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Nagpur में Nana Patekar का बड़ा बयान, पानी की बर्बादी रोकने की दी सलाह

Nagpur में Nana Patekar का बड़ा बयान, पानी की बर्बादी रोकने की दी सलाह

मशहूर समाजसेवी Nana Patekar एक बार फिर किसानों और पानी के मसले को लेकर लोगों के बीच नजर आए। Nagpur में हुए एक खास प्रोग्राम में उन्होंने बड़े साफ लफ्ज़ों में कहा कि अगर अभी भी लोग पानी की अहमियत नहीं समझेंगे, तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा मुश्किल हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पानी बचाना अब सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं रह गया, बल्कि हर इंसान को इसमें अपना हिस्सा निभाना होगा। गांव हो या शहर, हर जगह पानी की किल्लत धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और अगर वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली नस्लों को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

“पानी नहीं रहेगा तो जिंदगी भी मुश्किल हो जाएगी”

Nana Patekar ने अपने अंदाज़ में लोगों को समझाया कि इंसान आज छोटी-छोटी चीज़ों में पानी बरबाद कर देता है, लेकिन यही लापरवाही कल बहुत बड़ा संकट बन सकती है। उन्होंने कहा कि गांवों में हालात इतने खराब हैं कि कई जगह लोगों को पीने का साफ पानी तक आसानी से नहीं मिलता।

उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि किसान पूरे साल मेहनत करता है, लेकिन जब खेतों तक पानी नहीं पहुंचता तो उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है। ऐसे में कई किसान मायूस होकर गलत कदम उठा लेते हैं। नाना ने कहा कि ये सिर्फ किसानों का दर्द नहीं, बल्कि पूरे मुल्क की परेशानी है।

किसानों का दर्द करीब से देखा है

प्रोग्राम में बात करते हुए नाना काफी जज़्बाती भी नजर आए। उन्होंने बताया कि जब वो विदर्भ के गांवों में गए और किसानों के घरों की हालत देखी, तब उन्हें एहसास हुआ कि असली तकलीफ क्या होती है।

उन्होंने कहा कि कई घरों में कमाने वाला शख्स दुनिया छोड़ चुका था और पीछे सिर्फ बूढ़े मां-बाप, बीवी और छोटे बच्चे रह गए थे। किसी के घर में खाने के पैसे नहीं थे, तो कोई कर्ज में डूबा हुआ था। यही सब देखकर उन्होंने किसानों के लिए काम करने का फैसला किया।

Nana Patekar ने कहा कि इंसानियत सिर्फ बातें करने से नहीं आती, बल्कि जरूरतमंद के साथ खड़े होने से आती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर आसपास कोई किसान या गरीब परिवार मुश्किल में दिखे तो उसकी मदद जरूर करें।

जल संरक्षण को “जन आंदोलन” बनाने की जरूरत

इस मौके पर कई बड़े लोग और समाजसेवी भी मौजूद थे। सबने एक ही बात कही कि पानी बचाने की मुहिम को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहिए।

Nana Patekar ने कहा कि हर गांव में छोटे-छोटे तालाब बनने चाहिए, बारिश का पानी जमा करना चाहिए और पुराने जलस्रोतों को फिर से जिंदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर गांव का पानी गांव में ही रोक लिया जाए, तो काफी हद तक परेशानी कम हो सकती है।

उन्होंने ये भी कहा कि लोग अक्सर बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं, लेकिन जब खुद कुछ करने की बारी आती है तो पीछे हट जाते हैं। जबकि असली बदलाव तभी आएगा जब आम आदमी खुद आगे आएगा।

नौजवानों से खास अपील, नाना ने युवाओं को भी खास पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया में ज्यादा वक्त बर्बाद कर रही है। अगर यही नौजवान अपने इलाके में पानी बचाने की छोटी-छोटी मुहिम शुरू करें, तो बड़ा बदलाव आ सकता है।

उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेजों में बच्चों को शुरू से पानी की कीमत समझानी चाहिए। क्योंकि आने वाला दौर पानी की जंग का दौर हो सकता है।

“सिर्फ सरकार के भरोसे मत बैठो”

अपने भाषण में नाना ने ये भी कहा कि हर बात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हर इंसान अपने घर में थोड़ा-थोड़ा पानी बचाने लगे, तो बहुत बड़ा फर्क पड़ सकता है।

उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि लोग गाड़ियों को धोने, पाइप खुला छोड़ने और बेवजह पानी बहाने में जरा भी नहीं सोचते। मगर यही छोटी-छोटी लापरवाहियां बाद में बड़ी मुसीबत बनती हैं।

विदर्भ में पानी का संकट अब भी बड़ा मुद्दा

विदर्भ का इलाका लंबे वक्त से सूखा और किसान आत्महत्या जैसे मसलों से जूझ रहा है। कई गांवों में आज भी खेती बारिश के भरोसे चलती है। अगर बारिश कम हो जाए तो किसानों की पूरी फसल खराब हो जाती है।

ऐसे में जल संरक्षण को लेकर शुरू हुई ये मुहिम लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण मानी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर समाज और सरकार मिलकर ईमानदारी से काम करें, तो हालात जरूर बदल सकते हैं।

इंसानियत सबसे बड़ी चीज़

Nana Patekar ने अपने अंदाज़ में ये भी कहा कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों, जाति या मजहब से नहीं, बल्कि उसके काम से होती है। अगर कोई प्यासे इंसान को पानी पिला दे या किसी गरीब किसान की मदद कर दे, तो वही सबसे बड़ी इबादत है।

उनकी बातें सुनकर वहां मौजूद लोग भी काफी प्रभावित नजर आए। कई लोगों ने इस मुहिम से जुड़ने का भरोसा दिया।

आखिर में Nana Patekar का सीधा पैगाम, अपने भाषण के आखिर में नाना पाटेकर ने लोगों से कहा कि पानी को सिर्फ एक जरूरत मत समझो, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों की अमानत मानो। अगर आज इसे बचा लिया गया, तो कल जिंदगी आसान होगी। वरना आने वाला वक्त बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अब वक्त सिर्फ भाषण देने का नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने का है। क्योंकि जब पानी बचेगा, तभी किसान बचेगा और जब किसान बचेगा, तभी देश तरक्की करेगा।

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