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Nagpur को “Crime Capital” कहना गलत? पूर्व CP बीके उपाध्याय ने NCRB डेटा पर उठाए सवाल

Nagpur को “Crime Capital” कहना गलत? पूर्व CP बीके उपाध्याय ने NCRB डेटा पर उठाए सवाल

नागपुर को “Crime Capital” कहना गलत?

नागपुर को लेकर अक्सर ये कहा जाता रहा है कि शहर में जुर्म का ग्राफ काफी ज्यादा है और इसी वजह से इसे “Crime Capital” जैसा टैग भी दिया गया। लेकिन अब नागपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीके उपाध्याय(CP BK Upadhyay) ने इस पूरी सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि शहर की तस्वीर जिस तरह पेश की गई, वो पूरी तरह सही नहीं है।

उन्होंने साफ लफ्ज़ों में कहा कि NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो का डेटा सिस्टम काफी पुराना हो चुका है और उसी की वजह से कई शहरों की गलत तस्वीर सामने आती है। उनके मुताबिक सिर्फ आंकड़ों को देखकर किसी शहर को बदनाम कर देना मुनासिब नहीं है।

“नागपुर को बेवजह बदनाम किया गया”

बीके उपाध्याय का कहना है कि नागपुर को “क्राइम कैपिटल” बोलना शहर की इमेज को नुकसान पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि लोग NCRB की रिपोर्ट देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का पूरा सिस्टम और डेटा जुटाने का तरीका नहीं समझते।

उनके मुताबिक कई बार छोटी-छोटी शिकायतें भी FIR में दर्ज हो जाती हैं, जिससे आंकड़े बढ़े हुए दिखाई देते हैं। जबकि दूसरे शहरों में ऐसे मामलों को अलग तरीके से हैंडल किया जाता है। ऐसे में सिर्फ नंबर देखकर तुलना करना सही नहीं माना जा सकता।

NCRB के पुराने सिस्टम पर सवाल

पूर्व CP का कहना है कि पूरे देश में अपराध दर्ज करने का तरीका एक जैसा नहीं है। कहीं पुलिस हर शिकायत तुरंत दर्ज कर लेती है, तो कहीं पहले जांच होती है और फिर मामला लिखा जाता है।

उन्होंने कहा कि नागपुर पुलिस ने हमेशा कोशिश की कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। लोगों की शिकायतें दर्ज की गईं, इसलिए आंकड़े ज्यादा दिखे। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि शहर बाकी जगहों से ज्यादा खतरनाक है।

उनका मानना है कि NCRB data को अब अपना डेटा सिस्टम और अपराधों की कैटेगरी तय करने का तरीका बदलने की जरूरत है ताकि सही तस्वीर सामने आ सके।

“अब पहले से ज्यादा महफूज़ है नागपुर”

बीके उपाध्याय ने दावा किया कि पिछले कुछ सालों में नागपुर में पुलिसिंग काफी मजबूत हुई है। शहर में CCTV कैमरों का नेटवर्क बढ़ाया गया, डिजिटल निगरानी शुरू हुई और गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने हिस्ट्रीशीटरों और संगठित अपराध से जुड़े लोगों पर नकेल कसने के लिए कई बड़े अभियान चलाए। इसी का नतीजा है कि हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं।

उनके मुताबिक अगर कोई शहर हर शिकायत दर्ज कर रहा है तो इसका मतलब ये है कि वहां की पुलिस अपना काम ईमानदारी से कर रही है, ना कि शहर में सिर्फ जुर्म बढ़ रहा है।

राजनीति में भी बना मुद्दा

Nagpur को “Crime Capital” कहने का मामला कई बार सियासी बहस का हिस्सा भी बना। विपक्षी दल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए इस टैग का इस्तेमाल करते रहे हैं।

क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र की राजनीति का अहम शहर माना जाता है, इसलिए यहां अपराध के आंकड़ों को लेकर बयानबाजी भी खूब होती रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ आंकड़े देखकर किसी शहर की असली हालत समझना आसान नहीं होता।

ज्यादा FIR का मतलब हमेशा ज्यादा अपराध नहीं

कई एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अगर किसी शहर में ज्यादा FIR दर्ज हो रही हैं तो जरूरी नहीं कि वहां अपराध सबसे ज्यादा हों। कई बार इसका मतलब ये भी होता है कि लोग पुलिस पर भरोसा करते हैं और शिकायत दर्ज कराने से डरते नहीं।

नागपुर पुलिस लंबे समय से लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करती रही है। यही वजह है कि रिकॉर्ड में मामलों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है।

टेक्नोलॉजी से बदली पुलिसिंग

बीके उपाध्याय ने अपने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि नागपुर पुलिस ने टेक्नोलॉजी का काफी इस्तेमाल बढ़ाया। शहर में CCTV कैमरे लगाए गए, ऑनलाइन शिकायत सिस्टम मजबूत किया गया और अपराधियों पर डिजिटल निगरानी रखी गई।

इसके अलावा गैंगस्टरों और बड़े अपराधियों के खिलाफ MCOCA और MPDA जैसे सख्त कानूनों के तहत कार्रवाई भी की गई। उनका कहना है कि पुलिस लगातार शहर को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश करती रही है।

“लोगों का भरोसा जीतना ज्यादा जरूरी”

पूर्व पुलिस कमिश्नर का कहना है कि पुलिस का असली मकसद सिर्फ आंकड़े कम दिखाना नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों में सुरक्षा का एहसास पैदा करना ज्यादा जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर लोग खुलकर शिकायत दर्ज करा पा रहे हैं, तो यह अच्छी पुलिसिंग की निशानी मानी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने मीडिया और राजनीतिक दलों से भी अपील की कि अपराध के आंकड़ों को जिम्मेदारी से पेश किया जाए ताकि किसी शहर की छवि बेवजह खराब ना हो।

अब आगे क्या?

बीके उपाध्याय के बयान के बाद नागपुर में एक बार फिर “क्राइम कैपिटल” वाले टैग पर बहस तेज हो गई है। लोग अब NCRB के डेटा सिस्टम और अपराधों की गिनती के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।

कई जानकारों का मानना है कि पूरे देश में अपराध दर्ज करने का एक जैसा सिस्टम होना चाहिए, ताकि किसी भी शहर की सही और साफ तस्वीर सामने आ सके। फिलहाल इस मुद्दे पर चर्चा गर्म है और आने वाले दिनों में इस पर और बहस देखने को मिल सकती है।

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