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Nagpur का खोता हुआ Paan Culture, कभी हर गली की शान था पान

Nagpur का खोता हुआ Paan Culture, कभी हर गली की शान था पान

Nagpur को लोग संतरे के शहर के नाम से जानते हैं, लेकिन पुराने लोगों से बात करो तो वो आपको बताएंगे कि एक दौर ऐसा भी था जब इस शहर की असली रौनक उसके पान ठेलों और पान की दुकानों में बसती थी।

शाम ढलते ही चौक-चौराहों पर महफिलें सज जाती थीं। कोई मीठा पान खा रहा होता, कोई बनारसी पत्ता मांगता, तो कोई खास मसाले वाला सादा पान। लेकिन अब धीरे-धीरे वो दौर कहीं खोता हुआ नजर आ रहा है।

आज के मॉडर्न जमाने में जहां लोग कैफे और कॉफी शॉप में बैठना पसंद करते हैं, वहीं पान की पुरानी दुनिया अब पहले जैसी चमक नहीं दिखा पा रही। नागपुर की कई मशहूर पान दुकानें आज भी मौजूद हैं, मगर वहां पहले जैसी भीड़ और रौनक अब कम दिखाई देती है।

पान सिर्फ खाने की चीज नहीं, एक तहजीब थी

पुराने जमाने में पान खाना सिर्फ शौक नहीं माना जाता था, बल्कि ये एक तरह की तहजीब और अदब का हिस्सा था। किसी मेहमान को खाना खिलाने के बाद पान पेश करना इज्जत की बात समझी जाती थी। शादी-ब्याह हो, त्योहार हो या कोई खुशी का मौका — पान हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज कराता था।

Nagpur के कई पुराने मोहल्लों में आज भी बुजुर्ग लोग शाम को पान खाने जरूर निकलते हैं। उनके लिए ये सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि पुरानी यादों से जुड़ा एहसास है।

Nagpur की हर गली में होती थी पान की दुकान

एक वक्त था जब Nagpur की हर छोटी-बड़ी गली में पान का ठेला या दुकान नजर आ जाती थी। रात के वक्त दुकानों पर इतनी भीड़ रहती थी कि लोगों को इंतजार करना पड़ता था। दोस्त लोग वहीं खड़े होकर गप्पें मारते, राजनीति से लेकर क्रिकेट तक हर मुद्दे पर चर्चा होती।

कई दुकानों का अपना अलग अंदाज हुआ करता था। कहीं मलाई पान मशहूर था तो कहीं खास बनारसी पत्ता। कुछ लोग सिर्फ अपने पसंदीदा पान वाले के यहां ही जाते थे क्योंकि उन्हें उसके हाथ के स्वाद की आदत हो जाती थी।

अब बदल गया है लोगों का टेस्ट

वक्त के साथ शहर का माहौल भी बदल गया। अब नई पीढ़ी पान की जगह कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और कैफे कल्चर की तरफ ज्यादा खिंच रही है। जहां पहले दोस्त “चल पान खाने चलते हैं” बोलते थे, अब वही लोग कैफे में बैठकर कॉफी पीना पसंद करते हैं।

सोशल मीडिया और मॉडर्न लाइफस्टाइल ने भी लोगों की पसंद बदल दी है। खासकर युवा अब पान को पुरानी चीज समझने लगे हैं। यही वजह है कि कई पुरानी पान दुकानें धीरे-धीरे बंद होती जा रही हैं।

गुटखा और पान मसाले ने भी बदला माहौल

पान दुकानदारों का कहना है कि असली पान कल्चर को सबसे ज्यादा नुकसान रेडीमेड गुटखा और पान मसालों ने पहुंचाया है। पहले लोग आराम से खड़े होकर ताजा पान बनवाते थे, लेकिन अब लोग जल्दी में सिर्फ एक पाउच खरीदकर निकल जाते हैं।

ऊपर से पान के पत्तों की बढ़ती कीमत ने भी दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। पहले कम खर्च में अच्छा कारोबार हो जाता था, लेकिन अब मुनाफा काफी कम हो गया है।

Nagpur की रातें और Paan Culture

पुराने नागपुर की रातों की बात ही कुछ और थी। इतवारी, सदर और सराफा जैसे इलाकों में देर रात तक चहल-पहल रहती थी। लोग खाना खाने के बाद पान जरूर खाते थे। कई लोगों के लिए तो रात का खाना पान के बिना अधूरा माना जाता था।

दुकानों के बाहर खड़े होकर लोग घंटों बातें करते रहते थे। वहां सिर्फ पान नहीं बिकता था, बल्कि दोस्ती, मोहब्बत और अपनापन भी मिलता था।

नई पीढ़ी को नहीं पता असली स्वाद

आज के बहुत से युवाओं को शायद असली बनारसी या मीठे पान का स्वाद ठीक से मालूम भी नहीं होगा। उनके लिए पान अब सिर्फ शादी-ब्याह या सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित होकर रह गया है।

हालांकि कुछ दुकानदार अब नए अंदाज में पान पेश कर रहे हैं। चॉकलेट पान, फायर पान और आइस पान जैसे नए एक्सपेरिमेंट युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुराने दौर वाली बात आज भी मिसिंग महसूस होती है।

धीरे-धीरे खत्म हो रही पुरानी पहचान

नागपुर तेजी से बदल रहा है। बड़े मॉल, कैफे और मॉडर्न लाइफस्टाइल के बीच शहर की कई पुरानी चीजें पीछे छूटती जा रही हैं। पान कल्चर भी उन्हीं में से एक है।

पुराने लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं जब शाम की शुरुआत दोस्तों के साथ पान खाने से होती थी। उनके मुताबिक उस वक्त रिश्तों में ज्यादा अपनापन और मोहब्बत हुआ करती थी।

क्या फिर लौटेगा वो दौर?

कुछ लोगों का मानना है कि अगर पान संस्कृति को नए अंदाज में पेश किया जाए तो शायद उसकी पुरानी रौनक वापस आ सकती है। साफ-सुथरे पान कैफे, नए फ्लेवर और फैमिली फ्रेंडली माहौल के जरिए युवा पीढ़ी को फिर से इससे जोड़ा जा सकता है।

क्योंकि नागपुर सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं बना, बल्कि यहां की पुरानी परंपराएं, महफिलें और लोगों की आदतें ही इस शहर की असली जान हैं। और पान भी उसी खूबसूरत विरासत का एक अहम हिस्सा रहा है।

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