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Nagpur के Shaunak ने किया कमाल, Commonwealth Chess में दो गोल्ड
Nagpur का नाम एक बार फिर पूरी दुनिया में रोशन हुआ है। इस बार शहर के 14 साल के होनहार शतरंज खिलाड़ी शौनक बडोले ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। श्रीलंका में हुई कॉमनवेल्थ यूथ चेस चैंपियनशिप में शौनक ने दो गोल्ड मेडल जीतकर ना सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे नागपुर और हिंदुस्तान का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया।
कम उम्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल करना आसान बात नहीं होती, लेकिन शौनक ने अपनी मेहनत, सब्र और शानदार खेल से ये साबित कर दिया कि अगर जुनून हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
श्रीलंका में चमका Nagpur का सितारा
Commonwealth Chess Championship इस बार श्रीलंका के खूबसूरत शहर कालुतारा में खेली गई। इस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कई देशों के टैलेंटेड खिलाड़ी शामिल हुए थे। हर मुकाबला काफी मुश्किल और टक्कर का था, लेकिन शौनक ने शुरू से ही अपना दबदबा बना लिया।
अंडर-14 कैटेगरी में खेलते हुए उन्होंने क्लासिकल और रैपिड दोनों फॉर्मेट में गोल्ड मेडल जीतकर सबको हैरान कर दिया। उनकी हर चाल में कॉन्फिडेंस और समझदारी साफ दिखाई दे रही थी। यही वजह रही कि बड़े-बड़े खिलाड़ी भी उनके सामने टिक नहीं पाए।
पूरे टूर्नामेंट में रहे अजेय
Shaunak की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि क्लासिकल मुकाबलों में वो पूरे टूर्नामेंट के दौरान एक भी मैच नहीं हारे। उन्होंने नौ राउंड में शानदार 7.5 पॉइंट हासिल किए।
उनके खाते में छह जीत और तीन ड्रॉ रहे। हर मैच में उन्होंने बहुत सुकून और सब्र के साथ खेल दिखाया। मुश्किल हालात में भी वो घबराए नहीं और सही वक्त पर बेहतरीन चाल चलकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
शतरंज के जानकारों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में ऐसा कंट्रोल और मैच पढ़ने की काबिलियत बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलती है।
रैपिड फॉर्मेट में भी किया कमाल
क्लासिकल फॉर्मेट में गोल्ड जीतने के बाद भी शौनक का जोश कम नहीं हुआ। रैपिड मुकाबलों में उन्होंने और भी ज्यादा आक्रामक अंदाज में खेल दिखाया।
उन्होंने लगातार सातों मुकाबले जीतकर दूसरा गोल्ड भी अपने नाम कर लिया। उनकी तेज सोच और फटाफट सही फैसला लेने की काबिलियत ने सबको इंप्रेस कर दिया।
शतरंज में रैपिड फॉर्मेट को काफी मुश्किल माना जाता है क्योंकि इसमें सोचने के लिए कम वक्त मिलता है, लेकिन शौनक ने यहां भी अपनी क्लास दिखा दी।
नागपुर के लिए गर्व का पल
शौनक की इस शानदार जीत के बाद नागपुर में खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार उन्हें मुबारकबाद दे रहे हैं। खेल जगत से जुड़े लोग भी इस युवा खिलाड़ी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
कई लोगों का कहना है कि नागपुर अब सिर्फ क्रिकेट या राजनीति के लिए नहीं, बल्कि चेस जैसे माइंड गेम में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।
शौनक की जीत ने शहर के दूसरे बच्चों को भी मोटिवेशन दिया है कि मेहनत और लगन से इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचा जा सकता है।
स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल, शौनक नारायणा विद्यालयम स्कूल के छात्र हैं। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के बाद स्कूल में जश्न जैसा माहौल बन गया। टीचर्स और स्टूडेंट्स ने उन्हें ढेर सारी बधाइयां दीं।
उनके परिवार वालों ने बताया कि शौनक बचपन से ही शतरंज के दीवाने रहे हैं। खाली वक्त में भी वो नई-नई चालों की प्रैक्टिस करते रहते थे।
घरवालों का कहना है कि उन्होंने हमेशा शौनक को सपोर्ट किया और आज उसी मेहनत का नतीजा पूरी दुनिया देख रही है।
कोचिंग और मेहनत का मिला इनाम
शतरंज सिर्फ दिमाग का खेल नहीं बल्कि सब्र और लगातार मेहनत का भी इम्तिहान होता है। शौनक ने अपनी मेहनत से ये साबित कर दिया कि अगर इंसान पूरे दिल से तैयारी करे तो कामयाबी जरूर मिलती है।
बताया जा रहा है कि वो रोज कई घंटों तक अभ्यास करते हैं। पुराने मैच देखते हैं, नई स्ट्रेटजी सीखते हैं और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।
उनकी यही मेहनत आज उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिला रही है।
आगे एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नजर
कॉमनवेल्थ में डबल गोल्ड जीतने के बाद अब शौनक की नजर आने वाले एशियन और वर्ल्ड चेस टूर्नामेंट पर है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उनका यही फॉर्म जारी रहा तो आने वाले वक्त में वो भारत के बड़े ग्रैंडमास्टर्स में शामिल हो सकते हैं।
देशभर के चेस फैंस को अब उनसे और भी बड़ी उम्मीदें हैं।
सोशल मीडिया पर भी छाए शौनक
शौनक की जीत के बाद सोशल मीडिया पर लोग लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं। किसी ने उन्हें “नागपुर का चेस स्टार” कहा तो किसी ने “भविष्य का ग्रैंडमास्टर” बताया।
लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इंटरनेशनल मंच पर दो गोल्ड जीतना बहुत बड़ी बात है। उनकी सफलता हजारों बच्चों के लिए इंस्पिरेशन बन सकती है।
भारत के लिए बड़ी उम्मीद
भारत इस वक्त दुनिया के सबसे मजबूत चेस देशों में गिना जाता है। विश्वनाथन आनंद के बाद कई युवा खिलाड़ी दुनिया में नाम कमा रहे हैं और अब शौनक भी उसी कतार में नजर आ रहे हैं।
उनकी ये जीत सिर्फ एक मेडल नहीं बल्कि हिंदुस्तान के उज्ज्वल भविष्य की निशानी मानी जा रही है।
अगर उन्हें इसी तरह सपोर्ट और सही ट्रेनिंग मिलती रही, तो आने वाले सालों में शौनक दुनिया के बड़े चेस खिलाड़ियों में अपना नाम जरूर बना सकते हैं।
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