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Nagpur में बनेगा देश का पहला ड्राई डाइजेशन CBG plant, CM Fadnavis ने बताया game changer

Nagpur में बनेगा देश का पहला ड्राई डाइजेशन CBG plant, CM Fadnavis ने बताया game changer

Nagpur अब सिर्फ ऑरेंज सिटी या महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी भर नहीं रह गया है, बल्कि शहर एक ऐसे बड़े प्रोजेक्ट की वजह से सुर्खियों में है जो आने वाले वक्त में पूरे मुल्क के लिए मिसाल बन सकता है।

भांडेवाड़ी इलाके में बन रहा देश का पहला ड्राई डाइजेशन बेस्ड CBG यानी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट इन दिनों खूब चर्चा में है। हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रोजेक्ट का दौरा किया और इसकी तरक्की का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान फडणवीस ने साफ कहा कि ये सिर्फ कचरा निपटाने का प्लांट नहीं है, बल्कि वेस्ट मैनेजमेंट की दुनिया में एक बड़ा इंकलाब साबित हो सकता है। उनका कहना था कि जिस तरह शहरों में हर रोज़ कचरे के पहाड़ खड़े हो रहे हैं, ऐसे में इस तरह की टेक्नोलॉजी वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

भांडेवाड़ी की बदलेगी पूरी तस्वीर

एक दौर था जब भांडेवाड़ी का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में बदबू, गंदगी और कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेरों की तस्वीर उभरती थी। लेकिन अब वही जगह मॉडर्न वेस्ट-टू-एनर्जी हब बनने जा रही है।

करीब 30 एकड़ में फैला ये प्रोजेक्ट नागपुर नगर निगम के ठोस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करेगा। सबसे खास बात ये है कि इसमें ड्राई एनारोबिक डाइजेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अभी तक भारत में इतने बड़े स्तर पर कहीं नहीं अपनाई गई है।

यूरोप के कई मुल्कों में ये टेक्नोलॉजी पहले से काम कर रही है और अब पहली बार नागपुर इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाला शहर बनने जा रहा है।

आखिर ये ड्राई डाइजेशन है क्या?

आसान ज़ुबान में समझें तो आम बायोगैस प्लांट ज़्यादातर गीले कचरे पर काम करते हैं। लेकिन ड्राई डाइजेशन सिस्टम कम नमी वाले मिले-जुले कचरे को भी आसानी से प्रोसेस कर सकता है।

इस प्रोसेस में कचरे को खास टनल्स में रखा जाता है, जहां ऑक्सीजन के बिना बैक्टीरिया उसे धीरे-धीरे तोड़ते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान गैस पैदा होती है, जिसे बाद में शुद्ध करके CBG plant में बदला जाता है।

यानी जो कचरा आज लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है, वही कल गाड़ियों और इंडस्ट्री के लिए ईंधन का काम करेगा।

हर दिन हजारों टन कचरे का होगा इलाज

Nagpur शहर से रोज़ बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लांट को बड़े स्तर पर तैयार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने भले 1000 टन कचरा प्रोसेस करने की योजना बनाई थी, लेकिन डेवलपर कंपनी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए करीब 1500 टन प्रतिदिन क्षमता वाला सिस्टम तैयार किया है।

इसमें जैविक कचरे से बायोगैस तैयार होगी, जबकि बाकी रिसाइकिल होने वाला सामान अलग किया जाएगा। इससे लैंडफिल साइट पर जाने वाला कचरा काफी कम हो जाएगा।

28 टन बायोगैस हर रोज़

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे दिलचस्प बात इसकी गैस उत्पादन क्षमता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लांट रोज़ाना करीब 550 से 600 टन ऑर्गेनिक वेस्ट प्रोसेस करके लगभग 28 टन CBG plant तैयार करेगा।

यानी जिस कचरे को आज बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वही आने वाले दिनों में करोड़ों रुपये की हरित ऊर्जा पैदा करेगा।

इसके अलावा रोज़ करीब 400 टन RDF यानी Refuse Derived Fuel भी तैयार होगा, जिसका इस्तेमाल उद्योगों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है।

नगर निगम को होगा फायदा

आमतौर पर कचरा प्रबंधन परियोजनाओं में नगर निगमों को भारी रकम खर्च करनी पड़ती है। लेकिन नागपुर का ये मॉडल थोड़ा अलग है।

बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट ज़ीरो टिपिंग फीस मॉडल पर तैयार किया गया है। मतलब नगर निगम को कचरा प्रोसेसिंग के लिए अलग से भारी भुगतान नहीं करना पड़ेगा। उल्टा भविष्य में उसे रॉयल्टी से आमदनी भी हो सकती है।

यही वजह है कि इसे देश के सबसे अनोखे वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल्स में से एक माना जा रहा है।

पर्यावरण को भी मिलेगा बड़ा सुकून

कचरे के ढेरों से निकलने वाली मीथेन गैस पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक मानी जाती है। खुले में पड़ा कचरा हवा और जमीन दोनों को प्रभावित करता है।

लेकिन इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद बड़ी मात्रा में कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

इसके साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

मुख्यमंत्री ने क्यों कहा “गेम चेंजर”?

निरीक्षण के दौरान CM Fadnavis ने कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ Nagpur के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन सकता है।

उनका मानना है कि अगर दूसरे शहर भी इसी तरह की तकनीक अपनाएं तो कचरे की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

फडणवीस ने इस प्रोजेक्ट को “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि आने वाले वक्त में भारत को वेस्ट-टू-वेल्थ यानी कचरे से कमाई के मॉडल पर आगे बढ़ना होगा।

Nagpur बनेगा देश का नया मॉडल

भांडेवाड़ी का ये प्रोजेक्ट अब सिर्फ एक प्लांट नहीं रह गया है, बल्कि Nagpur की नई पहचान बनता जा रहा है। एक तरफ शहर का कचरा कम होगा, दूसरी तरफ हरित ऊर्जा पैदा होगी, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले महीनों में नागपुर देश का पहला ऐसा बड़ा शहर बन सकता है जहां कचरे के पहाड़ों को ऊर्जा और कमाई के बड़े जरिये में तब्दील किया जाएगा।

यही वजह है कि अब लोगों की निगाहें इस प्रोजेक्ट पर टिकी हुई हैं। क्योंकि जो चीज़ कभी परेशानी मानी जाती थी, वही अब Nagpur के लिए तरक्की और विकास का नया रास्ता खोलती दिखाई दे रही है।

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