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Supreme Court से Nagpur Industries को बड़ी राहत, MIDC प्लॉट ट्रांसफर पर GST को लेकर अहम फैसला

Supreme Court से Nagpur Industries को बड़ी राहत, MIDC प्लॉट ट्रांसफर पर GST को लेकर अहम फैसला

Supreme Court से Nagpur Industries को बड़ी राहत

Nagpur और पूरे महाराष्ट्र की इंडस्ट्रीज़ के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। लंबे वक्त से GST को लेकर जो टेंशन कारोबारियों के सिर पर मंडरा रही थी, उस पर अब अदालत के फैसले ने काफी हद तक सुकून दे दिया है। MIDC प्लॉट और लीज ट्रांसफर पर लगने वाले GST को लेकर जो कानूनी लड़ाई चल रही थी, उसमें उद्योग जगत को राहत मिलती नजर आ रही है।

काफी समय से GST विभाग कई कंपनियों और फैक्ट्री मालिकों को नोटिस भेज रहा था। कहा जा रहा था कि अगर किसी ने MIDC का प्लॉट या लीज किसी दूसरे को ट्रांसफर किया है, तो उस पर GST देना पड़ेगा। इसी बात को लेकर कारोबारियों में बेचैनी थी। उनका कहना था कि जमीन या उससे जुड़े अधिकारों को ट्रांसफर करना कोई “सर्विस” नहीं बल्कि अचल संपत्ति का मामला है, इसलिए उस पर GST नहीं लगना चाहिए।

हाईकोर्ट के फैसले ने बदली तस्वीर

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए इंडस्ट्री सेक्टर को राहत दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि MIDC के लीजहोल्ड राइट्स का ट्रांसफर कोई सर्विस नहीं माना जा सकता। यानी इसे GST के दायरे में नहीं लाया जा सकता।

अदालत ने यह भी माना कि जब कोई कंपनी अपनी इंडस्ट्रियल जमीन या लीज किसी दूसरे को देती है, तो वह दरअसल प्रॉपर्टी से जुड़े हक ट्रांसफर कर रही होती है। ऐसे में उस पर सर्विस टैक्स या GST लगाना ठीक नहीं है।

इस फैसले के बाद उन कारोबारियों ने राहत की सांस ली है जिनके ऊपर लाखों-करोड़ों रुपये के टैक्स नोटिस लटक रहे थे। कई छोटे और मीडियम उद्योग तो इसी वजह से परेशान चल रहे थे।

Supreme Court तक पहुंचा मामला

बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। वहां भी इंडस्ट्री सेक्टर को राहत मिलने के संकेत मिले। कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत का रुख साफ है कि कारोबारियों पर बेवजह टैक्स का बोझ डालना ठीक नहीं।

इस पूरे मामले के बाद उद्योग जगत में उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में ऐसे कई पुराने मामलों में भी कारोबारियों को राहत मिल सकती है। खासकर वे कंपनियां जो MIDC इलाकों में फैक्ट्री या इंडस्ट्रियल यूनिट चला रही हैं, उन्हें इससे सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।

कारोबारियों में खुशी की लहर

फैसले के बाद नागपुर समेत महाराष्ट्र के कई इंडस्ट्रियल इलाकों में कारोबारियों के बीच खुशी का माहौल है। इंडस्ट्री एसोसिएशन और व्यापार मंडलों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है।

कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में GST के नाम पर बहुत ज्यादा दबाव बना दिया गया था। बार-बार नोटिस भेजे जा रहे थे और भारी टैक्स मांगा जा रहा था। इससे बिजनेस करना मुश्किल होता जा रहा था।

छोटे उद्योगपतियों का कहना है कि अगर इसी तरह टैक्स का डर बना रहता, तो कई यूनिट बंद होने की नौबत आ जाती। अब कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें थोड़ी राहत महसूस हो रही है।

क्या था पूरा विवाद?

असल झगड़ा MIDC की जमीन और लीज को लेकर था। MIDC इंडस्ट्री लगाने के लिए कंपनियों को लंबे समय की लीज पर जमीन देती है। कई बार कंपनियां बाद में वही लीज या प्लॉट किसी दूसरी कंपनी को ट्रांसफर कर देती हैं।

GST विभाग का कहना था कि यह एक तरह की “सर्विस” है, इसलिए इस पर GST लगेगा। लेकिन कंपनियों का तर्क था कि यह जमीन से जुड़े अधिकारों का ट्रांसफर है, जिसे कानून में अचल संपत्ति माना गया है। इसलिए GST नहीं लगाया जा सकता।

इसी मुद्दे को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंचा था, जहां अब उद्योग जगत को राहत मिलती दिखाई दे रही है।

इंडस्ट्री सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ नागपुर तक सीमित नहीं रहेगा। पुणे, नासिक, औरंगाबाद और महाराष्ट्र के दूसरे इंडस्ट्रियल शहरों में भी हजारों कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है।

अब इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी खरीदने और ट्रांसफर करने में कारोबारियों का भरोसा बढ़ेगा। नए निवेशकों को भी राहत मिलेगी क्योंकि GST को लेकर जो डर था, वह काफी हद तक कम हो जाएगा।

हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि हर मामला अलग हो सकता है। कुछ फीस और चार्जेस पर GST लागू रह सकता है, लेकिन सिर्फ लीजहोल्ड राइट्स ट्रांसफर को सर्विस मानना सही नहीं होगा।

सरकार और विभाग की नजर आगे के कदमों पर

अब सबकी नजर GST विभाग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। अगर आगे भी अदालतों का यही रुख बना रहता है, तो पूरे देश में इंडस्ट्रियल प्लॉट ट्रांसफर से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल नागपुर के उद्योग जगत में राहत का माहौल है। कारोबारियों को उम्मीद है कि इस फैसले से बिजनेस करना आसान होगा और इंडस्ट्री सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी।

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