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Heatwave alert in Vidarbha: महाराष्ट्र के इन शहरों में सूरज बरसा रहा आग पारा 46°C पार

Heatwave alert in Vidarbha: महाराष्ट्र के इन शहरों में सूरज बरसा रहा आग पारा 46°C पार

Amravati, Wardha और Akola सबसे ज्यादा तपे

महाराष्ट्र का Vidarbha इन दिनों ऐसी झुलसा देने वाली गर्मी की गिरफ्त में है कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। सूरज की तपिश ने पूरा इलाका तवे की तरह गर्म कर दिया है। Amravati, Wardha और Akola में पारा 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है। हालत ये है कि दोपहर के वक्त सड़कें सूनी नजर आती हैं और हर शख्स बस किसी तरह ठंडी हवा या बारिश का इंतज़ार कर रहा है।

ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक Vidarbha के कई जिलों में गर्म हवाओं यानी Heatwave ने लोगों का जीना बेहाल कर दिया है। सुबह 10 बजे के बाद ही धूप इतनी तेज हो जाती है कि बाहर निकलते ही चेहरा जलने लगता है।

इस वक्त Amravati और Wardha देश के सबसे गर्म शहरों में गिने जा रहे हैं। यहां तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया है। अकोला भी पीछे नहीं है, वहां भी पारा 45 डिग्री के ऊपर बना हुआ है।

Nagpur, यवतमाल और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म हो चुकी हैं। लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही। पंखे और कूलर जवाब देने लगे हैं, जबकि एसी वाले घरों में भी लोग बेचैन नजर आ रहे हैं।

दोपहर में बाजारों में पसरा सन्नाटा, गर्मी का आलम ऐसा है कि दोपहर के वक्त बाजारों और सड़कों पर वीरानी दिखाई दे रही है। लोग सिर्फ बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं।

चाय की टपरी से लेकर सब्जी मंडी तक हर जगह यही चर्चा सुनने को मिल रही है कि “इस बार की गर्मी ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।” दुकानदारों का कहना है कि दोपहर में ग्राहक लगभग गायब हो जाते हैं, जिससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

मजदूर और ट्रैफिक पुलिस सबसे ज्यादा परेशान

सबसे ज्यादा मुश्किल उन लोगों को हो रही है जिन्हें धूप में काम करना पड़ता है। मजदूर, रिक्शा चालक, डिलीवरी बॉय और ट्रैफिक पुलिसकर्मी घंटों तपती सड़क पर ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

अमरावती में तो कुछ ट्रैफिक पुलिसवालों को गर्मी से बचाने के लिए खास “एयर कूल्ड जैकेट” दी गई हैं ताकि वो लू और तेज धूप से कुछ राहत महसूस कर सकें।

कई मजदूरों का कहना है कि दोपहर में काम करना अब जान जोखिम में डालने जैसा लगने लगा है। गर्म हवा सीधे शरीर को झुलसा रही है।

अस्पतालों में बढ़ रहे हीट स्ट्रोक के मरीज

भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिखने लगा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आने, उल्टी और हीट स्ट्रोक के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी बहुत तेजी से हो रही है। खास तौर पर बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं।

डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि बिना जरूरत दोपहर में बाहर न निकलें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहें।

पेड़ों की कमी और कंक्रीट जंगल बना वजह

माहिरों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के पीछे सिर्फ मौसम नहीं बल्कि इंसानी लापरवाही भी बड़ी वजह है। शहरों में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है और हर तरफ कंक्रीट की इमारतें खड़ी हो रही हैं।

हरियाली कम होने की वजह से जमीन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। तालाब और पानी के कई स्रोत सूखने लगे हैं। यही वजह है कि हर साल गर्मी पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही है।

लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदली

विदर्भ के कई शहरों में लोग अब सुबह जल्दी काम निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। दोपहर के वक्त ज्यादातर लोग घरों में कैद हो जाते हैं।

सड़क पर निकलने वाले लोग सिर पर गमछा, टोपी या कपड़ा बांधकर चल रहे हैं। पानी की बोतल साथ रखना अब मजबूरी बन चुका है।

स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई परिवार तो बच्चों को दोपहर में बाहर खेलने तक नहीं भेज रहे।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मौसम विभाग ने विदर्भ के कई जिलों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। अगले कुछ दिनों तक तापमान 45 डिग्री के आसपास बने रहने की संभावना जताई गई है।

हालांकि उम्मीद की जा रही है कि मई के आखिरी हफ्ते में प्री-मानसून बारिश की शुरुआत हो सकती है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

लेकिन फिलहाल हालात यही बता रहे हैं कि विदर्भ को अभी कुछ और दिन आग उगलती गर्मी झेलनी पड़ेगी।

डॉक्टरों की अहम सलाह

डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने लोगों से एहतियात बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि:

दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें

ज्यादा पानी और नींबू-पानी पीते रहें

हल्के और सूती कपड़े पहनें

बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखें

खाली पेट धूप में बाहर न निकलें

बदलता मौसम बढ़ा रहा फिक्र

हर साल बढ़ती गर्मी अब लोगों के लिए चिंता का बड़ा सबब बनती जा रही है। मौसम में हो रहा बदलाव साफ इशारा दे रहा है कि अगर पर्यावरण को बचाने के लिए अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वक्त में हालात और ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।

पेड़ लगाना, पानी बचाना और प्रदूषण कम करना अब सिर्फ सलाह नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। वरना आने वाले सालों में ऐसी गर्मी आम बात बन जाएगी।

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