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देश की बैंकिंग दुनिया से एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने आम आदमी से लेकर वित्तीय एक्सपर्ट्स तक सबको हैरान कर दिया है। RTI के जरिए पता चला है कि भारत के अलग-अलग बैंकों में करीब 83,876 करोड़ रुपये ऐसी रकम पड़ी हुई है, जिस पर अब तक किसी ने दावा नहीं किया।
यानी हजारों करोड़ रुपये सालों से बैंक खातों में पड़े हैं और उनके असली मालिक या तो उन्हें भूल चुके हैं या फिर उनके परिवार वालों को इसकी खबर ही नहीं है।
ये मामला उस वक्त सामने आया जब नागपुर के RTI एक्टिविस्ट अभय कोलारकर ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कुछ अहम जानकारियां मांगीं। जवाब में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने पूरे बैंकिंग सिस्टम की तस्वीर साफ कर दी। अब लोग ये सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर इतना बड़ा पैसा बिना इस्तेमाल के कैसे पड़ा रह गया।
क्या होता है अनक्लेम्ड डिपॉजिट?
आसान लफ्ज़ों में समझें तो जब किसी बैंक अकाउंट, FD या दूसरे जमा खातों में लंबे वक्त तक कोई लेन-देन नहीं होता और खाताधारक या उसका परिवार उस रकम पर दावा नहीं करता, तो उसे “अनक्लेम्ड डिपॉजिट” कहा जाता है।
अक्सर ऐसा तब होता है जब कोई शख्स नौकरी बदल देता है, शहर छोड़ देता है या फिर किसी वजह से पुराने बैंक खाते को भूल जाता है। कई बार बुजुर्ग लोगों की मौत के बाद उनके घरवालों को उनके बैंक खातों की जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में वो पैसा सालों तक बैंक में पड़ा रहता है।
RBI के नियमों के मुताबिक अगर किसी खाते में 10 साल तक कोई दावा नहीं होता, तो वो रकम RBI के Depositor Education and Awareness Fund में ट्रांसफर कर दी जाती है।
नागपुर के RTI एक्टिविस्ट ने उठाया बड़ा मुद्दा
नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने RTI लगाकर RBI से बैंकिंग फ्रॉड, शिकायतों और अनक्लेम्ड डिपॉजिट से जुड़ी जानकारी मांगी थी। RTI के जवाब में पता चला कि 31 मार्च 2026 तक देशभर के बैंकों में 83,876.57 करोड़ रुपये बिना दावे के पड़े हुए हैं।
ये आंकड़ा सुनकर हर कोई दंग रह गया क्योंकि ये रकम कई राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। RTI में ये भी सामने आया कि बैंकों के खिलाफ शिकायतों और साइबर फ्रॉड के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है।
अभय कोलारकर का कहना है कि आम लोगों को अपनी जमा पूंजी और बैंकिंग अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। वरना मेहनत की कमाई यूं ही सिस्टम में फंसी रह जाएगी।
RBI ने कितनी रकम वापस करवाई?
