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Nagpur में Chemotherapy Medicines की भारी shortage, कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित

Nagpur में Chemotherapy Medicines की भारी shortage, कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित

Nagpur में Chemotherapy Medicines की किल्लत

Nagpur में इन दिनों कैंसर के मरीज एक नई परेशानी से दो-चार हो रहे हैं। पहले ही बीमारी का दर्द, इलाज का खर्चा और घर वालों की फिक्र कम नहीं थी, ऊपर से अब कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी ने लोगों की बेचैनी और बढ़ा दी है।

Nagpur शहर के कई सरकारी अस्पतालों में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन जैसी अहम दवाएं कम पड़ रही हैं, जिसकी वजह से मरीजों का इलाज प्रभावित होने लगा है।

डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर का इलाज कोई आम इलाज नहीं होता, इसमें हर तारीख, हर डोज़ और हर साइकिल की अपनी अहमियत होती है। अगर बीच में इलाज रुक जाए या देर हो जाए तो बीमारी दोबारा तेजी से बढ़ सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों में दवा की कमी को लेकर डॉक्टर भी काफी फिक्रमंद नजर आ रहे हैं।

Chemotherapy Medicines की कमी ने बढ़ाई टेंशन

अस्पतालों में आने वाले कई मरीजों को अब पहले की तरह आसानी से दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कुछ मरीजों को अगली तारीख देकर वापस भेजा जा रहा है तो कुछ को दूसरे विकल्पों से इलाज देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन हर मरीज के लिए वैकल्पिक दवाएं कारगर हों, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को हो रही है जो सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करके इलाज करवा रहे हैं। निजी अस्पतालों में कैंसर का इलाज पहले ही लाखों रुपये का होता है और ऐसे में सरकारी अस्पतालों में दवा की कमी लोगों की चिंता बढ़ा रही है।

मरीजों के रिश्तेदारों का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी में एक-एक दिन कीमती होता है। अगर इलाज समय पर न मिले तो मरीज की हालत बिगड़ सकती है। यही वजह है कि लोग रोज अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं और दवाओं के आने का इंतजार कर रहे हैं।

आखिर क्यों हुई दवाओं की कमी?

जानकारों के मुताबिक इस समस्या की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन का प्रभावित होना है। जिन कच्चे माल से ये दवाएं तैयार होती हैं, उनका बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। पिछले कुछ महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और जंग जैसे हालात की वजह से दवा उद्योग पर असर पड़ा है।

इसके अलावा प्लैटिनम बेस्ड कच्चे माल की कीमतों में भी काफी इजाफा हुआ है। दवा कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने से सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी का असर अब अस्पतालों में दिखाई देने लगा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नागपुर की समस्या नहीं है बल्कि देश के कई शहरों में ऐसी स्थिति बनने लगी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

डॉक्टरों ने जताई गहरी चिंता

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि Chemotherapy Medicines का पूरा इलाज एक तय प्लान के हिसाब से चलता है। मरीज को हर कुछ दिनों में दवा दी जाती है ताकि कैंसर कोशिकाओं की बढ़त को रोका जा सके। अगर किसी वजह से एक भी साइकिल छूट जाए तो इलाज का असर कम हो सकता है।

डॉक्टरों का साफ कहना है कि कैंसर इंतजार नहीं करता। बीमारी को रोकने के लिए लगातार इलाज जरूरी होता है। ऐसे में दवा की कमी मरीजों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

कुछ डॉक्टरों ने यह भी बताया कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। ऐसे में मेडिकल स्टाफ पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

किन मरीजों पर सबसे ज्यादा असर?

सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन जैसी दवाएं कई तरह के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। इनमें फेफड़ों का कैंसर, गले का कैंसर, सिर और गर्दन का कैंसर, पेट और आंतों से जुड़े कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियां शामिल हैं।

इन दवाओं को कैंसर ट्रीटमेंट की रीढ़ माना जाता है। बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज इन्हीं के जरिए किया जाता है। इसलिए जब इनकी सप्लाई कम होती है तो उसका असर सीधे हजारों मरीजों पर पड़ता है।

कई मामलों में डॉक्टरों को मजबूरी में इलाज का तरीका बदलना पड़ रहा है, जबकि कुछ मरीजों को नई दवाओं पर शिफ्ट किया जा रहा है। हालांकि हर मरीज का शरीर और बीमारी अलग होती है, इसलिए यह फैसला भी आसान नहीं होता।

सरकार और प्रशासन क्या कर रहे हैं?

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दवाओं की सप्लाई सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों के मुताबिक कंपनियों और सप्लायरों से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द स्टॉक उपलब्ध कराया जा सके।

सरकारी स्तर पर यह भी कोशिश हो रही है कि जिन अस्पतालों में कुछ मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं, वहां से जरूरत के हिसाब से दूसरी जगह सप्लाई की जाए। हालांकि मांग ज्यादा होने की वजह से यह समाधान भी सीमित साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए जरूरी कैंसर दवाओं का अलग रिजर्व स्टॉक तैयार किया जाना चाहिए। ताकि किसी अंतरराष्ट्रीय संकट या सप्लाई रुकने की स्थिति में मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।

मरीजों और परिवारों की बढ़ती बेचैनी

कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए यह दौर काफी मुश्किल भरा है। बीमारी के साथ-साथ अब दवा मिलने की चिंता भी उन्हें परेशान कर रही है। कई परिवारों का कहना है कि वे पहले ही आर्थिक और मानसिक दबाव में हैं, ऐसे में इलाज रुकने का डर उन्हें अंदर से तोड़ रहा है।

अस्पतालों में आने वाले लोग बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द से जल्द दवाओं की उपलब्धता सामान्य हो जाए और उनका इलाज बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

फिलहाल Nagpur के कैंसर मरीजों की निगाहें सरकार, स्वास्थ्य विभाग और दवा कंपनियों पर टिकी हुई हैं। सभी को इंतजार है उस दिन का जब जीवन बचाने वाली ये जरूरी दवाएं फिर से अस्पतालों में आसानी से मिलने लगें और मरीजों को राहत की सांस मिल सके।

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