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Operation Thunder का असर, Nagpur में 1,366 लोग गिरफ्तार
Nagpur में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाया जा रहा पुलिस का खास अभियान “Operation Thunder” लगातार बड़े नतीजे दे रहा है। इस मुहिम के तहत शहर पुलिस ने अब तक 1,366 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 20 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की ड्रग्स और दूसरी गैरकानूनी चीजें जब्त की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे समाज को नशे की लत से बचाने की एक कोशिश है।
Nagpur Police के कमिश्नर डॉ. रविंदर कुमार सिंघल ने इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि ऑपरेशन थंडर का मकसद केवल ड्रग्स बेचने वालों को पकड़ना नहीं है, बल्कि उन पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह मुहिम कानून लागू करने के साथ-साथ एक सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही है।
मार्च 2024 से शुरू हुई थी बड़ी मुहिम
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च 2024 से 1 जून 2026 के बीच ऑपरेशन थंडर के तहत लगातार कार्रवाई की गई। इस दौरान एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत कुल 1,037 मामले दर्ज किए गए।
इन मामलों में पुलिस ने अलग-अलग तरह के नशीले पदार्थ बरामद किए। कार्रवाई इतनी बड़ी रही कि कुल मिलाकर 1.5 टन से ज्यादा मादक पदार्थ जब्त किए गए। यह आंकड़ा बताता है कि नागपुर और आसपास के इलाकों में नशे का कारोबार किस स्तर तक फैल चुका था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते इन गिरोहों पर लगाम नहीं लगाई जाती तो बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आ सकते थे।
गांजा तस्करों पर सबसे बड़ा शिकंजा
Operation Thunder के दौरान सबसे ज्यादा फोकस गांजा तस्करी पर रखा गया। पुलिस ने 184 अलग-अलग ऑपरेशन चलाकर गांजा सप्लाई करने वाले गिरोहों पर कार्रवाई की।
इन छापों और ऑपरेशनों के दौरान करीब 1,370 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। साथ ही 269 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

जांच में पता चला कि कई तस्कर दूसरे राज्यों से गांजा लाकर नागपुर और आसपास के इलाकों में सप्लाई कर रहे थे। कुछ आरोपी तो ऐसे भी मिले जो लंबे समय से इस धंधे में शामिल थे और अपना नेटवर्क तैयार कर चुके थे।
पुलिस ने ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की, जिससे ड्रग्स सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है।
सिर्फ पेडलर्स नहीं, पूरे नेटवर्क पर वार
Nagpur Police कमिश्नर डॉ. सिंघल का कहना है कि ऑपरेशन थंडर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल छोटे-मोटे ड्रग पेडलर्स को नहीं पकड़ा गया, बल्कि उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई जो पर्दे के पीछे बैठकर पूरा कारोबार चला रहे थे।
पुलिस ने तकनीकी जांच, मुखबिरों की जानकारी और लगातार निगरानी के जरिए कई ऐसे नेटवर्क का पता लगाया जो अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए थे।
अधिकारियों के मुताबिक नशे का कारोबार अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रह गया है। इसके तार कई राज्यों और शहरों से जुड़े होते हैं। ऐसे में पूरे नेटवर्क को तोड़ना बेहद जरूरी था और ऑपरेशन थंडर उसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
युवाओं को बचाने की कोशिश
पुलिस का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ गिरफ्तारी और छापेमारी से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।
इसी वजह से Operation Thunder के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कई जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए। छात्रों को बताया गया कि नशे की लत कैसे उनकी पढ़ाई, करियर, सेहत और परिवार को प्रभावित करती है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार युवा शौक या दोस्तों के दबाव में नशे की तरफ बढ़ जाते हैं और फिर धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में फंस जाते हैं। इसलिए समय रहते जागरूकता बेहद जरूरी है।
20 करोड़ से ज्यादा का माल जब्त
इस पूरे अभियान के दौरान पुलिस ने जो कार्रवाई की, उसमें बरामद किए गए नशीले पदार्थों और अन्य गैरकानूनी सामान की कीमत 20 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
यह जब्ती सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि उन अपराधी गिरोहों के लिए भी बड़ा झटका है जो इस कारोबार से करोड़ों रुपये कमा रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी ड्रग नेटवर्क की सप्लाई और कमाई दोनों पर एक साथ चोट की जाती है, तभी उसके खत्म होने की संभावना बढ़ती है।
समाज के सहयोग की जरूरत
Nagpur Police ने शहरवासियों से भी अपील की है कि अगर उनके आसपास किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या ड्रग्स से जुड़ी जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग के बिना नशे के खिलाफ जंग को पूरी तरह नहीं जीता जा सकता। कई मामलों में स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर ही बड़े तस्करों तक पहुंचना संभव हुआ है।
पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
आगे भी जारी रहेगा Operation Thunder
Nagpur Police का साफ कहना है कि ऑपरेशन थंडर अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में भी ड्रग्स तस्करों और उनके नेटवर्क के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस का लक्ष्य केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं, बल्कि नागपुर को एक सुरक्षित और नशामुक्त शहर बनाना है। अब तक की कार्रवाई से यह जरूर साबित हुआ है कि अगर प्रशासन, पुलिस और समाज मिलकर काम करें तो नशे के कारोबार पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।
1,366 गिरफ्तारियां, 1,037 मामले, 1.5 टन से ज्यादा ड्रग्स की बरामदगी और 20 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती यह दिखाने के लिए काफी है कि ऑपरेशन थंडर नागपुर पुलिस की सबसे असरदार मुहिमों में से एक बन चुका है। आने वाले समय में इस अभियान से और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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