक्त की कमी और हालात की जल्दबाज़ी की वजह से फिलहाल यूरोपीय देशों को तुरंत इस अहम बैठक में शामिल करना थोड़ा मुश्किल नज़र आ रहा है।
अमेरिका की भूमिका
जैसे-जैसे डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिकी प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है, अमेरिका इस पूरे शांति प्रयास में एक बड़े मध्यस्थ के तौर पर उभरता जा रहा है। ट्रम्प के समर्थन के बाद यह शांति योजना अब सिर्फ़ फाइलों और काग़ज़ों तक सीमित नहीं रही। अब इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है और दुनिया भर की निगाहें इस पर टिक गई हैं।

आम बोलचाल की ज़ुबान में कहें तो अगर अमेरिका ने खुलकर साथ दिया, तो अमन की राह आसान हो सकती है। लेकिन जब तक रूस अपनी शर्तों पर अड़ा रहेगा और सभी पक्ष एक ही मेज़ पर नहीं आएँगे, तब तक यह रास्ता आसान नहीं कहा जा सकता। फिर भी, मौजूदा हालात में यह कोशिशें उम्मीद की एक नई किरण ज़रूर दिखा रही हैं।
Zelensky का दृष्टिकोण
Zelensky बार-बार यही बात दोहरा चुके हैं कि वो दिल से अमन चाहते हैं और शांति हासिल करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंग किसी के हक़ में नहीं होती और अब वक़्त आ गया है कि इस दर्दनाक दौर को खत्म किया जाए।
Zelensky ने कहा,
“जब भी हम अपने दोस्तों और सहयोगी देशों से मिलते हैं, उनसे खुलकर बात करते हैं, तो हर बातचीत हमें शांति के मक़सद के और क़रीब ले जाती है।”
उनका मानना है कि यह शांति योजना सिर्फ़ आज की जंग खत्म करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यूक्रेन के आने वाले कल और पूरे यूरोप की शांति और स्थिरता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकती है।
यूक्रेन के अंदर क्या माहौल है?
अगर यूक्रेन के अंदर की बात करें, तो वहाँ लोगों और नेताओं के बीच मिली-जुली राय देखने को मिल रही है।
कुछ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि अगर शांति की तरफ़ ज़रा-सी भी तरक़्क़ी होती है, तो उसका स्वागत होना चाहिए। उनके लिए सबसे बड़ी बात है जान बचाना, घर-बार को महफूज़ रखना और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को फिर से सामान्य बनाना।
वहीं दूसरी तरफ़ कुछ लोग इस तरह के किसी भी समझौते को लेकर सतर्क और परेशान नज़र आते हैं। उनका कहना है कि बिना मज़बूत सुरक्षा गारंटी, बिना देश की संप्रभुता की पूरी हिफ़ाज़त और बिना लंबे समय के अंतरराष्ट्रीय समर्थन के कोई भी समझौता टिकाऊ नहीं हो सकता। उन्हें डर है कि कहीं शांति के नाम पर भविष्य की सुरक्षा दांव पर न लग जाए।
इसी वजह से ज़ेलेंस्की के बयान और डोनाल्ड ट्रम्प से होने वाली मुलाक़ात पूरे यूक्रेन में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। लोग उम्मीद भी कर रहे हैं और सवाल भी पूछ रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि यह बातचीत यूक्रेन के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, जहाँ से या तो अमन की राह खुलेगी या फिर संघर्ष की कहानी और लंबी हो जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
रविवार, 28 दिसंबर को होने वाली इस अहम मुलाक़ात के बाद पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या यह बातचीत सच में अमन की तरफ़ कोई बड़ा क़दम बन पाती है, या फिर कुछ पेचीदे मसले अभी भी अधूरे रह जाते हैं।
अगर इस बैठक में यूक्रेन की सुरक्षा की पक्की गारंटी, इलाक़ों से जुड़े विवादों और आर्थिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर साफ़ और ठोस सहमति बन जाती है, तो माना जा रहा है कि यह पहल यूक्रेन-रूस जंग को खत्म करने वाली एक ऐतिहासिक कोशिश साबित हो सकती है। ऐसे में न सिर्फ़ यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप और दुनिया को राहत की सांस मिलेगी।
लेकिन दूसरी तरफ़ अगर बातचीत के दौरान अब भी मतभेद, शर्तें और उलझनें हावी रहती हैं, तो यह साफ़ संकेत होगा कि रास्ता अभी लंबा है और युद्धविराम की प्रक्रिया और खिंच सकती है। यानी अमन की मंज़िल तक पहुँचने में अभी और वक़्त लग सकता है।
Zelensky का यह कहना कि “शांति योजना लगभग तैयार है”, पिछले कई असफल या अधूरे प्रयासों के मुकाबले काफ़ी बड़ा और उम्मीद जगाने वाला संकेत माना जा रहा है। इससे यह एहसास मिलता है कि हालात अब सिर्फ़ बातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसी नतीजे की तरफ़ बढ़ रहे हैं।
अब पूरी दुनिया की आँखें रविवार को डोनाल्ड ट्रम्प के साथ होने वाली इस मुलाक़ात पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि शायद यही बैठक Ukraine Russia संघर्ष के अंत की शुरुआत बन जाए और बरसों से चली आ रही जंग की कहानी किसी अमन भरे मोड़ पर आकर थम जाए।
यह भी पढ़ें –
Dr. Manmohan Singh Death Anniversary 2025: देशभर में याद किए गए सादगी और दूरदर्शिता के प्रतीक नेता