हालांकि तस्वीर पूरी तरह मायूस करने वाली नहीं है। RBI ने पिछले एक साल में बड़ी संख्या में लोगों को उनकी भूली हुई रकम वापस दिलाने का काम भी किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 5,043 करोड़ रुपये लोगों को लौटाए गए। इसमें ब्याज की रकम भी शामिल थी। RBI और सरकार ने इस दौरान “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” नाम से एक जागरूकता अभियान भी चलाया, जिसका असर अब दिखाई देने लगा है।
पहले जहां हर महीने बहुत कम लोग अपनी रकम क्लेम करते थे, वहीं अब हजारों लोग पुराने अकाउंट्स और FD की जानकारी निकालकर पैसा वापस ले रहे हैं।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
सबसे बड़ा कारण लोगों की लापरवाही और जानकारी की कमी मानी जा रही है। आजकल लोग एक साथ कई बैंक अकाउंट खुलवा लेते हैं। सैलरी अकाउंट अलग, सेविंग्स अलग और निवेश अलग। वक्त गुजरने के साथ कई खाते इस्तेमाल होना बंद हो जाते हैं और लोग उन्हें भूल जाते हैं।
दूसरी बड़ी वजह नॉमिनी न जोड़ना है। बहुत से लोग बैंक खाते खोलते वक्त नॉमिनी की जानकारी नहीं देते। बाद में अगर खाताधारक के साथ कुछ हो जाए तो परिवार वालों को कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा गांव और छोटे शहरों में आज भी बहुत से लोग बैंकिंग प्रक्रिया को ठीक से नहीं समझते। यही वजह है कि करोड़ों रुपये सालों तक बिना दावे के पड़े रहते हैं।
साइबर फ्रॉड और बैंक शिकायतों का भी खुलासा
RTI के जवाब में बैंकिंग फ्रॉड और शिकायतों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। RBI Ombudsman ऑफिस में हजारों शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले को-ऑपरेटिव बैंकों और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े थे।
ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने के साथ साइबर ठग भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी KYC अपडेट के नाम पर कॉल आता है तो कभी लिंक भेजकर लोगों के खाते खाली कर दिए जाते हैं।
जानकारों का कहना है कि लोगों को किसी भी अनजान कॉल, लिंक या OTP शेयर करने से बचना चाहिए। छोटी सी गलती मेहनत की पूरी कमाई डुबो सकती है।
UDGAM Portal बना लोगों के लिए उम्मीद
लोगों की मदद के लिए RBI ने UDGAM Portal शुरू किया है। इस पोर्टल पर जाकर कोई भी इंसान अपने नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम से अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी हासिल कर सकता है।
अगर किसी के घर में पुराने बैंक खाते, FD या निवेश की जानकारी नहीं है, तो ये पोर्टल काफी मददगार साबित हो सकता है। कई लोग इस पोर्टल के जरिए अपनी सालों पुरानी जमा पूंजी वापस हासिल कर चुके हैं।
सरकार का मकसद यही है कि लोगों का पैसा उन्हें वापस मिले और वो बैंकिंग सिस्टम में बेवजह फंसा न रहे।
क्या बैंकों की जिम्मेदारी नहीं बनती?
अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या सिर्फ जनता की गलती है या बैंकों की भी जिम्मेदारी बनती है? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बैंक अगर चाहें तो खाताधारकों तक ज्यादा आसानी से पहुंच सकते हैं।
मोबाइल मैसेज, ईमेल, पोस्ट और डिजिटल अलर्ट के जरिए लोगों को उनके पुराने खातों की जानकारी दी जा सकती है। लेकिन कई मामलों में बैंक सिर्फ औपचारिक नोटिस जारी करके अपनी जिम्मेदारी खत्म मान लेते हैं।
अगर बैंक और RBI मिलकर मजबूत सिस्टम तैयार करें तो इस रकम का बड़ा हिस्सा असली मालिकों तक पहुंचाया जा सकता है।
आम लोगों को क्या करना चाहिए?
हर बैंक अकाउंट में नॉमिनी जरूर जोड़ें
परिवार वालों को अपने निवेश और बैंक खातों की जानकारी दें
पुराने खातों को समय-समय पर इस्तेमाल करते रहें
FD और जरूरी डॉक्युमेंट्स सुरक्षित रखें
RBI के UDGAM Portal पर जाकर जानकारी चेक करते रहें
किसी भी साइबर कॉल या फर्जी लिंक से सावधान रहें|
RTI से सामने आया ये मामला सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि ये हमारी बैंकिंग जागरूकता की हकीकत भी दिखाता है। हजारों करोड़ रुपये यूं ही बैंकों में पड़े रहना इस बात का इशारा है कि अभी भी लोग अपने पैसों और बैंकिंग अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं।
अगर समय रहते लोग सतर्क नहीं हुए और बैंकिंग जानकारी को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले वक्त में ये आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि हर इंसान अपने बैंक खातों, निवेश और जमा पूंजी की जानकारी संभालकर रखे ताकि मेहनत की कमाई कहीं गुमनाम होकर सिस्टम में दफ्न न हो जाए।
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