Table of Contents
Nagpur Sonegaon Amrai में पेड़ों से लिपटे बुजुर्ग, महिलाओं ने बांधी राखी
Nagpur के sonegaon Amrai जंगल में 61 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई का मामला अब लगातार गर्माता जा रहा है। पहले जहां युवा और पर्यावरण से जुड़े लोग इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, वहीं अब Nagpur के वरिष्ठ नागरिक भी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि पेड़ों को बचाने की जद्दोजहद अब एक जन आंदोलन की शक्ल लेती दिखाई दे रही है।
“सेव Sonegaon Amrai ग्रुप” के बैनर तले बड़ी तादाद में बुजुर्ग महिला और पुरुष जंगल पहुंचे और पेड़ों से चिपककर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान महिलाओं ने पेड़ों को अपना भाई मानते हुए उन्हें राखी बांधी और दीप जलाकर उनकी सलामती की दुआ की। यह नजारा देखने वालों के लिए काफी जज़्बाती था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आमराई का यह जंगल सिर्फ पेड़ों का झुंड नहीं बल्कि उनकी यादों, भावनाओं और बचपन का हिस्सा है। कई लोग बरसों से यहां मॉर्निंग वॉक करते हैं, तो कुछ लोग इसे अपनी रूहानी और प्राकृतिक सुकून की जगह मानते हैं।
सीवरेज लाइन प्रोजेक्ट बना विवाद की वजह
दरअसल Nagpur महानगरपालिका सहकार नगर घाट से मुलिक कॉम्प्लेक्स तक मलवाहिनी यानी सीवरेज लाइन बिछाने की योजना पर काम कर रही है। मनपा का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाले 61 पेड़ काम में रुकावट बन रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन पेड़ों में नीम, जामुन, इमली, करंज, पलाश, बेल, बबूल और एक विशाल वटवृक्ष भी शामिल है। मनपा के दस्तावेजों के मुताबिक इनमें 3 हेरिटेज और 58 गैर-हेरिटेज पेड़ हैं।
लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि किसी भी विकास कार्य के लिए सबसे पहले पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाना कोई समझदारी नहीं है। उनका मानना है कि अगर प्रशासन चाहे तो ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है जिससे प्रोजेक्ट भी पूरा हो जाए और पेड़ भी सुरक्षित रहें।
जनसुनवाई से पहले तैयारी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक और बात लोगों को खटक रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अभी जनसुनवाई और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन मौके पर पाइप और निर्माण सामग्री पहुंचा दी गई है। इससे लोगों को लग रहा है कि कहीं न कहीं पेड़ों की कटाई को लेकर जल्दबाजी दिखाई जा रही है।
2 जून को इस मामले में जनसुनवाई रखी गई है। खास बात यह है कि अब तक 200 से ज्यादा नागरिक अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। इससे साफ है कि यह मसला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के बड़ी संख्या में लोग इस फैसले के खिलाफ हैं।
पक्षियों और जैव विविधता पर भी पड़ेगा असर
Sonegaon Amrai जंगल केवल हरियाली का इलाका नहीं बल्कि कई पक्षियों और छोटे जीवों का बसेरा भी है। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि यहां सालभर कई दुर्लभ और प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं। इसके अलावा मोरों की मौजूदगी भी इस इलाके की खास पहचान मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई तो इसका असर पूरे इकोसिस्टम पर पड़ेगा। पक्षियों के घोंसले उजड़ेंगे, छोटे जीवों का ठिकाना खत्म होगा और इलाके का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
शहर में पहले ही हरियाली लगातार कम हो रही है। ऐसे में जो प्राकृतिक क्षेत्र अभी भी बचे हुए हैं, उन्हें बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
नागरिकों ने सुझाया दूसरा रास्ता
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि मलवाहिनी परियोजना का रूट बदला जा सकता है। उनका सुझाव है कि इसे पास के नाले या पोहरा नदी के किनारे से निकाला जाए ताकि पेड़ों को काटने की नौबत ही न आए।
नागरिकों का मानना है कि आज के दौर में इंजीनियरिंग और तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि विकास और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। जरूरत सिर्फ मजबूत इरादे और सही योजना की है।
अब 2 जून की जनसुनवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे शहर की नजर 2 जून को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हुई है। पर्यावरण प्रेमी, वरिष्ठ नागरिक और स्थानीय रहवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी बात सुनी जाएगी और पेड़ों की कटाई के फैसले पर दोबारा गौर किया जाएगा।
लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन अगर इसकी कीमत शहर की हरियाली और प्राकृतिक विरासत को चुकानी पड़े तो यह सौदा किसी भी तरह से मुनासिब नहीं कहा जा सकता। सोनेगांव आमराई के 61 पेड़ों को बचाने की यह लड़ाई अब सिर्फ पेड़ों की नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर और हराभरा शहर बचाने की लड़ाई बन चुकी है।
यह भी पढ़े –
Nagpur में बनेगा देश का पहला ड्राई डाइजेशन CBG plant, CM Fadnavis ने बताया game changer
Nagpur Dobi नगर स्लम पर crisis, विधायक विकास ठाकरे और Wasim Khan ने उठाई पुनर्वास की मांग






