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Bawankule के इस्तीफे के बाद Nagpur MLC Seat पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को वोटिंग

Bawankule के इस्तीफे के बाद Nagpur MLC Seat पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को वोटिंग

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर चुनावी गर्मी महसूस होने लगी है। Nagpur लोकल अथॉरिटी MLC सीट पर उपचुनाव का ऐलान हो चुका है और अब तमाम सियासी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलना शुरू कर दी हैं।

ये सीट बीजेपी के बड़े नेता चंद्रशेखर Bawankule के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग के मुताबिक 18 जून को वोट डाले जाएंगे, जबकि 22 जून को नतीजे सामने आएंगे।

जैसे ही तारीखों का ऐलान हुआ, वैसे ही नागपुर की सियासत में चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया। हर तरफ यही बात हो रही है कि आखिर इस सीट पर किसका कब्जा होगा और कौन बाज़ी मार ले जाएगा।

Bawankule के इस्तीफे के बाद खाली हुई Nagpur MLC Seat

दरअसल, Chandrashekhar Bawankule ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद ये सीट खाली हो गई और अब उसी पर उपचुनाव कराया जा रहा है।

Bawankule बीजेपी के मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं और नागपुर में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी इस सीट को किसी भी हाल में अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी इस मौके को हाथ से जाने देने के मूड में नजर नहीं आ रहा।

क्या होता है लोकल अथॉरिटी MLC Election?

बहुत से लोग ये सोचते हैं कि आखिर MLC Election में वोट कौन डालता है। तो बता दें कि इस चुनाव में आम जनता सीधे वोट नहीं करती। इसमें नगर निगम, जिला परिषद, नगर परिषद और पंचायत समिति के चुने हुए प्रतिनिधि वोट डालते हैं।

यानी ये मुकाबला पूरी तरह सियासी जोड़-तोड़, रिश्तों और स्थानीय नेताओं की पकड़ पर टिका होता है। इसलिए इस तरह के चुनाव में पर्दे के पीछे की राजनीति काफी अहम मानी जाती है।

चुनाव का पूरा शेड्यूल भी आया सामने

चुनाव आयोग ने उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है।

25 मई को नोटिफिकेशन जारी होगा

1 जून तक नामांकन भरे जाएंगे

2 जून को जांच होगी

4 जून तक नाम वापस लिए जा सकेंगे

18 जून को मतदान होगा

22 जून को नतीजे आएंगे

अब जैसे-जैसे तारीख करीब आएगी, वैसे-वैसे राजनीतिक हलचल और तेज होती जाएगी।

बीजेपी के लिए क्यों अहम है ये चुनाव?

Nagpur को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का मुख्यालय भी यहीं है। ऐसे में बीजेपी इस चुनाव को अपनी साख से जोड़कर देख रही है।

अगर पार्टी ये सीट आसानी से जीत लेती है तो ये संदेश जाएगा कि नागपुर में आज भी बीजेपी की पकड़ मजबूत है। लेकिन अगर मुकाबला कांटे का हुआ या विपक्ष ने टक्कर दे दी, तो राजनीतिक मायने बदल सकते हैं।

विपक्ष भी बना रहा रणनीति

महाविकास आघाड़ी भी इस चुनाव को हल्के में नहीं ले रही। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी के नेता लगातार बैठकों में जुटे हुए बताए जा रहे हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि विपक्ष ऐसा उम्मीदवार उतार सकता है जो स्थानीय निकायों में मजबूत पकड़ रखता हो। क्योंकि इस चुनाव में असली खेल वोटों से ज्यादा रिश्तों और संपर्कों का होता है।

स्थानीय निकायों के समीकरण होंगे अहम

इस चुनाव में सबसे बड़ा रोल स्थानीय निकायों का रहने वाला है। किस पार्टी के कितने नगरसेवक, जिला परिषद सदस्य या पंचायत प्रतिनिधि हैं, वही जीत-हार तय करेंगे।

हाल ही में हुए कई स्थानीय चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसी वजह से पार्टी का कॉन्फिडेंस काफी हाई बताया जा रहा है। मगर राजनीति में आखिरी वक्त तक कुछ भी बदल सकता है।

Nagpur में बढ़ेगी सियासी सरगर्मी

आने वाले दिनों में नागपुर में नेताओं की आवाजाही बढ़ सकती है। बंद कमरों में बैठकों का दौर चलेगा, समर्थन जुटाने की कोशिशें होंगी और कई नए राजनीतिक समीकरण भी देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि बीजेपी किसे मैदान में उतारती है और विपक्ष किस चेहरे पर दांव खेलता है।

चुनाव से मिलेगा बड़ा सियासी संदेश

भले ही ये सिर्फ एक सीट का चुनाव हो, लेकिन इसके नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा पैगाम दे सकते हैं। खासकर ऐसे वक्त में जब राज्य की राजनीति लगातार बदल रही है।

18 जून की वोटिंग और 22 जून के नतीजे सिर्फ Nagpur ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की सियासत का मिजाज समझाने वाले साबित हो सकते हैं।

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